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दीपा मलिक : 31 ऑपरेशन और 183 टांके लगने के बावजूद पैरालंपिक खेलों में जीता सिल्वर मेडल !

जीवन की परेशानियों को खुशी, निराशा को उम्मीद और हार को जीत में कैसे तब्दील किया जा सकता है, इसकी जीती-जागती मिसाल हैं दीपा मलिक (Deepa Malik). 36 की उम्र में तीन ट्यूमर की दर्दनाक सर्जरी और शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो जाने के बावजूद दीपा की जिंदगी ठहरी नहीं.

बल्कि एक ऐसा जज्बा पैदा हुआ, जिसने उन्हें खेलकूद के प्रतिष्ठित राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड (Rajiv Gandhi Khel Ratna Award) से लेकर अर्जुन अवॉर्ड (Arjuna Award) के अलावा ढेरों मेडल्स दिलाए, साथ ही लिम्का बुक (Limca Book of World Record) में नाम दर्ज कराया.

रियो पैरालिंपिक खेल- 2016 में दीपा मलिक ने शॉट-पुट में रजत पदक जीता. जेवलिन और शॉट पुट में एशियन रिकॉ‌र्ड्स (Asian Records) बनाने के साथ ही तैराकी एवं मोटर स्पोर्ट्स में भी अपना जलवा बिखेर चुकी है दीपा मलिक(Deepa Malik).

बचपन एवं शुरुआती संघर्ष

दीपा मलिक (Deepa Malik) का जन्म 30 सितम्बर 1970 में हरियाणा (Hariyana) के सोनीपत (Sonipat) जिले के भैस्वाल (Bheswal) गांव में हुआ. उनके पिता बी के नागपाल (B K Nagpal) भारतीय सेना में कर्नल रह चुके हैं. उनकी बीमारी का पहला चरण बचपन में ही गुजरा. तब वह छह साल की थी. अचानक एक दिन पैरों में कमजोरी का पता चला. धीरे-धीरे चलना-फिरना बंद हुआ और वो बिस्तर पर आ गई. फिर शुरू हुआ सिलसिला इलाज का.

Deepa Malik Family
अपने परिवार के साथ दीपा मलिक | तस्वीर साभार : दीपा मलिक के फेसबुक पेज से

उनके इलाज के लिए उनके पिताजी ने पुणे में पोस्टिंग ली और वहां कमांड हॉस्पिटल में उन्हेंभर्ती करा दिया. फिर शुरू हुआ अस्पताल में लंबा दौर, सर्जरी, कई-कई घंटे फिजियोथेरेपी. लगभग 8-9 महीने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे चलना सीखा. इस दौरान उन्होंने अपने माता-पिता से कई चीज़े सींखी जिनमें कृतज्ञता, उम्मीद, किताबों से दोस्ती और धैर्य रखना शामिल हैं.

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उनके पिताजी आर्मी में थे इसके चलते 12वीं तक तो मेरी पढाई सेंट्रल स्कूल में हुई. लेकिन इसके बाद सोफिया कॉलेज, अजमेर (Sofia College, Ajmer) से ग्रेजुएशन किया. वहां हॉस्टल में रही. फिर राजस्थान की क्रिकेट व बास्केटबॉल टीम जॉइन की. इसके बाद बाइक का शौक भी लगा और स्टंट करने में दिलचस्पी जगी.

शादी और नयी शुरुआत के बाद फिर संघर्ष का दौर

1989 में उनकी साढे 19 साल की उम्र में कर्नल विक्रम सिंह (Vikram Singh) के साथ उनकी शादी हो गयी. शादी के बाद खुशहाल जीवन चल रहा था लेकिन दूसरे बच्चे के जन्म के दौरान उन्हें एक बार फिर से परेशानियां शुरू हुई. कमर में दर्द रहता था और पैरों में अकड़न होने लगी.

Deepa Malik at asian games 2018
एशियाई गेम्स में मैडल जीतने के बाद दीपा मलिक | तस्वीर साभार : दीपा मलिक के फेसबुक पेज से

उसी समय कारगिल का युद्ध शुरू हो गया और उनके पति वहां चले गए. शुरुआत में हॉस्पिटल्स में चक्कर लगाए और शुरुआती जाँच में पता चला कि ट्यूमर बड़ा हो गया हैं और जयपुर के बजाय दिल्ली में इलाज़ करवाना पड़ेगा. इस तरह दिल्ली का आर.आर. हॉस्पिटल्स( R R Hospitals) नयी उम्मीद बन गया. जांचों के बाद डॉक्टर्स ने बता दिया था कि सर्जरी के बाद निचला हिस्सा बेकार हो जाएगा और वो चल नहीं सकेगी.

पता चला कि वो अब चल नहीं पायेगी . .

घर की चाक चौबंद व्यवस्था करने के बाद दीपा ने सर्जरी करवाने का निश्चय किया. करीब 8-9 महीने अस्पताल में बीते. इस समय उनके पापा साथ में थे. पहली सर्जरी गलत हुई तो दूसरी और फिर तीसरी सर्जरी हुई. युद्ध के चलते पति कारगिल में ही थे. कंधे के पास लगभग 200-225 टांके थे और 45-48 दिन तक मशीन में थी. दवाओं के कारण गॉल ब्लैडर में स्टोन हो गया तो ब्लैडर भी निकालना पड़ा. खानपान का ध्यान रखना पड़ा. सर्जरी के तीन महीने बाद पति उनको देखने आ सके.

Deepa Malik with PM Narendra Modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दीपा मलिक | तस्वीर साभार : दीपा मलिक के फेसबुक पेज से

व्हीलचेयर पर आने के बाद बदली ज़िन्दगी

सर्जरी के लगभग एक साल बाद उनके पति विक्रम साथ आ सके. 8-9 महीने हॉस्पिटल में थी और लडाई खत्म होने के बाद विक्रम सिंह ने जयपुर पोस्टिंग ली. आर्मी लाइफ ने उन्हें इस तरह जीना सिखा दिया था कि सारी जिम्मेदारियां उन्हें खुद उठानी पड़ेगी. व्हीलचेयर पर थोडी मुश्किल तो हुई, लेकिन उन्होंने कंप्यूटर सीखा, इंटरनेट कनेक्शन लिया, नेट-बैंकिंग सीखी. नए गैजेट्स इस्तेमाल किए और इंटरनेशनल सपोर्ट ग्रुप्स जॉइन किए, जहां उन्हें जरूरी सलाहें मिलीं. घर के काम काज के साथ ही रेफ्रिजरेटर-माइक्रोवेव का इस्तेमाल शुरू किया.

जयपुर से अहमदनगर और एक बार फिर नयी शुरुआत

वर्ष 2002 में उनके पति ने अहमदनगर शिफ्ट हो गए और वो सास-ससुर के पास रहने लगी. अपने समय के इस्तेमाल के लिए उन्होंने एक फ़ूड कॉर्नर (Food Corner) शुरू किया. उनके साथ आर्मी के दो रिटायर्ड कुक्स थे और काम बढा तो ज्यादा कुक्स रखने पड़े. होम डिलिवरी काउंटर गार्डन रेस्टरां बन गया. रोज रात में डेढ-दो सौ लोग खाते थे. करीब 40-50 होम डिलिवरी होती थीं. इसके साथ ही वो गरीब बच्चों को मुफ्त में पढाई भी करवाती थी और अब तक 70 से ज्यादा बच्चों का जीवन संवार चुकी हैं.

Dipa Malik with medals
अपने मेडल्स के साथ दीपा मलिक | तस्वीर साभार : दीपा मलिक के फेसबुक पेज से

फूड कॉर्नर से पैरा-ओलंपिक्स की ओर

उनकी छोटी बेटी स्विमिंग से डरती थी, वो उसे हौसला देने के लिए पानी में उतरी. तब उन्हें लगा, वो तैर सकती हूं. फिर महाराष्ट्र के पैरा-ओलंपिक कैंप से किसी ने उनसे कहा कि अगर वो स्विमिंग करे तो यह उनके वर्ग के लिए अलग बात होगी. शादी से पहले स्टेट लेवल तक बास्केटबॉल खेला था. साल 2006 में उन्हें स्विमिंग में सिल्वर मेडल भी मिला, लेकिन स्वास्थ्य कारणों के कारण वो लंबे समय तक उसे जारी नहीं रख सकी.

दीपा मलिक ने इलाहाबाद में गंगा नदी को बहाव के विपरीत तैर कर पार किया और लिम्का बुक में नाम दर्ज कराया.

2007 में एथलेटिक्स का सिलसिला शुरू हुआ. उन्होंने 39 की उम्र में जेवलिन और शॉट पुट पकड़ना सीखा और मेडल जीता. वही मेडल उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स तक लाया और इसके बाद यह सिलसिला चल पड़ा. राष्ट्रीय रिकार्ड्स के साथ ही पैरा ओलम्पिक में मैडल जीतना सुखद रहा.

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Deepa Malik at Awards
तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से अवार्ड लेती दीपा मलिक | तस्वीर साभार : दीपा मलिक के फेसबुक पेज से

उपलब्धियां (Deepa Malik Awards and Achievements)

दीपा मलिक की उपलब्धियों को गिनना काफी मुश्किल हैं. उन्होने भारत की 23 मेडल्स अंतराष्ट्रीय स्पर्धाओं (International Medals) में जबकि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 68 पदक प्राप्त किये हैं. वे भारत की एक ऐसी पहली महिला है जिसे हिमालय कार रैली में आमंत्रित किया गया. वर्ष 2008 तथा 2009 में उन्होने यमुना नदी (Yamuna River) में तैराकी तथा स्पेशल बाइक सवारी में भाग लेकर दो बार लिम्का बूक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड (Limca Book of World Record) में अपना नाम दर्ज कराया. यही नहीं,

रियो पैरालिंपिक खेल- 2016 में दीपा मलिक ने शॉट-पुट में रजत पदक जीता, दीपा ने 4.61 मीटर तक गोला फ़ेंका.

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इसके साथ ही न्यूजीलैंड 2019 के लिए सर एडमंड हिलेरी प्रधान मंत्री का साथी पुरस्कार, अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति – अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मान्यता 2019, स्पोर्टस्टार इक्के अवार्ड्स द हिंदू ग्रुप पब्लिशिंग – स्पोर्ट्सवुमेन ऑफ़ द इयर (पैरा-स्पोर्ट्स) – 2019 , पद्म श्री (भारतीय गणराज्य में 4 वाँ सर्वोच्च नागरिक सम्मान) – 2017 , राष्ट्रपति का ‘प्रथम महिला पुरस्कार’ (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय) – 2017, लिम्का पीपल ऑफ द ईयर अवार्ड – 2014 के साथ ही कई अवार्ड्स शामिल हैं.

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वीवो प्रो कबड्डी मैच के दौरान दीपा मलिक | तस्वीर साभार : दीपा मलिक के फेसबुक पेज से

दीपा मलिक ( Deepa Malik ) कहती हैं कि लोग आपको उसी नजर से देखते हैं, जिस नजर से आप खुद को देखते हैं. इसलिए पहले अपनी नजर में अच्छा बनें.

Disclaimer : यह कहानी इंटरनेट रिसर्च पर आधारित है और बी पॉजिटिव इंडिया (Be Positive India) इस कहानी में दिए गए तथ्यों की पुष्टि नहीं करता हैं. अगर आपको इस पोस्ट में दी गयी जानकारी से आपत्ति है तो हमें media.bepositive@gmail.com पर ईमेल कीजिये.

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