Home Start up अशोक चौहान: जोधपुर के इस युवा को आज लैदर हैंडीक्राफ्ट्स का बादशाह...

अशोक चौहान: जोधपुर के इस युवा को आज लैदर हैंडीक्राफ्ट्स का बादशाह कहा जाता है

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है…!

राजस्थान के सूर्यनगरी कहे जाने वाले जोधपुर में रहने वाले युवा उद्यमी अशोक चौहान आज की तारीख में लैदर हैंडीक्राफ्ट की दुनिया में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अपनी मेहनत के बूते पर उन्होंने चौंका देने वाली तरक्की की है, जिसके चलते उन्हें ‛किंग ऑफ लैदर हैंडीक्राफ्ट’ कहा जाता है।

अपने छोटे भाई महेश के नाम पर अपनी हैंडीक्राफ्ट फैक्टरी का उन्होंने महेश हैंडीक्राफ्ट्स रखते हुए अपनी कंपनी की शुरुआत की। आज उनकी इस कंपनी में लैदर के हज़ारों हस्तनिर्मित प्रोडक्ट बनते हैं। निर्मित होने वाले इन आइटम्स की आज 50 से ज्यादा देशों में भारी मांग है।

अपने माता-पिता के साथ अशोक चौहान

बातचीत के दौरान वे बताते हैं,“जीवन आज जितना स्मूथ है, उतना कभी रहा नहीं। हम परिजनों की ज़िंदगी में बहुत सारे संघर्ष रहे हैं। खासकर पिता टीकमदास जी के जीवन में संघर्ष नहीं, संघर्ष में जीवन था। एक काम पर से आ जाने के बाद भी उन्हें घर चलाने के लिए घर पर ही दूसरे काम करने पड़ते थे।

खुद मैंने और मेरे भाइयों ने स्कूल से आ जाने के बाद अपने पिताजी को उनके कार्यों में सहयोग देने के लिए स्कूल बैग्स की रिपेयरिंग, साईकल सीट कवर बनाने के साथ ही हैंडीक्राफ्ट के प्रोडक्ट्स पर वेलवेट चिपकाने का कार्य किया।

एक्सपोर्टर्स की तरक्की ने आगे बढ़ने को प्रेरित किया…

पढ़ाई के दौरान जब उनकी समझ बढ़ी तो उन्होंने शहर के कुछ एक्सपोर्टर से मिलने जुलने का सिलसिला शुरू किया। इन एक्सपोर्टर्स की लाइफ स्टाइल उनकी कामयाबी देखकर वे प्रभावित होना शुरू हुए। यहीं से उनके मन में कुछ कर गुजरने का जज़्बा भर गया। वे खुद को भी भविष्य में इसी ऊंचाई पर देखना चाहते थे।

फ़िल्म अभिनेता सुनील शेट्टी और अभिनेत्री हेमा मालिनी के साथ अशोक चौहान

स्कूल से आने के बाद वे सायकिल लेकर बासनी चले जाते। वहां फैक्टरियों में हैंडीक्राफ्ट्स के कई प्रोडक्ट्स पर वे वेलवेट पेस्टिंग का काम करते। फिर इसी काम को घर पर तैयार करके देने लगे।

यह समय उनकी ग्रोथ का स्वर्णिम समय कहा जा सकता है। हालांकि इस दौरान उन्होंने कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं कमाया, पर इस सब से उनमें मार्केटिंग की समझ विकसित हुई, जिससे जीवन में मुनाफ़े की शुरुआत हुई।

लैदर पेस्टिंग से बदली ज़िंदगी..

एक बार किसी एक्सपोर्टर ने उन्हें कुर्सी और स्टूल पर वेलवेट की बजाय लैदर चिपकाने को कहा। इस बात पर वे राजी हो गए, क्योंकि उन्हें वेलवेट पेस्टिंग में पहले से ही महारथ हासिल थी। इस तरह लैदर पेस्टिंग से उनके जीवन की दूसरी शुरुआत हुई। यह काम उन्होंने 2006 तक किया।

खुद की फैक्टरी बनाई…

इसके बाद उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए खुद की फैक्ट्री की शुरूआत की। लैदर के दूसरे प्रोडक्ट भी बनाने शुरू किए। देखते ही देखते डिमांड बढ़ना शुरू हुई।

एक अवार्ड समारोह में सम्मान ग्रहण करते हुए अशोक चौहान

2011 में पहली बार दिल्ली में स्टैंड लगाया, ताकि उन्हें इंटरनेशनल बायर्स मिल सकें।किस्मत ने हाथ थाम लिया, पहले ही मौके में बायर्स की लाइन लग गई उन्हें लैदर के प्रोडक्ट्स के ऑर्डर देने के लिए।

वह साल अशोक चौहान की ज़िंदगी का टर्निंग प्वाइंट रहा। आज 50 से ज्यादा देशों में उनके द्वारा बनाए चमड़े के हस्तनिर्मित उत्पाद बेचे जा रहे हैं। 500 परिवारों की रोटी रोज़ी इसी काम से चल रही है।

हेमा मालिनी ने किया सम्मानित…

2013 में उन्होंने मुंबई स्टैंड लगाया, जिसके लिए उन्हें ‛बेस्ट स्टैंड’ का अवार्ड हेमा मालिनी और आदित्य ठाकरे के हाथों मिला। ‛जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन’ ने उन्हें ‛आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस’ के लिए सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया। टैक्स पेइंग के क्षेत्र में उन्हें हाईएस्ट कैटेगरी में भी अवार्ड मिल चुके हैं।

2017-18 का ‛राजस्थान उद्योग रत्न सम्मान’ भी उनकी झोली में गिरा। ‛हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद’ ने भी उनकी सेवाओं के लिए उन्हें सम्मानित किया।

फिर नेशनल अवार्ड ने बदल दी ज़िंदगी…

अशोक चौहान को जीवन का सबसे बड़ा सम्मान साल 2018 में मिला। ‛नेशनल एंटरप्रेन्योरशिप अवार्ड’ ने उन्हें अपने देश में एक अलग रुतबा दिलवाया। अब उनकी गिनती ऐसे उद्योगपतियों में की जाने लगी है जो अपनी मौलिक सोच और अपनी मेहनत के बूते कामयाबी की डगर पर चलते हैं।

फ़िल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी और अदित्या ठाकरे से सम्मान ग्रहण करते अशोक चौहान

पर उनकी असली सफलता इस बात से तय होती है, जब उनके माता-पिता दुर्गा देवी-टीकमदास कहते हैं,‛अशोक! हर जन्म में तुम ही हमारे बेटे बनना।’ वे अपनी जीवन संगिनी मीनाक्षी को भी अपनी सफलता में सहभागी मानते हैं, जिन्होंने उम्र के हर पड़ाव पर उनका बखूबी साथ निभाया।

ढेर सारे प्रोडक्टस की रेंज है…

आज ‛महेश हैंडीक्राफ्ट्स’ में बॉक्सिंग ग्लव्ज, स्टूल, बेग, सोफे, चेयर, हंटर, डायरी, बैंच, प्लांटर्स, रेक्स, फ़ाइल होल्डर्स, कुर्सियां, सौफे जैसे सैंकड़ों आइटम्स बनते हैं। हर आइटम बीसियों वेरायटी में हैं।

खुद को अपडेट करते रहिए…

उनकी सोच है कि जब भी आपको खुद में बदलाव करने का मौका मिले, छोड़िए मत! क्या पता यही वह सुधार हो जो आपका जीवन बदल कर रख दे। खुद को नियमित तौर पर अपडेट करते रहना हमारे ही हक़ में बेहतर है।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ अशोक चौहान

वे साल में एक बार सभी दोस्तों और परिचितों से खुद में कोई कमी या ऐसी आदत बताने को कहते हैं, जो उन्हें अच्छी नहीं लगती। ऐसी प्रतिक्रियाओं से वे खुद में सुधार कर खुद को और निखारने की कोशिश करते हैं।

उनका मानना है कि हम जब तक जीवित हैं, हमारे जीवन में हमें सुधार करते रहना चाहिए। सुधार की इस गुंजाइश को हमेशा बनाए रखिए।

सबका साथ, सबका विकास…

चौहान का मानना है कि आपकी सफलता तब तक कोई मायने नहीं रखती, जब तक आप लोगों को अपने साथ लेकर न चल रहे हों। आप अपनी कामयाबी से कितनों को कामयाब करते हैं, यह देखने वाली बात है।

उनकी कामयाबी का एक मूलमंत्र है जिसे उन्होंने सबक साथ बांटा है-“तुम बस अपने आपसे मत हारना, फिर तुम्हें कोई नहीं हरा सकता…!

बी पॉजिटिव इंडिया’, अशोक चौहान द्वारा मेहनत के बल पर बनाई उनकी पहचान और उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।

आप उनसे फेसबुक पर जुड़ सकते हैं, मोबाइल नंबर 09829029989 पर बात कर सकते हैं।

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती (देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)

Avatar
MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

आयुर्वेदनामा: अत्यंत गर्म और तीखे स्वभाव की वनस्पति ‛चित्रक’

आज आयुर्वेदनामा में हम चित्रक के बारे में जानकारी हासिल करेंगे जो मुख्य रूप से पहाड़ी स्थानों व जगलों में पाया जाने...

कैरियर लैब: जनसहयोग से ले रही है आकार, ग्रामीण परिवेश के बच्चें भरेंगे उड़ान !

आपने लैब के बारे में तो अवश्य ही सुना होगा। अस्पतालों में भी जांच करने के लिए लैब या लैबोरेटरी होती हैं।...

ऋचा और फ़ाएज़: कॉफ़ी ही नहीं पिलाते, युवाओं को मंच भी प्रदान करते हैं

यह कहानी है जोधपुर में रहने वाली महिला उद्यमी ऋचा शर्मा की, जिन्हें बचपन से किताबों से लगाव था। बातचीत के दौरान...

प्रधानाध्यापिका की पहल ने बदली स्कूल की तस्वीर, गांव के सहयोग से करवा डाले 10 लाख के विकास कार्य

जहाँ चाह है, वहां राह है . . . यह पंक्तियाँ एक सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका पर सटीक बैठती...

आयुर्वेदनामा: कड़वाहट का राजा यानी ‛कालमेघ’

आज आयुर्वेदनामा में हम कालमेघ के बारे में जानकारी हासिल करेंगे जो एक बहुवर्षीय शाक जातीय औषधीय पौधा है।