Home आयुर्वेदनामा आयुर्वेदनामा: अपनी सुगंध से आपको खींचता है ‛लेमन बेसिल’

आयुर्वेदनामा: अपनी सुगंध से आपको खींचता है ‛लेमन बेसिल’

आयुर्वेदनामा में आज हम लेमन बेसिल के बारे में जानेंगे। लेमन बेसिल को सुगंधित नींबू बेसिल भी कहा जाता है। नींबू तुलसी में सिट्राल नामक रासायनिक तत्व पाया जाता है, जिस कारण इसे नींबू सुगंधित बेसिल कहा जाता है। बेसिल की लंबाई 20-40 सेंटीमीटर के मध्य होती है। लेमन बेसिल की पत्तियां तुलसी के पत्तों के समान होती हैं, लेकिन थोड़ी सी सरे हुए किनारों के साथ संकुचित होती हैं।

लेमन बेसिल को आप आसानी से घर के बगीचे या गमले में उगा सकते हैं। लेमन बेसिल को बीजों अथवा तना कटिंग के माध्यम से घरों में लगाया जा सकता है।

अगर आपके पास ताजे लेमन बेसिल के पत्ते न हो तो आप सूखी पत्तियां भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मगर जहां तक हो सके, हमेशा लेमन बेसिल के ताजे पत्तों का इस्तेमाल करें। लेमन बेसिल का उपयोग सूप, स्टूज़, लेमन टी, सब्जियां और तले हुए व्यंजनों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

लेमन बेसिल

लेमन बेसिल का उपयोग करने के सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक इसकी चाय बनाना है। इसकी पत्तियां लेमन टी में इस्तेमाल की जाती हैं। लेमन बेसिल के पत्तों को साधारण काली चाय के दौरान जोड़ा जा सकता है, क्योंकि इसकी पत्तियों में एक अद्भुत खुशबू आती है, जिससे पेय स्वाद की अधिकता को प्राप्त किया जा सकता है। इसकी पत्तियों से बनी चाय के सेवन से सर्दी, खांसी, सिरदर्द और गले की खराश में बहुत आराम मिलता है।

लेमन बेसिल के पत्तों का इस्‍तेमाल सलाद में भी कर सकते हैं। लेमन बेसिल की पत्तियों को अक्सर सलाद अथवा कच्ची सब्जियां के साथ कच्चा खाया जाता है। सलाद पर ऊपर से छिड़ककर आप मुंह में एक ताजे स्वाद का आनंद उठा सकते हैं।

लेमन बेसिल पर देश में सबसे प्रभावी शोध भारत सरकार के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ ने पारंपरिक महत्व के मद्देनजर विभिन्न प्रजनन दृष्टिकोणों का उपयोग करके तुलसी प्रजातियों के विविधता एवं आनुवंशिक संवर्द्धन के वांछनीय गुणवत्ता द्वारा उच्च घटक सिट्रल (68-75%) उपज के लिए सिम-ज्योति नामक किस्म विकसित की है, जो एक छोटी अवधि की 70-80 दिनों की किस्म है। किसान चाहें तो इसकी खेती आवश्यक तेल के लिए कर सकते हैं।

लेमन बेसिल का सुगन्धित तेल भोजन-स्वाद, सुगंध और दंत सबंधी गतिविधियों में उपयोग किया जाता है।

संपादन: मोईनुद्दीन चिश्ती

आशीष कुमार
आशीष कुमार
लेखक सीएसआईआर, केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप)अनुसंधान केंद्र, बोदुप्पल, हैदराबाद में कार्यरत हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

डॉ पाराशर: जिनके हाथों में जादू है, 2-3 दिन में गायब हो जाता है बरसों पुराना दर्द !

हमारे देश भारत में आचार्य चरक, महर्षि सुश्रुत, नागार्जुन, पाणिनी और महर्षि अगस्त्य जैसे विद्वान हुए हैं जिन्होंने आयुर्वेद और चिकित्सा...

आयुर्वेदनामा: अपनी सुगंध से आपको खींचता है ‛लेमन बेसिल’

आयुर्वेदनामा में आज हम लेमन बेसिल के बारे में जानेंगे। लेमन बेसिल को सुगंधित नींबू बेसिल भी कहा जाता है। नींबू तुलसी...

आयुर्वेदनामा: अत्यंत गर्म और तीखे स्वभाव की वनस्पति ‛चित्रक’

आज आयुर्वेदनामा में हम चित्रक के बारे में जानकारी हासिल करेंगे जो मुख्य रूप से पहाड़ी स्थानों व जगलों में पाया जाने...

कैरियर लैब: जनसहयोग से ले रही है आकार, ग्रामीण परिवेश के बच्चें भरेंगे उड़ान !

आपने लैब के बारे में तो अवश्य ही सुना होगा। अस्पतालों में भी जांच करने के लिए लैब या लैबोरेटरी होती हैं।...

ऋचा और फ़ाएज़: कॉफ़ी ही नहीं पिलाते, युवाओं को मंच भी प्रदान करते हैं

यह कहानी है जोधपुर में रहने वाली महिला उद्यमी ऋचा शर्मा की, जिन्हें बचपन से किताबों से लगाव था। बातचीत के दौरान...