Home शिक्षा 8 घण्टे की बस कंडक्टर की नौकरी, 5 घण्टे की पढ़ाई और...

8 घण्टे की बस कंडक्टर की नौकरी, 5 घण्टे की पढ़ाई और पास कर ली यूपीएससी मेंस परीक्षा

ऊंचे हौसलों के आगे हर कठिनाई छोटी पड़ जाती है। इस बात को सच कर दिखाया है बैंगलुरु में बस कंडक्टर मधु एनसी ने। मधु ने अपनी कड़ी मेहनत से यूपीसीएस की सिविल सेवा परीक्षा के मेंस एग्ज़ाम को पास कर दिखाया है।

यूपीएससी द्वारा रिजल्ट घोषित होने पर जब मधु ने अपना रोल नंबर यूपीएससी की वेबसाइट पर देखा तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मधु बीएमटीसी में बस कंडक्टर हैं और परिवार में पहली बार स्कूल जाने वाले सदस्य भी हैं।

29 वर्षीय मधु ने बीते साल जून में यूपीएससी सिविल सेवा का प्रीलिम्स एग्जाम दिया था, जिसका रिजल्ट अक्टूबर माह में आया था। प्रीलिम्स पास करने के बाद मधु मेंस की तैयारी में जुट गए। मधु ने वैकल्पिक विषयों के लिए पॉलिटिकल साइन्स और इंटरनेशनल रेलेशन्स को चुना था।

गौरतलब है कि मधु ने प्रीलिम्स कन्नड़ भाषा में तो मेंस की परीक्षा अंग्रेजी भाषा में दी थी। मांड्या के मालावल्ली कस्बे के निवासी मधु ने महज 19 साल की उम्र में बतौर कंडक्टर काम करना शुरू कर दिया था। उस समय मधु ने सिर्फ अपनी स्कूली पढ़ाई ही पूरी की थी। मधु ने इसके बाद डिस्टेन्स लर्निंग के जरिये स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की। मधु राजनीति शास्त्र में परास्नातक हैं।

दिन में आठ घंटे लगातार बाद में खड़े रहकर नौकरी करते हुए मधु इस परीक्षा को पास करने के बाद कंडक्टर की नौकरी छोडना चाहते हैं। मधु अपनी बॉस सी शिखा की तरह आईएएस अफसर बनना चाहते हैं, जो फिलहाल बीएमटीसी में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।

मधु का कहना है कि शिखा ने उन्हे परीक्षा के पहले गाइड किया है और अब वे उन्हे इंटरव्यू के लिए तैयार कर रही हैं। इसके पहले मधु ने साल 2014 में कर्नाटक प्रशासनिक सेवा के लिए परीक्षा दी थी, लेकिन उसमें मधु सफल नहीं हो सके थे। साल 2018 में पहली बार यूपीएससी सिविल सेवा में भी मधु को सफलता नहीं मिल सकी थी, लेकिन अबकी बार मधु की मेहनत रंग लाई है।

Avatar
News Deskhttps://www.bepositiveindia.in
युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

किसान के बेटे अमित ने किया राजस्थान बोर्ड में टॉप, एम्स में बनना चाहता है न्यूरोलॉजिस्ट !

मेहनत करने वालों की हार नही होती है यह पंक्तियां राजस्थान बोर्ड के बारहवीं विज्ञान वर्ग में टॉप करने...

10 रुपए में पर्ची, 20 में भर्ती, 3 दिन नि:शुल्क भोजन देने वाला जन सेवा अस्पताल बना नज़ीर

लॉक डाउन के दौरान सेवा कार्यों को अनूठे अंदाज़ में अंजाम देकर जीता सबका दिल बीते दिनों...

पढाई छोड़कर बने गांव के प्रधान, सामूहिक भागीदारी से बदल रहे है गांव की तस्वीर !

माना कि अंधेरा घना है, मगर दिया जलाना कहां मना है । यह पंक्तियाँ उत्तरप्रदेश के एक प्रधान पर...

बच्चों को भीख मांगता देख शुरू की ‘पहल’, शिक्षा के जरिये स्लम्स के बच्चों का जीवन बदल रहे है युवा

शिकायत का हिस्सा तो हम हर बार बनते है, चलिए एक बार निवारण का हिस्सा बनते है. यह पंक्तियां...

आयुर्वेदनामा : शेर के खुले मुंह जैसे सफेद फूलों वाला अड़ूसा : एक कारगर औषधि

आयुर्वेदनामा की इस कड़ी में हम बात करेंगे अड़ूसा के बारे में जो कि एक महत्वपूर्ण औषधि है। सम्पूर्ण भारत में इसके...