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IPS अधिकारी ने शुरू की पुलिस रसोई, ड्यूटी के बाद रोज 1200 जरूरतमंदों के लिए बना रहीं खाना

देश में कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में लॉकडाउन चल रहा हैं. चिकित्साकर्मियों एवं प्रशासन के साथ ही पुलिस विभाग को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हैं. इस मुश्किल वक्त में पुलिस विभाग अपनी छवि के विपरीत जनता की सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा हैं. इसी कड़ी में असहाय एवं जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाने के लिए गुजरात के बडोदरा में एक महिला पुलिस अफसर ने ‘पुलिस रसोई (Police Rasoi)‘ शुरू की.

शहर की महिला पुलिसकर्मी ड्यूटी के साथ रोजाना 1200 जरूरतमंदों के लिए खाना बना रही हैं. आपको बात दे कि देश में लॉकडाउन के पहले दिन 25 मार्च से ही इसकी शुरुआत कर दी गयी और अब तक हज़ारों लोगों की मदद कर चुकी हैं.

राजस्थान में जन्मी और गुजरात कैडर की आईपीएस अधिकारी सरोज कुमारी (IPS Saroj Kumari) ने पुलिस रसोई की शुरुआत की थी. लॉकडाउन में भूख से त्रस्त लोगो की मदद करने के लिए सरोज ने इस पहल की योजना बनाई और खाने का इंतजाम किया.

आईपीएस सरोज कुमारी कहना है कि जब 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा हुई तो मैंने देखा हजारों गरीब भूखे-प्यासे भटक रहे थे. फिर मैंने अपनी महिला पुलिसकर्मियों से कहा कि क्यों हम ड्यूटी के बाद इनके लिए खाना बनाकर तैयार कर सकते हैं. तो उन सबने इस नेक काम में मेरी मदद की और फिर इस तरह शुरू हुई ‘पुलिस रसोई’ अब तक चल रही है.

सरोज ने बताया कि, ‘खाने बनाने के लिए हमने राशन और अन्य चीजों को जुटाया. पुलिस विभाग के साथ ही जनता के सहयोग से पहले दिन करीब 550 लोगों के लिए खाना तैयार किया.’ आपको बता दे कि इस काम में वे खुद मदद करती हैं और खाना पुलिस की टीम ही बांटती है जिससे कि जरूरतमन्द लोगो की मदद हो पाए.

ड्यूटी के बाद रोज 50 महिला पुलिसकर्मी खाना बनाती हैं जिसमे IPS अधिकारी सरोज कुमारी भी शामिल हैं. वह पहले 12 घंटे ड्यूटी करती हैं, इसके बाद अपनी पुलिस रसोई में डेली पूड़ियां बेलती और सेंकती नजर आती हैं.

आपको बता दें कि आईपीएस सरोज कुमारी राजस्थान के झुंझुनू जिले की चिड़ावा तहसील के छोटे से गांव गांव बुडानिया की रहने वाली हैं. वह गांव में पली-बढ़ी और सरकारी स्कूल में पढ़ाई करके आईपीएस बनकर मिसाल पेश की और अब ड्यूटी निभाते हुए देश लिए अपना फर्ज निभा रही हैं.

आईपीएस सराेज कुमारी के भाई रणधीर सिंह ने बताया कि उनकी बहन की पहल को पूरे गुजरात में सराहा जा रहा है. ड्यूटी के बाद हर महिला पुलिसकर्मी दाे से तीन घंटे का समय पुलिस रसाेई के लिए निकालती हैं, जाे पूरे देश में एक उदाहरण है. सेवा के कारण ही सरोज काे वूमन आईकाॅन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है.

बी पॉजिटिव इंडिया, IPS सरोज कुमारी और ‘पुलिस रसोई‘ की पूरी टीम के कार्यों को सलाम करता हैं.

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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