Home कला एवं संस्कृति उत्तराखंड छोड़ लखनऊ में बसे लेकिन ऐपण कलाकृतियां बनाकर सहज रहे हैं...

उत्तराखंड छोड़ लखनऊ में बसे लेकिन ऐपण कलाकृतियां बनाकर सहज रहे हैं पहाड़ी संस्कृति

कहते हैं कि आप जहां रहे हों, वह जगह आपमें रच बस जाती है। ऐसा ही कुछ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में रहने वाले शमशाद अहमद के साथ हुआ। खुद को छोटा सा आर्टिस्ट आर्टिस्ट कहने वाले शमशाद ज़िंदगी का एक अरसा पहाड़ों में जिए हैं। गत 20 वर्षों से वे इन पहाड़ों से दूर लखनऊ में हैं।

वे कहते हैं, “वैसे तो सब ठीक है, बस पहाड़ों की याद बहुत आती है। इस याद की टीस को कम करने के लिए मैं उत्तराखंड की विलुप्त होती लोक कला, संस्कृति, पौराणिक वाद्ययंत्रों, छोलिया नर्तक व ऐपण की पेंटिंग बनाकर खुश हो लेता हूं। मैं यह काम गत दो दशकों से कर रहा हूं, जिससे उत्तराखंडी संस्कृति के प्रसार-प्रचार व पर्यटन को भी बढ़ावा बढावा भी मिलता है।

शमशाद अपने हाथों से उत्तराखंड की पौराणिक कला को सिर्फ उत्तराखंड तक ही नहीं, अपितु देश के कोने कोने तक पहुंचा रहे हैं। इनकी इस कला की पहचान मुख्य ‛छोलिया’ व ‛ऐपण’ है।

वे सर्वप्रथम 1997 में पिथौरागढ़ में ‛छोलिया’ की पेंटिंग बना कर चर्चा में आए थे। उसके बाद पहली बार शुरु हुए ‛छोलिया महोत्सव’ के उद्घाटन की पेंटिंग भी उन्होंने बनाई।

शमशाद ने जनवरी 2019 में देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह को ‛छोलिया’ पेंटिंग भेंट की। वहीं, जनवरी 2020 में उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल आनन्दी पटेल को अपने हाथों से बना ‛ऐपण’ भेंट की।

शमशाद इस कला को बचाए रखकर आने वाली पीढ़ी को उत्तराखंड की संस्कृति से रुबरु करवाना, पर्यटन की ओर लोगों को आकर्षित करवाने का सपना संजोए हैं। उत्तराखंडी वाद्ययंत्रों, ऐपण, छलिया, तीर्थस्थल, कुमाऊँनी महिलाओं का परिवेश, जौहार समाज की महिलाओं के आभूषणों पर विशेष पेंटिंग्स बनाई हैं तो पिथौरागढ़ में प्रतिवर्ष होने वाली ‛हिलजात्रा’ की पेंटिंग पहली बार बनाने का भी अवसर मिला।

बीते 20 सालों से इस कला को अपनी आय का माध्यम बना गुजर बसर करने वाले शमशाद को देश के कोने-कोने से ऑर्डर मिलते हैं। महोत्सव व उत्तरायणी मेले में मुख्य अथितियों को दिए जाने वाले स्मृति चिन्ह के तौर पर ऐपण पेंटिंग के ऑर्डर भी उन्हें मिल ही जाते। एक अच्छी कमाई के साथ उन्हें मान-सम्मान भी मिल रहा है।

पिथौरागढ़ के नवोदय कला केन्द्र के हेमराज बिष्ट को अपना आदर्श मानने वाला यह कलाकार इस वक़्त कई उत्तराखंड की कई पुरानी वस्तुओं की भी पेंटिंग तैयार करने में जुटा हुआ है।

अगर आप ऐपण कलाकृति ख़रीदना या उनसे सम्पर्क करना चाहते है तो इस नम्बर (7275616809) पर सम्पर्क करें!

बी पॉजिटिव इंडिया’, शमशाद अहमद के कार्यों की सराहना करता है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।

संपादन: मोईनुद्दीन चिश्ती

Avatar
News Deskhttps://www.bepositiveindia.in
युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

आयुर्वेदनामा: अत्यंत गर्म और तीखे स्वभाव की वनस्पति ‛चित्रक’

आज आयुर्वेदनामा में हम चित्रक के बारे में जानकारी हासिल करेंगे जो मुख्य रूप से पहाड़ी स्थानों व जगलों में पाया जाने...

कैरियर लैब: जनसहयोग से ले रही है आकार, ग्रामीण परिवेश के बच्चें भरेंगे उड़ान !

आपने लैब के बारे में तो अवश्य ही सुना होगा। अस्पतालों में भी जांच करने के लिए लैब या लैबोरेटरी होती हैं।...

ऋचा और फ़ाएज़: कॉफ़ी ही नहीं पिलाते, युवाओं को मंच भी प्रदान करते हैं

यह कहानी है जोधपुर में रहने वाली महिला उद्यमी ऋचा शर्मा की, जिन्हें बचपन से किताबों से लगाव था। बातचीत के दौरान...

प्रधानाध्यापिका की पहल ने बदली स्कूल की तस्वीर, गांव के सहयोग से करवा डाले 10 लाख के विकास कार्य

जहाँ चाह है, वहां राह है . . . यह पंक्तियाँ एक सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका पर सटीक बैठती...

आयुर्वेदनामा: कड़वाहट का राजा यानी ‛कालमेघ’

आज आयुर्वेदनामा में हम कालमेघ के बारे में जानकारी हासिल करेंगे जो एक बहुवर्षीय शाक जातीय औषधीय पौधा है।