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ऋचा और फ़ाएज़: कॉफ़ी ही नहीं पिलाते, युवाओं को मंच भी प्रदान करते हैं

यह कहानी है जोधपुर में रहने वाली महिला उद्यमी ऋचा शर्मा की, जिन्हें बचपन से किताबों से लगाव था। बातचीत के दौरान वे बताती हैं,“आज के बच्चे यूट्यूब और कार्टून को ही अपना जीवन समझ बैठे हैं। मानों उन्हें पढ़ने की आदत ही नहीं रही। आज हम पढ़ने की बजाय देखना सुनना पसंद कर रहे हैं। जबकि मैंने बचपन से किताबें पढ़ने के अपने इसी शौक को अपना पैशन बना लिया।

उन्होंने लाइब्रेरी को मॉडर्न रूप में प्रस्तुत करने की सोची, जहां लोग किताबें पढ़कर ज्ञानवर्धन ही न करें, बल्कि पढ़ते हुए कॉफ़ी की सिप भी ले सकें। अपने शहर में उन्होंने ऐसी जगह की तलाश की, पर मिली नहीं।

मन में पनप रहे इसी विचार के साथ उन्होंने जनवरी 2017 में अपने दोस्त फ़ाएज़ के साथ‛बुक कैफ़े’ की नींव रखी। यह एक ऐसी जगह है, जहां किताबें पढ़ी भी जा सकती हैं साथ ही चाय कॉफ़ी का आनंद भी लिया जा सकता है।

कुल मिलाकर यह एक ऐसी जगह है जहां समय का सदुपयोग तो होता ही है, दिल दिमाग को भी राहत महसूस होती है। आज इन युवाओं की सोच मूर्त रूप ले चुकी है और उनका ‛बुक कैफ़े’ लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का माध्यम बन रहा है।

‘बुक कैफ़े’ की शुरुआत के लिए ऋचा ने अपने पार्टनर फ़ाएज़ की निजी किताबों के साथ ही अपनी किताबों को भी यहां पाठकों को पढ़ने के लिए उपलब्ध करवाया। रीडर्स की डिमांड के बाद हर विषय पर पुस्तकें संजोई गईं। दिल्ली से खरीदी गई किताबों के साथ ही आज यहां 3000 बुक्स हैं।

अब लोग पढ़ते हुए मद्धम संगीत सुनते हुए और चाय कॉफी की चुस्कियों और हल्के फुल्के भोजन के आनंद के साथ अपनी सकारात्मकता को नए आयाम दे रहे हैं।

लोकल टैलेंट को मंच देने के लिए भी ‛बुक कैफ़े’ ने कमर कसी। ‛ख्वाहिश’ और ‛हुनर’ जैसे बड़े इवेंट्स इसी के चलते हुए। जय ओझा जैसे कलाकार को भी यहीं से मंच मिला। यहां शूट हुए वीडियो के यूट्यूब पर 6 मिलियन व्यूज हैं।

अब लोग यहां आकर अपनी कहानियां शेयर करना चाहते हैं। रॉयल एनफील्ड पर भारत घूमने वाले राजीव ने अपनी यात्रा वृतांत पर लिखी किताब जोधपुर आकर ‛बुक कैफ़े’ को भेंट की।

अब ‛बुक कैफ़े’ नए लेखकों, कवियों, शायरों, उद्यमियों, क्रिएटिव लोगों, हुनरमंदों को मंच देने का माध्यम बनकर उभरा है। यहां ऑपेन माइक, एंटरप्रेन्योर इवेंट्स, स्टार्टअप्स, नॉलेज शेयरिंग के कई इवेंट्स होना भी शुरू हुए हैं। नए लेखकों के लिए ‛शोकेस योर स्टोरी’ मुहिम भी यहां शुरू हुई, जिसके तहत अपनी कहानियां यहां शेयर की जा सकती हैं।

कोविड-19 के चलते ‛वर्चुअल कॉफी टेबल’ की भी शुरुआत हुई है। उनकी सोच है कि लोग मिलना जुलना जारी रखें, चाहे ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर ही मिलें।

‘बुक कैफ़े’ में किताब पूरी न पढ़ पाने पर उसे घर ले जाकर पढ़ने की सुविधा भी उपलब्ध है। घर में पड़ी और काम न आने वाली किताब को यहां लाकर देने वालों को कॉफी पिलाने का चलन भी यहां शुरू हुआ है।

बुक कैफ़े’ ने भारतीय भोजन को प्रोमोट किया। वेज बिरयानी, छोले भटूरे, पाव भाजी के अलावा 11 तरह के परांठे बथुए के रायते के साथ सर्व कर नई शुरुआत की

प्रत्येक शनिवार-रविवार शाम को वे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए मंच प्रदान करती हैं। चूंकि ऋचा खुद महिला हैं, इस नाते वे महिलाओं को सहयोग भी करती हैं।

बूक कैफ़े’ से फ़ेसबूक पार जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक कर सकते हैं।

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती (देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)

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MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

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