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BrandStory : गांव के लड़के ने नौकरी छोड़ शुरू की कोचिंग क्लास, हर साल हो रही 1500 करोड़ की कमाई !

गांव में पढ़ाई शुरू करने वाले इस शख्स ने अपनी प्रतिभा के दम पर अच्छी नौकरी हासिल की. फिर मोटी सैलरी की नौकरी छोड़कर अपनी कोचिंग क्लास शुरू कर दी. आज यह कोचिंग क्लास ऑनलाइन लर्निंग में देश की सबसे बड़ी कंपनी में तब्दील हो चुकी है. इतना ही नहीं अब यह शख्स देश से बाहर निकलकर अरब देशों के साथ ही अमेरिका में अपनी कंपनी के विस्तार पर काम कर रहा है. ऐसी ही कुछ कहानी है ऑनलाइन एजुकेशन स्टार्टअप बायजू (Byju’s) के संस्थापक बायजू रविंद्रन (Byju Raveendran) की.

37 वर्षीय बायजू रवींद्रन देश के नए अरबपति बन गए हैं. कभी शिक्षक रहे रवींद्रन ने 2011 में थिंक एंड लर्न (Think & Learn ) की स्थापना की थी. अब उनके पास कंपनी के 21% से ज्यादा शेयर हैं. 2015 में उन्होंने लर्निंग ऐप बायजू लॉन्च किया था जिसका सालाना रेवन्यू 1500 करोड़ रुपये है और अगले वर्ष तक 3000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद हैं. बायजू के 3.5 करोड़ सब्सक्राइबर हैं. इनमें से 24 लाख पेड यूजर हैं जो सालाना 10 हजार से 12 हजार रुपए तक फीस चुकाते हैं.

अपने ऑफिस में बायजू रवीन्द्रन | तस्वीर साभार : फेसबुक

रवींद्रन की कंपनी ने पेंशन फंड और सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे लंबी अवधि वाले निवेशकों को आकर्षित करना शुरू कर दिया. हाल ही में कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (Qatar Investment Authority) ने उनकी कंपनी में पैसा लगाया है. ऑनलाइन लर्निंग इंडस्ट्री की ग्रोथ ने नैस्पर्स वेंचर्स, टेनसेन्ट होल्डिंग्स, सिक्योइया कैपिटल और फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबर्ग तक का ध्यान खींचा है.

बायजू ने ऑनलाइन ट्यूटरिंग ब्रॉन्ड ट्यूटर विस्ता (TutorVista) और एड्यूराइट (EduRite) को खरीदा है. ये दोनों स्टार्टअप भी विदेशों में ऑनलाइन एजुकेशन से जुड़ी हैं. इसके साथ ही बायजू ने अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में भी अपने कदम मजबूती के साथ जमाने शुरू कर दिए हैं. बायजू वॉल्ट डिज्नी कंपनी के साथ मिलकर अगले साल अमेरिका में सर्विस शुरू करेगी.

बायजू रविंद्रन (Byju Raveendran) की शुरुआती शिक्षा उनके गांव अझीकोड से शुरू हुई जो केरल के कन्नूर जिले में हैं. उनके माता-पिता दोनों ही मलयालम मीडियम स्कूल में शिक्षक थे और उसी स्कूल से रविंद्रन ने पढ़ाई शुरू की. पढ़ाई के अलावा स्पोर्ट्स में भी उनकी रूचि थी. पढ़ने में होनहार थे, तो कालीकट यूनिवर्सिटी (Calicut University) से मेकैनिकल इंजीनियरिंग पूरी की. डिग्री के बाद उन्होंने एक शिपिंग कंपनी में नौकरी शुरू की.

2011 में बच्चों को पढ़ाते हुए बायजू रवीन्द्रन | तस्वीर साभार : फेसबुक

नौकरी करते हुए एक बार छुट्टियों के दौरान रविंद्रन ने अपने कुछ दोस्तों के साथ कॉमन एप्टीट्यूट टेस्ट (CAT) देने की सोची. CAT के जरिए टॉप एमबीए कॉलेजों में एडमिशन मिलता है. इस टेस्ट में उन्होंने 100 परसेंटाइल स्कोर हासिल किया. इसके बाद उनके दोस्तों ने उनके कहा कि वे उन्हें भी एग्जाम के लिए तैयारी करने में मदद करें. फिर क्या था छात्रों की संख्‍या बढ़ी तो उन्होंने कोचिंग क्लास खोलने की सोची. रविंद्रन ने नौकरी छोड़ दी और अपनी कोचिंग क्लास शुरू की.

रविंद्रन (Byju Raveendran)फुल टाइम कोचिंग क्लास चलाने लगे. वे कई और शहरों में जाकर भी कोचिंग क्लास लेते थे. बाद में उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ही जगह रहकर अपने सभी छात्रों तक पहुंचा जा सके. यहीं उन्होंने पहली बार टीचिंग में टेक्नोलॉजी को शामिल किया और 2009 में CAT के लिए ऑनलाइन वीडियो बेस्ड लर्निंग प्रोग्राम (Online Video Based Learning Program) शुरू किया. इससे वे एक साथ अपने कई सेंटर पर छात्रों से रू-ब-रू हो पाते थे. यह एक ऐसा आइडिया था, जिसके बाद से उनका एक नया सफर हुआ.

एक अवार्ड समारोह के दौरान बायजू रवीन्द्रन | तस्वीर साभार : फेसबुक

रविंद्रन ने बायजू नाम से 2011 में अपनी कंपनी शुरू की. कंपनी का फोकस CAT के अलावा चौथी से 12वीं क्लास के छात्रों को ऑनलाइन कोचिंग प्रोवाइड करने पर था. उनकी कोचिंग का तरीका इतना पॉपुलर था कि उनके छात्रों की संख्‍या बढ़ने लगी. 2015 में उन्होंने अपना फ्लैगशिप प्रोडक्ट BYJU’s- द लर्निंग एप (BYJU’s – The Learning App) लॉन्च किया. यह उनके लिए गेमचेंजर साबित हुआ. स्मार्टफोन की बढ़ती लोकप्रियता के बीच उनका यह एप भी पॉपुलर होता गया.

बायजू कन्टेंट को छोटा और आकर्षक बनाकर बच्चों का ध्यान खींचती है. कुछ कंटेंट तो फ्री हैं, लेकिन एडवांस लेवल के लिए फीस देनी होती है. BYJU’s- द लर्निंग एप से कुल रेवेन्यू का 90 फीसदी वही से आता हैं.

आज बायजू हर घर का ब्रांड बन चूका हैं और फिल्म स्टार शाहरुख़ खान (Shahrukh Khan) उनके ब्रांड एम्बेसडर हैं. इसके साथ ही मार्केटिंग और क्रिकेट मैच के दौरान आने वाले विज्ञापनों से भी उनके ब्रांड बनने की दिशा में मजबूती मिली.

डिस्क्लेमर : इस पोस्ट में दी गयी सारी जानकारी इंटरनेट रिसर्च पर आधारित हैं और बी पॉजिटिव इंडिया पोस्ट में दिए गए तथ्यों की पुष्टि नहीं करता हैं.

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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