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किशोर कोडवानी: 1979 से इंदौर के बिगड़ते पर्यावरण के खिलाफ लड़ रहे है जंग

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के नामी सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी 65 की उम्र में आराम करने की बज़ाय गलत कामों और नीतियों के खिलाफ दीवार बनकर खड़े हैं। शहर के बेतरतीब विकास, पर्यावरण के प्रति बेरुखी और व्यवस्थाओं के नाम पर मनमर्जी को लेकर यह बुजुर्ग आज भी चिंता करता है।

जिस उम्र में इंसान थककर बिस्तर पकड़ लेता है, वे एक और लड़ाई लड़ने निकल पड़ते हैं। उनकी लड़ाइयां समझौतों, स्वार्थ, आत्ममुग्धता, प्रचार या सुर्खियां बटोरने के लिए नहीं, बल्कि शहर को सुखी, हवादार, हराभरा और साफ सुथरा बनाए रखने के लिए हैं।

वे आम आदमी के हक़ की आवाज़ बुलंद करते हैं। उनकी सोच है कि संस्थाओं, बैनरों, परिसंवादों, समितियों से ऊपर उठकर भी एक आदमी हक़ का नारा बुलंद कर सकता है।

बातचीत के दौरान वे बचपन से अपनी कहानी साझा करते हैं,“जैसा नाम है, मैं वैसी ही किशोर हरकतें करता था। पिता पत्रकार और समाजसेवी थे, मां कलाकार थी। मैंने 1979 में अपनी शादी के बाद रचनात्मक कार्यों को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया।”

1978 के आसपास उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपने जीवन की नई शुरुआत की। नए कार्य को मजबूती से निभाने के लिए 3 साल तक शिक्षा-चिकित्सा का बड़ी बारीकी से अध्ययन किया। किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, वे शहर की हवा-पानी की लड़ाई के लिए मैदान में उतर गए। 2009 से अब तक न्यायिक प्रक्रियाएं लड़ने वाले कोडवानी ने हवा-पानी पर आर्डर लेने की इस लड़ाई के लिए न सिर्फ धरना दिया, बल्कि जल सत्याग्रह तक किया है।

8 किलोमीटर तक नदी सफाई में सफलता मिली…

इंदौर क्षेत्र में 11 नदियां हैं, जिनकी लम्बाई 260 किलोमीटर है। इसकी उप और सहायक नदियां अलग हैं। किसी के पास इतना समय नहीं कि वह इस गणित को समझे और इनकी सफाई और सुरक्षा की बात करे। वे मैप बनाकर दे चुके हैं।
संविधान के दायरे में रहकर सत्याग्रह, विरोध या प्रदर्शन करने वाले कोडवानी के कार्यों को तवज्जो देते हुए एनजीटी के न्यायाधीश 2 बार इंदौर आए।

शायद ही ऐसा कोई प्रकरण हो, जिसके पीआईएल में न्यायाधीश भोपाल से स्पॉट इंदौर आए हों। इतना ही नहीं, रजिस्ट्रार को भी भेजा, 3 बार सरकारी वकील भी आए।न्यायालय ने उनसे कहा कि अपनी निगरानी में काम करवाओ। प्रशासन ने धन की कमी के बावजूद भी उन्हें पूरे संसाधन दिए।

जिस देश में करोड़ों खर्च करने के बाद भी गंगा शुद्ध नहीं हो पाई, कम से कम गंगा की 15वीं नदी इंदौर बेसिन सरस्वती कान्ह और फ़तनखेड़ी में 8 किलोमीटर तक नदी साफ करने-करवाने में उन्हें सफलता मिली, यह कोई कम बात नहीं!

पॉल्युशन बोर्ड की पहले की रिपोर्ट भी देख सकते हैं। अब बिना एसटीपी Sewerage Treatment Plant (STP) के पानी की शुद्धता को आंखों से देख सकते हैं। जिस नदी के पानी में पहले बदबू आती थी, उस पानी को आज हाथ में लेकर निस्तारण के काम में लिया जा सकता है, वह भी बिना एसटीपी लगाए।

20 से अधिक याचिकाओं में 100 से अधिक अंतरिम आदेश…

उन्होंने 20 से अधिक याचिकाएं दायर की हैं, जिसमें अब तक 100 से अधिक अंतरिम आदेश हुए हैं। 6 याचिकाएं फाइनल हियरिंग में हैं।

इंदौर का भूजल विकट समस्या…

2009 में उन्होंने शहर के पानी के लिए लड़ाई लड़ी, तब ही आगाह किया था कि 2021 में यह इस स्थिति में आ जाएगा कि शहर पलायन करेगा। इस बात को मानने में तब सबको बहुत तकलीफ हुई। न्यायपालिका ने भी बड़ी मुश्किल से इस बात को माना था। आज जब भारत सरकार कह रही है कि इंदौर का भूजल 2022 में शून्य हो जाएगा, उनकी कही बात पर लोग विश्वास करने लगे हैं।

दिल्ली के प्रदूषण की जो स्थिति है, वह हफ्ते में एक दो बार इंदौर की हवा की भी हो रही है। 2021 में उन्होंने पलायन की बात कही थी, वह स्थिति 2022 में बहुत करीब खड़ी है।

इंदौर सबसे छोटी उम्र का शहर…

इंदौर देश का सबसे छोटी उम्र का शहर है। जनसंख्या के क्रम को क्रॉस करने वाला 14वां और व्हिकल के मामले में 750 प्रति 1000 लोगों के पास वाहन वाला देश में अव्वल, दुनिया में चौथा शहर है। विकास की अवधारणा के लिए क्या यह सस्टेनेबल सवाल खड़ा नहीं करेगा? इसकी क्या गति होगी? इन बातों को लेकर भी वे विचलित रहते हैं।

न्यायपालिका के विरुद्ध भी न्यायालय जाकर भूमि बचाई…

इंदौर के पीपल्याहाना तालाब पर न्यायपालिका अपना भवन बना रही थी, कोडवानी उसके विरुद्ध न्यायालय गए। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के विरुद्ध भी एनजीटी ने आदेश दिए। जल सत्याग्रह करने पर भी वे पूर्णतया सफल नहीं हुए।

न किसी ने डराया न प्रलोभन दिया…

साधारण मनुष्य की तरह ज़िंदगी गुजारने वाले किशोर कोडवानी को अब तक किसी अधिकारी ने गाली तक नहीं दी, न किसी बिल्डर या कॉलोनाइजर ने धमकाया। किसी ने एक रुपया रिश्वत देकर चुप हो जाने की बात तक नहीं कही। वे आज भी अपनी काइनेटिक पर चलते हैं जबकि प्रशासन उनके लिए गाड़ी की व्यवस्था करने को तैयार है।

यदि उन पर कोई हमला होता भी है, तो भी वे कोई एफआईआर दर्ज नहीं करवाएंगे। उनके कुछ करने से किसी को पीड़ा हुई होगी तो स्वाभाविक है कि उसकी प्रतिक्रिया हो, उस प्रतिक्रिया को सहने के लिए वे तैयार हैं।

पिता भी जब अपने क्रोध की अति में बच्चों पर हाथ उठाते हैं तो बच्चे बराबरी कर बैठते हैं। घर के सदस्य का बीमार होने पर इलाज करवाया जाता है न कि उसे घर से निकाला जाता है। उन्होंने जब शहर को ही अपना घर मान लिया तो वे उसके विरुद्ध कैसे जाएं?

इंसान की सुविधाओं का विकल्प पहली प्राथमिकता…

कुछ लोग सोचते हैं कि वे सिर्फ समय की बर्बादी करते हैं लेकिन उनकी सोच रही है कि उनकी इन लड़ाइयों की वजह से किसी को भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित न होना पड़े। वे दूसरे विकल्प को पहले सोचते हैं।

कान्ह नदी सफाई पायलेट प्रोजेक्ट-2 के मामले में उन्होंने पूरी हरसिद्धि बस्ती खाली करवाई, कई बार वे दारुड़ियों (शराबियों) के बीच गए। जहां पुलिस और वकीलों में मारकाट हुई, एक वकील जख्मी हुआ, उस जगह भी वे बिना प्रोटेक्शन के गए। वहां के बाशिंदों से सवाल किया,“जब मैं छोटा था, तब तुम लोग हरसिद्धि में आकर बसे, नरक की इस ज़िंदगी में और कितना जियोगे?” कोर्ट आर्डर करवाते हुए उन्हें शिफ्ट करवाया।

महीने के हज़ारों इन कामों पर खर्च…

जब से बच्चों की शादी की, उन्होंने 1 रुपए की आमदनी के लिए कोई काम नहीं किया। 1 रुपया कमाकर घर में भी नहीं दिया। पिता की विरासत से उन्हें किराया आता है, जिसका 75% हिस्सा वे घर खर्च में देते हैं, शेष खुद के कामों के लिए रखते हैं। 10 से 11000 रुपए हर महीने इस लड़ाई पर खर्च करते हैं। खूब सारे दस्तावेज़, उनका रेकॉर्ड सहेजना, टाइपिंग करवाकर कोर्ट में जनहित याचिका लगाना इसमें शामिल है।
शाम को 6 बजे तक यदि वे घर वापस न आएं तो उनकी पत्नी का फोन आ जाता है,“फिर कहीं डेरा (धरना/प्रदर्शन) लगा लिया क्या? खाना लेकर आना है?”

कर्म, मन, आत्मा और ईमानदारी से यदि आप काम करते हैं तो दुनिया में कहीं भी आपको कोई तकलीफ नहीं आती। आगे ईश्वर का रोल शुरू होता है। इस विचारधारा में विश्वास रखने वाले किशोर कोडवानी को अनेक सम्मान मिल चुके हैं। हाल ही में उन्हें ‘ग्लोबल डेण्टल केयर’ द्वारा ‛स्माईल एम्बेसडर’ अवॉर्ड दिया गया।

आप उनसे मोबाईल 09827440080 पर या फ़ेसबूक पर सम्पर्क कर सकते है.

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती (देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)

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MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

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