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किसान के बेटे अमित ने किया राजस्थान बोर्ड में टॉप, एम्स में बनना चाहता है न्यूरोलॉजिस्ट !

मेहनत करने वालों की हार नही होती है

यह पंक्तियां राजस्थान बोर्ड के बारहवीं विज्ञान वर्ग में टॉप करने वाले होनहार विद्यार्थी पर सटीक बैठती है. दसवी में अच्छें मार्क्स आए तो किसान परिवार से आने वाले इस बेटे की मदद के लिए राजस्थान के सीकर का निजी विद्यालय मदद के लिए आगे आया.

दो वर्ष तक मुफ़्त में शिक्षा एवं छात्रावास में रहने की व्यवस्था की. इस प्रतिभावान विद्यार्थी ने भी स्कूल एवं परिवार को निराश नही किया और पुरे राज्य में दूसरी रेंक प्राप्त की. खेत-खलिहानों से निकले टॉपर का नाम है अमित शर्मा.

अमित मूलतः राजस्थान के बीकानेर जिले के गुसाईंसर, डूंगरगढ़ का रहने वाला है. अमित के पिता धर्मचंद शर्मा किसान हैं. पहले असम में रहकर कंपनियों में काम करते थे. माता पुष्पा देवी गृहिणी हैं. अमित भविष्य में एम्स दिल्ली से न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहता है.

स्कूल के शिक्षकों के साथ अमित शर्मा

अमित ने अंग्रेजी, फिजिक्स एवं बायोलॉजी विषयों में 100 में से 100 अंक हासिल किए है. जबकि कैमेस्ट्री में 99 एवं हिन्दी में 98 अंक हासिल किए हैं.

बेटे की कामयाबी पर धर्मचंद शर्मा बोले कि वे खुद तो नहीं पढ़ सके थे, मगर बेटे ने मन लगाकर पढ़ाई की और मेरिट में स्थान लाकर नाम रोशन कर दिया.

मीडिया से बातचीत में अमित ने बताया कि गांव के स्कूल से कक्षा दसवीं पास करते ही संकल्प ले लिया था कि मुझे डॉक्टर बनना है. लेकिन गांव में संसाधनों का अभाव और उपर से परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति उसमें बाधा थी. लेकिन हार नहीं मानी. मेरी राह प्रिंस स्कूल सीकर के डॉ. पीयूष सुंडा सर ने आसान की.

प्रिंस स्कूल सीकर के मुख्य प्रबंध निदेशक राजेश ढ़िल्लन ने बताया कि अमित ने पूरे राजस्थान में दूसरा स्थान हासिल किया है. इस के परिवार आर्थिक स्थिति कमजोर है. उसने दसवीं में अच्छे अंक हासिल किए थे. इसके बाद से अमित को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध करवाकर प्रिंस स्कूल प्रबंधन निशुल्क पढ़ा रहा है.

Be Positive India, अमित शर्मा को सफलता पर बधाई देता है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है.

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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