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प्रसव के दौरान मां की मौत के बाद 14 घंटे से भूखी बच्ची को जज ने दूध पिलाकर गोद लिया !

अंधेरा चाहे जितना घना हो लेकिन कहीं किसी कोने में कोई न कोई चिराग जलता ही रहता है.

यह सकारात्मक पहल है माँ की ममता की, उसके दुलार की. एक औरत के औरत और उससे भी बढ़कर माँ होने की है. जब एक औरत माँ होकर फैसले लेती है तो इतिहास बनते है और उसकी मिसाल दी जाती है. गुजरात से आई ये खबर साबित करती है कि इंसानियत अभी भी ज़िंदा हैं.

गुजरात (Gujrat) के आणंद(Anand) जिले में जिला विकास अधिकारी(डीडीओ) अमित प्रकाश यादव (Amit Prakash Yadav) और उनकी जज पत्नी चित्रा (Chitra) ने एक नवजात बच्ची को गोद लिया है. उस बच्ची का नाम रखा है माही (Mahi). 3 अगस्त को अमित उस अस्पताल के दौरे पर थे जब उन्हें नवजात माही मिली. माही की मां ने डिलिवरी के दौरान दम तोड़ दिया था. माही के परिवार में पहले से दो बेटियां थीं. पत्नी की मौत से दुखी बच्ची के पिता को चिंता सताने लगी कि तीसरी बेटी का पालन-पोषण कैसे होगा. और फिर सामने आते हैं अमित और चित्रा.

माही की मां की डिलिवरी जब हुई तो उन्हें बचाया नहीं जा सका. महिला की तबीयत बिगड़ने लगी तो उन्हें वडोदरा शिफ्ट किया जा रहा था. लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई. जब अमित के पास मेडिकल सुपरिंटेंडेंट का फोन आया तो उन्हें पूरी घटना पता चली.

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अमित से रहा नहीं गया. वो अस्पताल पहुंच गए. नवजात बच्ची को देखकर उनका दिल पसीज गया. अमित ने अपनी पत्नी चित्रा से बात की. उन्हें पूरी घटना बताई. दोनों ने बच्ची को गोद लेना का फैसला किया. जल्दी से गोद लेने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी.

लेकिन इससे पहले भी दिल को छू लेने वाली एक घटना हुई थी. जब चित्रा अस्पताल पहुंची तो बच्ची भूखी थी. डॉक्टरों ने कहा कि नवजात की मां को बचाया नहीं जा सका है. इसलिए बच्ची को मां का दूध भी नसीब नहीं हुआ.

Amit and Chitra family
अपने बच्चों के साथ अमित एंड चित्रा | तस्वीर साभार : इंटरनेट

अमित के मुताबिक, मुझे बताया गया कि बच्ची ने पिछले 14 घंटे से खाना नहीं खाया है. मैंने अपनी पत्नी को यह बात बताई तो वह तुरंत स्तनपान कराने के लिए तैयार हो गईं.

अमित और चित्रा ने बच्ची के पिता और परिवार से माही को गोद लेने की सहमति ली. अमित और चित्रा का डेढ़ साल का एक बेटा भी है. दोनों ने कहा कि अब हमारा परिवार पूरा हो गया है. बच्ची की हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है.

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बी पॉजिटिव इंडिया, अमित और चित्रा के कदम की सराहना करता हैं और उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर देश में बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं का नारा जरूर सफल होगा.

Disclaimer : यह कहानी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और बी पॉजिटिव इंडिया (Be Positive India) इस कहानी में दिए गए तथ्यों की पुष्टि नहीं करता हैं. अगर आपको इस पोस्ट में दी गयी जानकारी से आपत्ति है तो हमें media.bepositive@gmail.com पर ईमेल कीजिये.

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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