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चिड़ियों को बचाने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की इबारत लिख रहे हैं ग्रीन आर्मी के योद्धा

जिस रफ़्तार से पर्यावरण की दुर्दशा हुई है, मौजूदा समय हमारे लिए एक अलार्म की तरह है। यदि हम लोग अब भी न चेते तो बहुत कुछ विनाश की इस आंधी की भेंट चढ़ जाएगा।

आज की नई पीढ़ी में से कईयों ने तो घरेलू चिड़िया यानी गौरेया (House Sparrow) देखी तक नहीं होगी। बदलते वक़्त की आंधी में यह गौरेया भी विलुप्ति की कगार पर है।

उत्तरप्रदेश के बिजनौर जिले के कोटकादर गांव (तहसील नगीना) में रहने वाले एक युवा ईशान अहमद ने अपने स्तर पर इन चिड़ियों को बचाने की शुरुआत की है। खुशी की बात यह है कि उनकी इस मुहिम में उनकी साथी आज की युवा होती पीढ़ी है। वे बच्चों-बच्चियों को साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

बर्ड हाउस के निर्माण के साथ ही बच्चों के साथ पौधारोपण करते ईशान अहमद

बातचीत के दौरान ईशान अपनी बात रखते हुए कहते हैं,“मैं योग-प्राकृतिक चिकित्सक हूं। मुझे बचपन से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति खास रुचि रही है। अल्प संख्यक समुदाय की चिंतनीय होती शैक्षिक दशा को सुधारने के उद्देश्य से मैंने साल 2012 में ‘मदरसा द बेस इस्लामिक अकादमी’ की नींव रखते हुए गांव के बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की।

पर्यावरण संरक्षण के कार्य को ईशान व्यक्तिगत रूप से भी कर सकते थे, लेकिन इस महत्वपूर्ण काम को भावी पीढ़ियों तक ले जाने के लिए उन्होंने अपने मदरसे में पर्यावरण संरक्षण के लिए विद्यार्थियों की एक अनुशाषित टीम बनाने की सोची, जो विद्यार्थियों को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए भी शिक्षित कर सके।

इसी विचार को लेकर उन्होंने जूनियर कक्षा के छात्र-छात्राओं से अपने विचार साझा किए। पहली यूनिट के लिए 10 छात्र-छात्राएं तैयार हो गईं। फिर क्या था? उनके लिए एक ड्रेस कोड भी तैयार किया गया। नियम, कायदे-कानून की रूपरेखा भी तय हुई।

ईशान अहमद की ग्रीन आर्मी

यूनिट का नाम ‛ग्रीन आर्मी’ (इकोफ्रेंड कैडेट कॉर्प) रखा गया। आज वे छात्र-छात्राओं को सप्ताह में प्रत्येक बुधवार व शनिवार को छुट्टी होने के बाद दो घंटे खुद ट्रेनिंग देते हैं। इस ट्रेनिंग में परेड, योग, वृक्षारोपण, पौध तैयार करना, जनजागरण रैली, पर्यावरण कार्यशाला, वार्षिक कैम्प, स्काउटिंग, पर्यावरण प्रदर्शनी, पर्यावरण कक्षा आदि विषयों को सम्मिलित किया गया है।

छात्रों को इसमें दो वर्ष के लिए नामित किया जाता है। दो वर्ष बाद पर्यावरण संरक्षण की सामुहिक शपथ दिलवाकर प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।

चूंकि ईशान खुद एनसीसी कैडेट रहे हैं, तो उनका अनुभव इस दिशा में उन्हें आगे बढ़ा रहा है। ‛ग्रीन आर्मी’ 2013 से सतत कार्य कर रही है।

बर्ड हाउस के साथ ईशान अहमद

घरेलू चिड़िया को बचाने आगे आई ‛ग्रीन आर्मी’
गौरेया पक्षी की घटती संख्या ने ईशान का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। कई दिनों के चिंतन-मनन के बाद उन्होंने एक अभियान चलाकर काम करने का निर्णय लिया। ‛ग्रीन आर्मी’ द्वारा इसकी विधिवत शुरुआत भी की गई। लगभग साढ़े तीन वर्षों से यह अभियान बिना रुके चल रहा है।

अपने अभियान के चलते वे अब तक लगभग 500 से ज़्यादा घरौंदे यानी बर्ड हाउस लगा चुके हैं। हर साल विश्व गौरेया दिवस पर वे जनजागरूकता रैली का आयोजन भी करते हैं और इसी दौरान घरौंदे भी वितरित करते हैं।

उपलब्धि यह है कि सभी घरौंदे वे अपने हाथों से बनाते हैं। कैडेट्स ने भी घरौंदे अपने घरों में लगाए हैं। नए भर्ती होने वालों को घरौंदे दिये जाते हैं। इनकी संख्या प्रत्येक वर्ष 30 रहती है।

ईशान अहमद द्वारा निर्मित बर्ड हाउस में गौरेया

इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई जागरूक मित्रों को उन्होंने घरौंदे भेजे हैं। जब मित्र कीमत की बात करते हैं तो वे कहते हैं,“इस घरौंदे को घर में स्थापित करना ही इसकी क़ीमत है। गौरेया का इसमें आकर रहना ही इसका फल है।”

मानव जाति की प्रिय रही है चिड़िया…
गौरेया हमारे पर्यावरण का एक अभिन्न अंग है। गौरेया मानव के इर्द-गिर्द रहना पसंद करती है। मानव जाति के विकास के साथ ही इसका विलुप्त होना भी शुरू हो गया था।शहरीकरण, कीटनाशक दवाओं का प्रयोग, विकिरण, जनजागरूकता का अभाव, अवैध शिकार आदि ने इसे आज दुर्लभ श्रेणी में ला खड़ा किया है।

ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़ दें तो शहरों में इनका दिखाई देना लगभग दुर्लभ सा हो गया है। बुज़ुर्ग बताते हैं कि उनका बचपन इस चिड़िया को देखते हुए ही बीता।

बच्चों को सीड बॉल बनाना सिंखाते ईशान अहमद

गौरेया से हमने बहुत कुछ सीखा। गौरेया के जोड़े से पति-पत्नी का प्रेम, घोंसला बनाने से कर्मठता की प्रेरणा, चूं-चूं करते बच्चों को दाना खिलाने से बच्चों के लालन-पालन व पोषण का ज्ञान, घोंसले पर किसी अन्य परजीवी पक्षी के आक्रमण करने पर इनकी एकजुटता देख एकता का महत्व समझा। किस्से कहानियों और इतिहास की पुस्तकों में भी चिड़िया की गतिविधियों का वर्णन मिलता है। 

ईशान अहमद से फेसबुक पर जुड़ें या मोबाइल नम्बर 07017918595 पर अपने विचार साझा करें।

बी पॉजिटिव इंडिया’ उनकी ग्रीन आर्मी द्वारा किए कार्यों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती (देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)

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MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

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