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आयुर्वेदनामा: भुई आंवला की जड़, तना, पत्ती, पुष्प और फल सभी के हैं औषधीय उपयोग

आज आयुर्वेदनामा में हम भुई आंवला के बारे में जानकारी हासिल करेंगे जो कि एक बहुवर्षीय शाक जातीय औषधीय पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम ‘फाईलेन्थस एमेरस’ है, जो यूकार्बिएसी कुल के अंतर्गत आता है।

भुई आंवला जिसको भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों जैसे भुई आंवला, भू-आमलकी, हजार दाना, जर माला, जंगली आंवला, तेलगू में नेला उसिरी, उड़िया में भुंई औला, संस्कृत में भूम्यामलकी, गुजराती में भोंय आंवली और मराठी में भुंई आंवली नाम से जाना जाता है।

भुई आंवला का सम्पूर्ण भाग जड़, तना, पत्ती, पुष्प और फल औषधीय उपयोग में आता है। भारत में यह लगभग सभी क्षेत्रों में बहुतायत में खरपतवार के रूप में मिलता है।

भुई आंवला के छोटे-छोटे पौधे वर्षाऋतु में उत्पन्न होते हैं। ये पौधे शरद-ऋतु में फूलने-फलने के बाद गर्मी के मौसम में सूख जाते हैं। इसके फल धात्रीफल की भांति गोल लेकिन आकार में छोटे होते हैं। यह 10-60 सेंमी ऊंचा, बहुवर्षीय एवं सीधे बढ़ने वाला पौधा है।

भुई आंवला चिकित्सा पद्धति में प्रयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पौधा है। फाइलेनथिन (0.5% शाक, 1.56% पत्ती, 0.01% जड़ और 0.007% तन्ना) एवं हाइपोफाइलेनथिन इसमें मुख्य एल्कलॉइड लिनिन्स के रूप में पाए जाते हैं।

भुई आंवला लिवर की खराबी, विशेष रूप से हेपेटाइटिस बी तथा पीलिया के कारण आंत संक्रमण और मधुमेह आदि के निदान में जन साधारण की दवाई के रूप में उपयोग में लिया जाता है।

यूनानी चिकित्सा पद्धति में इसका फल खुजली, घावों और गोलकृमि संबंधी रोगों में उपयोग लिया जाता है। इसकी जड़ का मिश्रण एक उत्तम बलवर्धक टॉनिक है। यह शरीर को शक्ति प्रदान कर बलवान बनाता है।

भुई आंवला आंखों की बीमारियों, बुखार, चर्म रोगों, पेशाब से संबंधित विकारों जैसे पेशाब में खून आना, पेशाब में जलन होना आदि के उपचार में भी प्रयोग किया जाता है।

एनीमिया, अस्थमा, ब्रोकइटिस, खांसी, पेचिश, सूजाक, हेपेटाइटिस, पीलिया रोग एवं पेट में ट्यूमर होने की दशा में उपयोग किया जा सकता है। इसके पत्तों में पौटाशियम की काफी अधिक मात्रा (लगभग 0.83%) होने के कारण यह मूत्रवध॔क औषधि है।

भारत एवं विश्व में हुए भुई आंवला पर शोध परिणामों से पता चला है कि औषधीय और जैविक गतिविधियों में एंटी वायरल, एंटी कैंसर, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल, एंटी स्पस्दोमिक, वायुनाशक, मूत्रवर्धक, ज्वरनाशक, पीड़ाहर और उच्च रक्तचाप के लिए उपयोगी पाया गया है।

भारत में यह मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, सिक्किम, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्य में खरपतवार के रूप में पाया जाता है।

सिम-जीवन भुई आंवला की अधिक उत्पादन देने वाली उन्नतशील प्रजाति है, जिसे केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ द्वारा विकसित किया गया है। आयुर्वेदाचार्य या विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही आप इस पौधे का सेवन करना चाहिए।

संपादन: मोईनुद्दीन चिश्ती

आशीष कुमार
आशीष कुमार
लेखक सीएसआईआर, केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप)अनुसंधान केंद्र, बोदुप्पल, हैदराबाद में कार्यरत हैं।

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