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कैन्सर ने सपने तबाह किए तो शुरू की उसके ख़िलाफ़ जंग, अब तक 7,000 से ज़्यादा मरीज़ों की मदद !

यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जो कैन्सर के ख़िलाफ़ जंग लड़ रही है. कैन्सर ने जब इनके सपने तबाह किए तो ‘ Love Heal Cancer’ नाम की संस्था बनाकर कैन्सर पीड़ितों की मदद करने का फ़ैसला किया. अब तक उनकी संस्था 7000 से ज़्यादा मरीज़ों की मदद कर चुकी हैं. प्यार से कैन्सर को हराने वाली योद्धा का नाम हैं डिम्पल परमार.

डिम्पल परमार राजस्थान के जोधपुर शहर से आती है और अभी ‘Love Heal Cancer’ और zenonco कम्पनी चला रही हैं. उनकी संस्था कैन्सर के बारे में जागरूकता के साथ ही इलाज, काउन्सलिंग, जीवनशैली में भी मदद करती हैं. कैन्सर के कारण कई परिवार तबाह हो जाते हैं लेकिन डिम्पल और उनकी संस्था उनके लिए एक उम्मीद की किरण बनकर मदद करते हैं.

बी पॉज़िटिव इंडिया से बातचीत में डिम्पल परमार ने बताया कि आईआईएम कलकता में पढ़ाई के दौरान सहपाठी नितेश प्रजापति से मुलाक़ात हुई. हम दोनो अलग-अलग स्टार्टअप आयडीयाज पर काम कर रहे थे और व्यस्त थे. पढ़ाई के दौरान ही नितेश को हेल्थ चेकअप के दौरान कैन्सर के बारे में पता चला. एक 26-27 साल के सक्रिय नौजवान को थर्ड स्टेज कैन्सर होना मेरे लिए सदमे से कम नही था. उसके बाद नितेश मुंबई इलाज के लिए चला गया और लगभग छः महीने बाद लौटा.

नितेश के साथ डिम्पल

कॉलेज वापस आने के बाद भी नितेश की तबियत में ख़ास सुधार नही हो रहा था. मेने उसकी देखभाल की ज़िम्मेदारी ली और कॉलेज, पढ़ाई, हॉस्पिटल, इलाज में हमारा समय निकलने लगा. मैं उसे अकेले छोड़ना नही चाहती थी और इसी के चलते हमने हमारे ग्रैजूएशन डे पर सगाई कर ली.

कैन्सर के इलाज के लिए हमने प्लानिंग बनाना शुरू किया और दैनिक जीवनशैली से लेकर खानपान तक का ध्यान रखा जाने लगा. देश के सभी बड़े हॉस्पिटल में लगातार चेकअप एवं सलाह और इलाज करवाया लेकिन नितेश की हालात में आशतीत वृद्धि नही हो रही थी.

ग्रैजूएशन डे के दिन नितेश और डिम्पल

डॉक्टर ने कह दिया कि अब छः महीने से ज़्यादा समय नितेश के पास नही है. हमने शादी कर ली और अमेरिका में इलाज करवाने का निश्चय किया. कॉलेज के सहपाठियों, परिवारजनों, क्राउडफ़ंडिंग के ज़रिए हमने पैसे जुटाए और अमेरिका पहुँच गए. वहाँ पर भी भारतवंशी परिवारों का हमें बहुत प्यार एवं सपोर्ट मिला लेकिन नितेश की सेहत दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही थी. वो चुपचाप असहनीय दर्द को मुस्कुराहट के साथ झेल रहा था.

जनवरी 2018 में उसने कैन्सर मरीज़ों की मदद के लिए ‘Love Heal Cancer’ की शुरुआत करने के बारे में मेरे से चर्चा की. मुझे उसका आयडीया पसंद आया और हमने इलाज के साथ ही कैन्सर के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया. नितेश ने वेबसाइट और ऑनलाइन काम सम्भाला जबकि मैंने सूचनाएँ इकट्ठा करना शुरू किया. अपने अंतिम दिनों में भी वो बड़ी शिद्दत से कैन्सर से लड़ रहा था.

इलाज के दौरान नितेश

इसी बीच कैन्सर हमारे प्यार पर भारी पड़ा और मार्च 2018 में नितेश ने अंतिम साँस ली. अगले छः महीने मेरे लिए बड़े मुश्किल रहे और मैं डिप्रेशन में चली गयी लेकिन मुझे नितेश के कैन्सर मरीज़ों की मदद के सपने ने बड़ी ताक़त दी और हमने इसे ही अपने जीवन का लक्ष्य बना दिया.

लव हील्स कैंसर के माध्यम से, वह लोगों को कैंसर के खिलाफ उनकी यात्रा में मदद करने के लिए सहायता, जानकारी और सेवाएं प्रदान करती हैं. उनका प्राथमिक लक्ष्य कैंसर के रोगियों, उनके परिवार के सदस्यों, दोस्तों, प्रियजनों और अन्य सभी की मदद करना है. वे कैंसर के मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहलुओं को भी देखते हैं, और एक दूसरे को साझा करने और समर्थन करने के लिए समान अनुभवों वाले लोगों के समुदायों की वकालत करते हैं.

नितेश और डिम्पल की शादी की तस्वीर

आज, वह भारत के मेट्रो शहरों में स्वयंसेवी समूहों के साथ संगठन चलाती है. आईआईएम-कलकत्ता की पूर्व छात्र डिंपल कहती हैं, “हम कुछ भी चार्ज नहीं करते हैं और हमारा इसका कोई भी इरादा नहीं हैं. हम सिर्फ उन लोगों की मदद करना चाहते हैं, जो दुनिया भर में अपनी कहानियों को फैलाना चाहते हैं और बताना चाहते हैं कि वे हमारे बीच असली फाइटर हैं.”

पिछले एक साल में, डिंपल दुनिया भर में 7000 से अधिक कैंसर रोगियों और परिवारों तक पहुंची हैं, और उन्हें परामर्श सेवाएं प्रदान की हैं. भारत भर में कई कार्यक्रमों का विस्तार करने की योजना पर उनका संस्थान काम कर रहा हैं.

डिम्पल को कई मंचो से सम्मानित किया जा चुका है

डिम्पल कहती हैं, “यह मायने नहीं रखता कि आप कितने साल जीते हैं; यह मायने रखता है कि आप उन वर्षों में कितने जीते हैं।

बी पॉज़िटिव इण्डिया, डिम्पल परमार और LHC के कार्यों की सराहना करताता है और उम्मीद करता हैं कि आपके सकारात्मक कार्यों से कैन्सर पीड़ितों में ज़रूर नयी ऊर्जा का संचार होगा और वो कैन्सर को हरा पाएँगे.

( ये स्टोरी बी पॉज़िटिव इंडिया के साथी अजय कुमार पटेल ने की)

Ajay Kumar Patel
Ajay Kumar Patel
बी पॉजिटिव इंडिया के झारखण्ड प्रभारी हैं. इसके साथ ही झारखण्ड के आदिवासी बच्चों की पढाई के लिए 'टीच फॉर विलेज (Teach For Village) ' नाम से संस्था चलाते हैं. इसके साथ ही सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं.

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