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संजय भंडारी: सूखी रोटियों का संग्रह कर गायों एवं कुत्तों का पेट भरने के लिए शुरू की अनोखी मुहिम

राजस्थान के शहर सूर्यनगरी जोधपुर में पुलिस लाइन के पास बसी अजीत कॉलोनी में रहने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय भंडारी (CA Sanjay Bhandari) ने अपने शहर में जानवरों खासकर गायों, कुत्तों और बंदरों के भोजन की एक नई शुरुआत की है।

एक मौलिक विचार के चलते उन्होंने अपने दिमाग में उपजे आईडिया को मूर्त रुप दिया और जानवरों के लिए घरों में बची सूखी रोटियों को संग्रह करने की अनोखी मुहिम चलाई।

बातचीत के दौरान वे बताते हैं,“एक दिन बैठे हुए यूंही ख्याल आया कि आज के शहरीकरण में शहरवासियों द्वारा गाय व कुत्तों के लिए डाली गई रोटियां सड़क पर ही पड़ी रहती हैं और अधिकांश रोटियां तो खराब होकर कूड़े में चली जाती हैं, कुछ नालियों में बह जाती हैं।

एक मुख्य कारण गायों को शहर की सीमा से बाहर कर देना भी है। दूसरी बात कुत्तों का भी रोटी कम खाना है।

इस मुहिम में शामिल स्वयंसेवियों के साथ संजय भण्डारी

इस समस्या को देखने के बाद यह विचार आया कि क्यों न गली-मुहल्लों के बाहर घरों में बची हुई रोटियों के संग्रह के लिए पिंजरों की व्यवस्था कर दी जाए!

यदि ऐसा होगा तो लोग अपने घरों में बची हुई रोटियों को इसमें डाल सकेंगे। यदि ऐसा हुआ तो इन रोटियों को जरूरतमंद गायों व कुत्तों के नियत स्थानों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

वर्ष 2019 की शुरुआत में भंडारी ने अपनी मुहिम को अमली जामा पहनाते हुए एक डिज़ाइन विशेष में पिंजरे बनवाकर लगवाने शुरू किए। इन सभी पिंजरों को उन्होंने पीले रंग से पुतवाया।

पिंजरे से रोटियाँ निकालते स्वयंसेवी

उन्होंने ऐसे स्थानों को खोजना शुरू किया जहां लोगों की आवाजाही ज्यादा हो और लोग रोटियों को इन पिंजरों में डाल सकें। कॉलोनियों, मंदिरों व अस्पतालों के बाहर उन्होंने ऐसे दर्जनों पिंजरे लगवाए। कुछ ही दिनों में अप्रत्याशित रूप से सफल नतीजे आने लगे। लोगों ने इन पिंजरों में रोटियां डालनी शुरू कर दी।

सीए भंडारी कहते हैं,“अगला चरण आई हुई इन रोटियों को इन पिंजरों से निकालकर तयशुदा स्थानों पर पहुंचाने का था जिसमें मुझे स्वयं सेवकों की जरूरत थी। मालिक का करम रहा कि इस कार्य के लिए भी मेरे साथ कुछ कार्यकर्ता जुट गए।

अब धीरे-धीरे यह कार्य बढ़ता ही जा रहा है। अप्रैल तक जोधपुर में इस तरह के पिंजरे करीब 100 से ज्यादा स्थानों पर चुके हैं। इन पिंजरों से रोजाना करीब 600 किलो से अधिक रोटियों का संग्रह हो रहा है जो विभिन्न गौशालाओं में भेजी जा रही हैं। कुत्तों के लिए व शहर के बाहरी क्षेत्रों में जहां बेसहारा गायें हैं, वहां भी रोटियां पहुंचाई जा रही हैं।

पिंजरे के साथ मुहिम में शामिल स्वयंसेवी

एक अनुमान के अनुसार शहर में करीब 3000 किलो रोटियां प्रतिदिन इसी तरीके से इकट्ठी की जा सकती हैं। इस आंकड़े को हक़ीक़त में बदलने के लिए संजय कार्य को आगे बढ़ाते हुए तकरीबन 300 पिंजरे और लगाकर पूरे शहर को कवर करने की योजना पर लगातार कार्य कर रहे हैं।

अब तक कई पिंजरों को इच्छुक लोगों ने अपने बुजुर्गों की याद में अपने घर मुहल्लों में लगवाया है। इन पिंजरों को निःशुल्क रूप से भी अपनी कॉलोनी/मुहल्लों में सीधे संपर्क कर लगवाया जा सकता है।

इस पिंजरे के ऊपरी हिस्से में एक ढक्कन होता है जिसे रोटी डालने के बाद बन्द कर दिया जाता है। पिंजरे के मुख्य द्वार पर ताला लगा रहता है ताकि अन्न का अनादर न हो।

रोटी संग्रहण के लिए विशेष डिज़ाइन के पिंजरे बनवाए गए

इस कार्य की शुरुआत उन्होंने अपने पिता की स्मृति में पिंजरा लगाकर की। यदि कोई इच्छुक व्यक्ति इस तरह का पिंजरा लगवाना चाहे तो उसके लिए 3100 रुपए का सहयोग शुल्क निर्धारित किया गया है।

इस कार्य में आप भी भागीदारी बनकर इस पुनीत कार्य को आगे बढ़ा सकते हैं। मुहिम से जुड़ने वाले उनसे मोबाइल नंबर 09828031622 पर संपर्क कर सकते हैं। फेसबुक पर भी उनसे जुड़ा जा सकता है।

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती (देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)

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MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

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