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5 साल पहले पिता को खोया, कई बार भूखे रहकर पढ़ाई की. तमाम मुसीबतों के बीच किया टॉप !

प्रतिभा संसाधनों की मोहताज़ नही होती है

ये पंक्तिया मध्यप्रदेश की एक बोर्ड टॉपर पर सटीक बैठती है. पाँच साल पहले पिता को सड़क हादसे मे खोया तो परिवार की आर्थिक स्थिति चरमरा गयी. माँ ने नौकरी कर परिवार को सम्भाला लेकिन कई बार उन्हें भूखे पेट तक सोना पड़ा. सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक माँ नौकरी पर रहती थी तो उसे नानी के घर पर रहना पड़ा. इन तमाम दिक़्क़तों के बावजूद हार नही मानी और मध्यप्रदेश बोर्ड में शत प्रतिशत अंक प्राप्त कर पुरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया.

ऐसी ही कुछ कहानी है कर्णिका मिश्रा (Karnika Mishra) की. जब उनका रिज़ल्ट आया तो माँ काम पर गयी थी और कर्णिका को उनके घर आने का इंतजार रहा, ताकि वह मां को गले लगा सकें.

कर्णिका ने मीडिया को बताया कि दिल का दौरा पड़ने से पिता की मौत के बाद मां ने ही सबकुछ संभाला. मां और नानी ही उसके लिए सबकुछ हैं. मां सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ड्यूटी पर रहती है.

नियमित पढ़ाई है सफलता का राज़, अफ़सर बनना है लक्ष्य

मैंने कभी भी पढ़ाई सिर्फ नंबर के लिए नहीं की. नॉलेज के लिए पढ़ाई करती हूं. सालभर रोजाना सुबह से शाम तक 3 से 4 घंटे नियमित पढ़ाई करती हूं. परीक्षा के दौरान भी इसी तरह पढ़ाई करती हूं. इससे अचानक कोई बोझ नहीं होता. इससे कुछ भूलने की घबराहट भी नहीं होती.

मां और नानी ने पढ़ाई के लिए कभी भी प्रेशर नहीं डाला. मुझे पढ़ना अच्छा लगता है, क्योंकि उससे सीखने को मिलता है. अगला लक्ष्य एमपी पीएससी पास करना है. इसके लिए पीसीएम विषय से आगे की पढ़ाई करूंगी.

स्कूल में है सबकी चहेती, मंत्री ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए

कर्णिका अपने पढ़ाई के कारण स्कूल में सबकी चहेती है. फीस नहीं भर पाने के कारण स्कूल प्रबंधन ने उसकी फीस भी माफ कर दी. इसके साथ ही ट्यूशन के पैसे भी उससे नहीं लिए गए. रिजल्ट आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने अपनी टॉपर के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया. इसमें मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग भी पहुंचे. उन्होंने कर्णिका की कोचिंग की जिम्मेदारी ली है.

पिता की मौत के बाद किया पग-पग पर संघर्ष

कर्णिका के मौसा और शिक्षक अरविंद द्विवेदी ने बताया कि उसने काफी मुश्किलों का सामना किया है. पिता की मौत के बाद कर्णिका नानी के यहां रहने लगी. एक एक्सीडेंट में उसे पैर की सभी अंगुलियां गंवाना पड़ीं, लेकिन कभी हार नहीं मानी.

उसकी मां स्वाती मिश्रा पहले स्कूल में पढ़ाती थीं. उन्हें बच्चों को पढ़ाना अच्छा लगता है, लेकिन पति की मौत के बाद उन पर घर की जिम्मेदारी आ गई. इसके लिए एक कंपनी में जॉब शुरू की.

Be Positive India, कर्णिका मिश्रा के संघर्षों को सलाम करता है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है.

(मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित)

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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