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प्रेरणा बुक बैंक : जरूरतमंदों के लिए अमिता ने खोला बुक बैंक, जुटाई 3,50,000+ पुस्तकें

चार्ल्स विलियम एलियट ने कहा है,“किताबें सबसे शांत और सबसे सदाबहार दोस्त हैं। ये सबसे सुलभ और बुद्धिमान काउंसलर और सबसे धैर्यवान शिक्षक हैं।

जब भी आप एक अच्छी पुस्तक पढते हैं, दुनिया में कहीं किसी जगह प्रकाश फैलाने के लिये एक द्वार खुल जाता है।

उपरोक्त दो पेरेग्राफ में व्यक्त सुविचार पढ़ने के बाद आपको पुस्तकों की अहमियत के बारे में काफ़ी कुछ समझ आया होगा। 

आज सफलता की इस कहानी में हम आपको एक ऐसे ही किरदार से मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने किताबों को तवज़्ज़ो दी और जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद के लिए ‛प्रेरणा बुक बैंक’ यानी निःशुल्क किताब घर बना डाला। करिश्माई
व्यक्तित्व की धनी इस महिला का नाम श्रीमती अमिता शर्मा है जो मेरठ, उत्तरप्रदेश निवासी हैं।

आजकल जब शिक्षा पूरी तरह से व्यापार बन चुकी है। बाजारीकरण के बाद जब शिक्षा मोटी कमाई का एक जरिया बनकर रह गई है, ऐसे में उनकी पहल क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। देशभर में आज इस बुक बैंक की 65 शाखाएं संचालित की जा रही हैं।

समाज में आज भी ऐसे कई बच्चे हैं, जो आर्थिक तंगी के चलते पुस्तकें नहीं खरीद पाते। अमिता को यह बात व्यथित करती थी कि होनहार होने के बावजूद किताबें न खरीद पाने के चलते न जाने कितनों की शिक्षा अधूरी रह जाती है।

बातचीत के दौरान अमिता बताती हैं,“मेरा जन्म 26 जनवरी, 1983 को गाजियाबाद के पतला गांव में हुआ। स्कूली दिनों से ही मन सामजिक कार्यों में रमता था। इंटर परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अपने गांव के छोटे बच्चों को निःशुल्क पढ़ाना शुरू किया।

शुरू से सामाजिक कार्यों में मन रमने के कारण स्नातक की शिक्षा के दौरान ही उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना में 240 घंटे सेवा का कार्य पूर्ण किया। 2012 में उनकी शादी मेरठ निवासी संजय कुमार शर्मा से हुई। विवाह उपरांत भी उन्होंने सामाजिक कार्य जारी रखे, जिसमें पति की ओर से उन्हें पूर्ण सहयोग मिला।

अपने सामाजिक कार्यों के माध्यम से अमिता ने महिला सशक्तिकरण के नए आयाम स्थापित किए। बालिका शिक्षा  को नई दिशा प्रदान करने का प्रयास किया। उनके प्रयास अनवरत रूप से अब भी जारी हैं।

बुक बैंक की शुरुआत में उन्होंने अपने खर्चे से कुछ किताबें खरीदीं। कुछ पुरानी किताबें अगली कक्षा में पहुंच चुके विद्यार्थियों से लीं। चूंकि उन्हें ऐसा करने की प्रेरणा मिली, इसके चलते उन्होंने अपने इस अभियान का नाम ‛प्रेरणा बुक बैंक’ रखा। धीरे धीरे जरूरतमंद बच्चों द्वारा किताबें लेने आने के कारण दूसरे बच्चों को भी इस बारे में जानकारी होने लगी।

इसके बाद से उन्होंने कई घरों से रद्दी एकत्र करनी शुरू कर दी। रद्दी बेचकर भी उन्होंने बहुत सारी किताबें खरीदीं। 

आज कई छात्र इस बुक बैंक का लाभ उठाकर प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। अमिता की लग्न और मेहनत के कारण ही देशभर में प्रेरणा बुक बैंक की 65 से अधिक शाखाएं संचालित ही रही हैं।

मेरठ के विजयनगर से शुरू हुआ यह कारवां अब चार राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली के अलावा मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, लोनी, बागपत, लखनऊ, रुद्रपुर, देहरादून, फरीदाबाद, वेस्ट पटेल नगर समेत कई नगरों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है।

गरीब बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए खोले गए इस बुक बैंक से अब बड़ी संख्या में बहुत सारे प्रोफेसर, शिक्षक, शिक्षाविद्व, समाजसेवी आदि भी किताबें लेने के लिए पहुंचते हैं। सभी को किताबें नि:शुल्क प्रदान की जाती हैं। वर्तमान में बुक बैंक में हजारों की संख्या में किताबें पहुंच चुकी हैं।

इस नि:शुल्क किताबघर से किताब लेने के लिए कोई भी व्यक्ति अपनी आईडी (आधार कार्ड/वोटर कार्ड) लेकर संपर्क कर सकता है। किताबघर की ओर से दिए गए प्रपत्र पर आवश्यक जानकारी देने के बाद व्यक्ति को किताब प्रदान कर दी जाती है। अध्ययन पश्चात पुस्तक लौटाने का दायित्व उसी व्यक्ति का होता है। किताब लेने की अवधि एक महीने से एक वर्ष तक होती है। 

किताबघर में हर आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए पुस्तकें उपलब्ध हैं। इनमें कोर्स बुक, मोटीवेशनल बुक, प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें, धार्मिक किताबें, साहित्यिक किताबें और अन्य कई प्रकार की उपयोगी किताबें हैं।

अमिता शर्मा या प्रेरणा बूक बैंक से सम्पर्क करने के लिए ईमेल : prernabookb@gmail.com या मोबाइल नंबर
09808713111 पर कॉल कर सकते हैं.

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प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती (देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)

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MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

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