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डॉ पाराशर: जिनके हाथों में जादू है, 2-3 दिन में गायब हो जाता है बरसों पुराना दर्द !

हमारे देश भारत में आचार्य चरक, महर्षि सुश्रुत, नागार्जुन, पाणिनी और महर्षि अगस्त्य जैसे विद्वान हुए हैं जिन्होंने आयुर्वेद और चिकित्सा को नए आयाम दिए। विज्ञान के इस दौर में भले हम विश्वास न पाएं पर यह सच है कि सालों पहले इन ऋषियों ने ऐसी-ऐसी खोजें कर ली थीं, जिनके चलते पीड़ा का निदान करना चुटकी बजाने जितना आसान था।

आज हमारा यही परंपरागत ज्ञान विदेशों से होकर हम तक लौट रहा है। दर्द से निदान की इसी कड़ी में ‛ऑस्टियोपैथी’ भी एक चिकित्सा पद्धति है, जिसमें मरीजों को बिना दवा दिए इलाज किया जाता है।

ऑस्टियोपैथी’ जैसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को पूरी दुनिया में सम्मानजनक स्थान दिलाने वाले डॉ गोवर्धनलाल पाराशर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। आपके दादा स्व चुन्नीलालजी रियासती काल में हैदराबाद निजाम के पैनल डॉक्टर थे, जबकि पिता स्व. सांवरलालजी जोधपुर के जाने-माने ‘हड्डी वैद्य’ रहे हैं।

देखा जाए तो डॉ पाराशर को अपने पूर्वजों से सीखने को काफी कुछ मिला है। पर एक सच यह भी है कि इन्होंने अपनी अद्भुत क्षमता से इस चिकित्सा निधि को शिखर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। अपनी मां अयोध्यादेवी के प्रति अटूट श्रद्धा रखने वाले डॉ पाराशर अपनी कामयाबी को मातापिता के आशीर्वाद का फल और अपने संयुक्त परिवार की ताकत का प्रतिफल मानते हैं।

अपने परिवार के साथ डॉ पाराशर

11 नवंबर, 1956 को जन्मे डॉ गोवर्धनलाल की प्राथमिक शिक्षा जोधपुर में हुई। ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन’, इलाहाबाद ने आपको ‘आयुर्वेद रत्न’ की उपाधि प्रदान की। ‘इंडियन बोर्ड ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन्स’ ने 12 मई, 2003 को ‘डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (अल्टरनेटिव मेडिसिन्स), ‘न्यू एज इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी’ ने 9 अप्रेल, 2006 को ‘गोल्ड मेडल’ और ‘होलिस्टिक हीलिंग’ (ऑस्टियोपैथी) के क्षेत्र में हारमोनी डिग्री ‘डॉक्टर ऑफ ऑस्टियोपैथी’ प्रदान की। ‘अल्टरनेटिव मेडिसिन्स रिसर्च इन्स्टीट्यूट’, कनाडा ने 17 अगस्त, 2008 को ‘फिजिशियन ऑफ द न्यू मिलेनियम-2000’ अवार्ड प्रदान किया।

लागत मात्र के शुल्क पर सेवा करने वाले डॉ गोवर्धनलाल ‘ऑस्टियोपैथी’ को एक चमत्कारिक चिकित्सा पद्धति मानते हैं, जिसके माध्यम से शरीर में उत्पन्न होने वाली ख़ासकर जोड़, हड्डियों और मांसपेशियों की बीमारियों से मरीज को मात्र दो से तीन दिन में रोगमुक्त किया जाता है।

जोधपुर स्थित अस्पताल में इलाज करते हुए डॉ पाराशर

दक्ष ऑस्टियोपैथ अपने अनुभव से अस्थियों के रोग का वास्तविक केन्द्र अपनी अंगुलियों से टटोलकर तथा रीढ़ व नाड़ी दाब की स्थितियों का पता लगाकर उपचार करते हैं। ऑस्टियोपैथ हड्डी बिठाने वाले पहलवान न होते हुए प्रशिक्षित चिकित्सक होते हैं। इस विद्या की शिक्षा के लिए जर्मनी, इंग्लैण्ड और अमेरिका जाना पड़ता है।

बहुत-से लोग ‘ऑस्टियोपैथी’ को सरल व सहज मानते हैं, लेकिन यह इतनी सरल व सहज भी नहीं। डॉ गोवर्धनलाल ने परंपरागत तौर पर अपने पिताजी से काफी कुछ सीखा, लेकिन जब इसकी डिटेल स्टडी शुरु की तो उन्हें भी नए सिरे से अभ्यास की जरूरत पड़ी।

अब तक कई कैम्प का आयोजन कर चुके है डॉ पाराशर

शरीर की ‘एनाटोमी’ की जानकारी अलग बात है और ‘ऑस्टियोपैथी’ के लिहाज से इस ज्ञान का प्रयोग अलग बात। डॉ पाराशर को ऑस्टियोपैथी के जरिये रोगों के खात्मे में सदा से यकीन रहा है और इसका अधिक से अधिक उपयोग करने की अभिलाषा भी इनके मन में सदैव रही, इसलिए इन्होंने चिकित्सा शिविरों के माध्यम से रोगियों को रोगमुक्त करने का मार्ग ढूंढ निकाला।

अब तक विभिन्न देशों में 180 कैम्प्स के अलावा देशभर में 2225 शिविर लगाकर रोगियों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर चुके हैं। जानकारी के लिए बता दें कि यह आंकड़ा अप्रैल 2014 का है। वर्षभर में डॉ पाराशर के औसतन 100 दिन तक शिविर आयोजित होते हैं। विशेषकर सेना की समस्त ब्रिगेडों, कमानों में कैंप आयोजित हो चुके हैं। लेह-लद्दाख से लेकर अण्डमान-निकोबार तक की आर्मी के लिए डॉ गोवर्धनलाल सम्माननीय व्यक्ति हैं।

देश की जानी-मानी हस्तियों का इलाज कर चुके हैं डॉ पाराशर

स्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, प्रतिभा देवीसिंह पाटिल, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व केन्द्रीय मंत्री अर्जुनसिंह, उद्योगपति आदित्य बिड़ला, नवीन जिंदल, अभिनेता धर्मेंद्र, ऋतिक रोशन, जूही चांवला, नाना पाटेकर, शिवाजी साटम, देव आनंद, राजेश खन्ना, जॉन अब्राहम, सन्नी देओल, विद्युत जामवाल, बालाकृष्णन, मिथुन चक्रवर्ती, अनुपम खेर, सलीम खान, सलमान खान, अभिनेत्री प्रियंका चौपड़ा, मयूरी कांगो, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर आदि के अलावा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश, केन्याई राष्ट्रपति जनरल किबाकी, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा आदि जैसी विशिष्ट हस्तियों ने भी ऑस्टियोपैथी में भरोसा जताया है।

सर्वाइकल स्पोन्डीलाइटिस, माइग्रेन, फ्रोजन सोल्डर, गर्दन की अकड़न, स्लिप डिस्क (लॉअर एवं अपर पार्ट) हिप्स एवीएन, घुटने संबंधी रोग जिनमें कार्टिलेज का घिस जाना, आर्थराइटिस, फ्लुइड सूख जाना, घुटने में गैप आ जाना, मोच, एन्काइलोजिंग स्पोन्डीलाइटिस, बोन डिस्लोकेशन, ऑस्टियोपोरोसिस आदि रोगों को काफूर करने में डॉ गोवर्धनलाल को महारत हासिल है।

डॉ पाराशर दक्ष एवं सफल ऑस्टियोपैथ तो हैं ही, साथ ही बहुत विनम्र व्यक्तित्व के धनी भी हैं। वे रोगियों के साथ सदैव अपनापन भरी मुस्कराहट से पेश आते हैं। सेवा-भाव को महत्त्व देते हुए रोगियों की सेवा को सदैव तत्पर रहते हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी सहायता करने में भी कभी पीछे नहीं हटते। आज जब चिकित्सा को व्यापार बना दिया गया है, डॉ पाराशर मात्र 100 रुपए में मरीज का इलाज करते हैं। मानव-सेवा को समर्पित ऐसे व्यक्तित्व बिरले ही होते हैं।

एक सम्मान समारोह के दौरान डॉ पाराशर

बी पॉजिटिव इंडिया’, डॉ पाराशर को इसी तरह मानवसेवा से जुड़े रहकर सेवा करते रहने के लिए शुभकामनाएं प्रेषित करता है। अधिक जानकारी के लिए उनके फेसबुक पेज से जुड़ा जा सकता है।

यदि आप किसी व्याधि से ग्रसित हैं तो जोधपुर स्थित श्री सांवरलाल ऑस्टियोपैथी चेरिटेबल संस्थान द्वारा लागत मात्र पर उपलब्ध सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए 0291-2972777 अथवा 84260-72222 पर बात कर सकते हैं।

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती(देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)

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MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

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