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झारखण्ड का ‘बजरंगी भाईजान’ : कभी खुद की बाल मजदूरी, अब तक सैंकड़ों बच्चों को बचाया बाल तस्करी से

अभी तो हमें करनी है पढाई ।
मत करवाओ हमसे मजदूरी और कमाई ॥

गरीब एवं पिछड़े वर्ग के बच्चों के इस सपने को पूरा कर रहा है झारखड के रांची शहर का एक बाल-अधिकार कार्यकर्त्ता. लगभग 30 साल पहले खुद ने मजबूरी में बिहार के समस्तीपुर से झारखण्ड के रांची शहर तक का सफर तय किया. कई छोटे-मोटे काम किये और बाल-मजदूरी की. यह दर्द हमेशा उनके दिल में रहा.

प्रशासनिक भवन में अधिकारीयों को चाय परोसते हुए कानून की जानकारी हासिल की और अब तक हज़ारो बच्चों को बाल-मजदूरी से बचाया है और कई लड़कियों को मानव तस्करी करने वाले अपराधियों के चंगुल से बचाया. बाल मजदुर से बाल-अधिकार कार्यकर्त्ता बनने वाले शख्स का नाम हैं बैद्यनाथ कुमार (Baidnath Kumar) .

पुलिस के साथ काम करते हुए बैद्यनाथ कुमार

पिछले 16 वर्षों से बैद्यनाथ कुमार, मानव व्यापार, बाल तस्करी, बाल-मजदूरी, बाल विवाह एवं बाल-अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. झारखण्ड और आसपास के राज्यों में बाल तस्करी और मजदूरी सामान्य बात मानी जाती हैं लेकिन बैद्यनाथ कुमार के सतत प्रयासों जैसे कि नुक्कड़ नाटक, समाचार पत्रों के जरिये जागरूकता अभियान के चलते लोगो को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया.

आज बैद्यनाथ कुमार की बदौलत मानव तस्करी एक सामूहिक मुद्दा बन चूका हैं. लोगो के सहयोग और सरकारों के प्रयत्नों से मानव तस्करी के मामलों में कमी आयी हैं.

बैद्यनाथ कुमार को किशोर न्याय, बालकों की देखरेख एवं सरंक्षण अधिनियम-2000 एवं किशोर न्याय (बालकों की देखरेख) और सरंक्षण अधिनियम-2015, लैंगिक अपराधों से बालकों का सरंक्षण अधिनियम-2012 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का सरंक्षण अधिनियम-2018, चाइल्ड लेबर एक्ट-1986, चाइल्ड लेबर एक्ट-2016 एवं 2017की काफी अच्छी जानकारी हैं. इन्ही कानूनों का सहारा लेकर वो अब तक हज़ारों बच्चों की मदद कर चुके हैं.

बच्चे को बचाकर माँ-बाप को सौपते हुए बैद्यनाथ कुमार

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान बैद्यनाथ कुमारबताते हैं कि मेरे द्वारा अभी तक करीब 1000 से अधिक बच्चों को बाल श्रम और बाल तस्करी के शिकार बच्चे-बच्चियों को मुक्त कराया गया.

झारखण्ड में मानव तस्करों के विरुद्ध 220 से ज्यादा मानव तस्करी से संबधित मुकदमे दर्ज करवाए गए. संदिध गतिविधियों में लिप्त 240 से ज्यादा प्लेसमेंट एजेंसियों की सूची प्रशासन को सौंपी गयी. 116 से ज्यादा मानव तस्करी के एजेंटों को सजा दिलवाई जिनमे कई कुख्यात अपराधी शामिल हैं.

इसके साथ ही प्लेसमेंट एजेंसी, डोमेस्टिक वर्क बिल-2016 के ड्राफ्ट करने में सरकार की मदद की. झारखण्ड उच्च न्यायालय में बच्चों की सुरक्षा, लैंगिक अपराध और मानव तस्करी को रोकने के लिए जनहित याचिका दर्ज की.

अमेरिका में कॉन्फ्रेंस के दौरान बैद्यनाथ कुमार

बैद्यनाथ कुमार आगे बताते हैं कि लगभग 7 वर्ष की उम्र में मैं माता-पिता के साथ बिहार के समस्तीपुर से पढाई करने के लिए रांची आ गया. गरीबी और माँ-बाप की मजबूरी के कारण 7 वर्ष की उम्र से ही मैंने बाल-मजदूरी करते-करते पढाई की.

कई छोटे-छोटे काम किये जिनमे ईंट-भट्टा में काम, होटल एवं हॉस्टल मेस में चाय पिलाना, झूठे बर्तन धोने का काम शामिल हैं. बाल-मजदूरी करते-करते ही बाल-अधिकारों के बारे में जाना. इन सब संघर्षों के बावजूद पढाई जारी रखी और समाजशास्त्र में स्नातक किया और मानव तस्करी विरोध में इग्नू(IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया.

बैद्यनाथ कुमार आगे बताते हैं कि मेरा बचपन जिन कठिन परिस्थितियों में व्यतीत हुआ हैं. मैं नहीं चाहता कि किसी और बच्चे को वो पीड़ा झेलनी पड़े. जिन हाथों में स्लेट, कॉपी , पेंसिल या खिलोने होने चाहिए , उन हाथों में मुझे झाड़ू और पोछा कतई स्वीकार्य नहीं हैं. अपने तजुर्बे से मैंने स्वयं मानव-तस्करी, बाल-मजदूरी में फंसे बच्चों को देखा हैं और उनके दर्द को महसूस किया हैं.

बाल अधिकारों के साथ ही कई मुद्दों पर काम कर रहे है बैद्यनाथ कुमार

इस समस्या को जड़ से मिटाने के बारे में बैद्यनाथ कुमार बताते हैं कि झारखण्ड राज्य के 20 ट्रांजिट रेलवे स्टेशन को चिन्हित कर चाइल्ड हेल्पलाइन सेण्टर खोलकर बहुत सारे बच्चों की तस्करी होने से बचाया जा सकता हैं. गांव-गांव में मानव तस्करी विरोधी चिल्ड्रन क्लब की स्थापना की जाए. लोगो को बाल शोषण एवं तस्करी के बारे में किताबों में पढ़ाया जाए.

झारखण्ड के ग्रामीण इलाकों के सैंकड़ों बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने के चलते समाचार पत्रों एवं सोशल मीडिया में उन्हें ‘झारखण्ड के बजरंगी भाई’ के नाम से जाना जाता हैं. बाल अधिकारों के साथ ही बाल विवाह के खिलाफ भी बैद्यनाथ कुमार ने मुहिम छेड़ रखी हैं और स्वयं ने कई प्राथमिकी दर्ज करवाई.

एक अवार्ड समारोह के दौरान बैद्यनाथ कुमार

बैद्यनाथ कुमार के कार्यों को कई मंचो पर सम्मानित किया गया हैं जिनमें लोक सेवा समिति, रांची के द्वारा ‘झारखण्ड रत्न अवार्ड-2016‘, यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ़ स्टेट ब्यूरो ऑफ़ एजुकेशनल एंड कल्चरल अफेयर्स, संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा ‘इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम-2018‘, झारखण्ड इंटिलेक्च्युअल फोरम, मुंबई के द्वारा ‘झारखण्ड गौरव अवार्ड-2018‘ और नेशनल फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया, नयी दिल्ली के द्वारा ‘रत्न श्री सी. सुब्रमण्यम अवार्ड-2019‘ शामिल हैं.

अगर आप भी बैद्यनाथ कुमार से संपर्क करना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, बैद्यनाथ कुमार के कार्यों की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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