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Danteshwari Ladake : नक्सलियों का खात्मा करने के लिए महिलाये बनी कमांडोज, कभी खुद भी थी नक्सली !

कुछ साल पहले तक वे नक्सली थीं लेकिन आज नक्सलियों के खिलाफ जंग लड़ रही हैं. आत्मसमर्पण कर चुकीं और सलवा जुडुम की पीड़ित महिलाएं वैसे तो सरेंडर के बाद ज्यादातर ‘घरेलू कामों’ में व्यस्त हो जाती हैं लेकिन इनमें से कुछ हाथों में AK-47 लेकर नक्सलियों के खिलाफ जंग में अग्रिम मोर्चे पर हैं.

छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए 30 महिला सदस्यों वाला नक्सल विरोधी लड़ाकू दस्ता (एंटी नक्सल कमांडो यूनिट- Danteshwari Ladake ) बनाया गया है. इनकी तैनाती नक्सल प्रभावित जिले बस्तर और दंतेवाड़ा में की गयी.इस यूनिट में ऐसी 10 महिलाएं शामिल हैं जो पहले नक्सली थीं और उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था.

Danteshwari Ladake operations.
ट्रेनिंग के दौरान ‘दंतेश्वरी लड़ाके’ की यूनिट | तस्वीर साभार : ANI

छत्तीसगढ़ की संरक्षक देवी के नाम पर इन महिला कमांडों को ‘दंतेश्वरी लड़ाके( Danteshwari Ladake )‘ के नाम से जाना जाता है. इन कमांडो ने नक्सलियों के खिलाफ कई ऑपरेशन में हिस्सा लिया. पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर लड़ रहीं इन महिला कमांडों ने अब तक कई नक्सलियों को ढेर कर दिया.

यह प्रयोग दंतेवाड़ा के एस. पी. अभिषेक पल्लव की सोच का नतीजा हैं. वह कहते हैं कि 10 महीने पहले जब उन्होंने आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों के एक कैंप का दौरा किया तो उनके दिमाग में यह विचार आया है.

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पल्लव ने बताया, ‘एक तरफ जहां ज्यादा पूर्व पुरुष नक्सलियों को प्रशिक्षित करने के बाद उन्हें डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड में भर्ती कर लिया गया है, वहीं दूसरी तरफ महिलाएं घरों में बैठकर रोटी बना रही थी. इस चीज ने उन्हें कुंठित कर दिया क्योंकि वे जंगल में पुरुषों के साथ बराबरी से रहीं और अब उनकी सेवा कर रही हैं. इससे उनके अंदर कमजोर और कमतरी का अहसास होता था.’ उन्होंने तब डिस्ट्रिक्ट एस. पी. दिनेश्वरी नंदा से ‘महिला कमांडोज की एक एकीकृत कॉम्बैट फोर्स‘ बनाने के लिए कहा.

Danteshwari Ladake training
ट्रेनिंग के दौरान ‘दंतेश्वरी लड़ाके’ की यूनिट | तस्वीर साभार : ANI

30 महिलाओं को चुना गया और उन्हें ब्रिगेडियर बी. के. पोंवार (रिटायर्ड) द्वारा संचालित कांकेर जंगल वॉरफेयर कॉलेज भेजा गया. वहां दिसंबर 2018 में उन्हें 6 हफ्तों की कड़ी कॉम्बैट ट्रेनिंग दी गई और उसके बाद मार्च तक इन-हाउस ट्रेनिंग दी गई. इसके बाद फील्ड ट्रेनिंग के लिए वे छोटे ऑपरेशनों में जाने लगीं और अब बड़े ऑपरेशंस के लिए पूरी तरह तैयार होकर अपना जलवा बिखेर रही हैं.

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पल्लव ने बताया कि महिला कमांडोज कुछ मायनों में शानदार हैं. वे अपने हथियारों को अपनी साड़ियों में छिपा सकती हैं और किसी को कोई शक हुए बिना ही नक्सलियों पर नजर रख सकती हैं. इतना ही नहीं, वे भीड़ में आसानी से घुल जाती हैं.

Danteshwari Ladake pared
स्वतंत्रता दिवस परेड में ‘दंतेश्वरी लड़ाके( Danteshwari Ladake )‘ की यूनिट परेड का नेतृत्व करेगी | तस्वीर साभार : ANI

आपको बता दे कि दंतेवाड़ा में होने वाले स्वतंत्रता दिवस परेड में ‘दंतेश्वरी लड़ाके( Danteshwari Ladake )‘ की यूनिट परेड का नेतृत्व करेगी. यह कमांडोज अब देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने के लिए दिन-रात लगी हुई हैं.

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बी पॉजिटिव इंडिया, ‘दंतेश्वरी लड़ाके‘ यूनिट के गठन एवं देश सेवा के लिए लड़ने वाली महिला कमांडोज के कार्यों की प्रशंसा करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

Disclaimer : यह कहानी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है और बी पॉजिटिव इंडिया (Be Positive India) इस कहानी में दिए गए तथ्यों की पुष्टि नहीं करता हैं. अगर आपको इस पोस्ट में दी गयी जानकारी से आपत्ति है तो हमें media.bepositive@gmail.com पर ईमेल कीजिये.

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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