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सलिल भट्ट : इस म्यूजिशियन ने अपने संगीत से जीता पिता और दुनिया का दिल

विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाशाली संगीतज्ञों में शुमार हैं जयपुर के भट्ट

आज विश्व पितृ/योग/संगीत दिवस पर ‛बी पॉजिटिव इंडिया’ की ख़ास पेशकश-

भले ही वे दर्जनों देशों में अपने शास्त्रीय संगीत के जादू से स्वर लहरियां बिखेर आए हों, पर सबसे पहले शुद्ध रूप से वे एक भारतीय हैं। शास्त्रीय संगीत को जीवन बनाकर जीने वाले सलिल वी. भट्ट दुनिया के दिग्गज संगीतकार, ग्रेमी अवार्ड विजेता, पद्मभूषण और पद्मश्री जैसे सम्मानों से अलंकृत पंडित विश्वमोहन भट्ट के सुपुत्र हैं।

संगीत की दुनिया में आने की कहानी बताते हुए वे कहते हैं,“मेरे पिता जो कि मेरे गुरु भी हैं, ने कहा था,‘‘बेटा! यह काम मुश्किल है, पूरी जिंदगी दांव पर लगानी पड़ेगी, सोच-समझकर फैसला करना।’’

अपने पिता और गुरु पं. विश्वमोहन भट्ट के साथ सलिल

इतना सुनने के बाद भी मैंने कदम पीछे नहीं हटाए। यह गुरू और पिता के आशीर्वाद का ही फल है कि आज मेरी उम्मीदों को अंतरराष्ट्रीय पंख लग चुके हैं।’’

पहली प्रस्तुति है अब तक याद

वे 1993-94 तक गुरूजी के साथ संगत किया करते थे। 5-6 सालों तक उनके साथ विदेशों में भी संगत की। 1993 में उनका पहला सोलो परफॉर्मेंस बर्मिंघम (इंग्लैण्ड) में था, जहां उन्हें खूब सराहा गया।

वर्ष 2005 में उन्हें अपनी संगीत साधना के बल पर आइसलैण्ड में डेलीगेशन के सामने पहले भारतीय संगीकार के रूप में आमंत्रित किया गया। अहम बात यह है कि उन्हें अपने साथ ले जाने वाले कोई और नहीं बल्कि अब तक के सबसे लोकप्रिय भारतीय राष्ट्रपति डॉ. कलाम थे। 2005 में ही जर्मनी की संसद में प्रस्तुति देने वाले वे विश्व के पहले संगीतकार थे।

एक कार्यक्रम के दौरान सलिल भट्ट

आज संगीत आंखों से देखा जा रहा है

वे कहते हैं,“मैंने एक हजार से भी ज्यादा संगीतकारों को सुना है। बेस्ट ऑफ बेस्ट, बेस्ट ऑफ ऑल देखा है। पंडित विष्णु दिगम्बर पलुष्कर, पण्डित वीजी जोग, पंडित रविशंकर जैसे बड़े-बड़े नामों को व्यक्तिगत तौर पर अपने घर में देखा-सुना है। मेरी सोच तो यही है कि लोगों ने इस दौर में संगीत का ‘रस’ लेना छोड़ दिया है, जो देखा जा रहा है, वह महज देखने और नाचने तक सीमित है।

मौजूदा दौर में विडियोज ने म्यूजिक को रिप्लेस कर दिया है। आज संगीत को कानों की बजाय आंखों से सुना जा रहा है।

कलाकार को निःस्वार्थ भाव से जीना चाहिए

सलित बताते हैं कि उनका संगीत उनके जीने की वजह है, उनके रूह की खुराक है। जैसे हरेक व्यक्ति का अपनी जिंदगी को लेकर ड्रीम होता है, जैसे सचिन का ड्रीम क्रिकेट है, वैसे ही म्यूजिक उनका ड्रीम है। कलाकार को हमेशा निःस्वार्थ भाव से जीना चाहिए, जब तक वह खुद स्वार्थविहिन जीवन नहीं जिएगा, दूसरों को अपने संगीत से रिफ्रेश कैसे कर पाएगा?

साथी फ़नकारों के साथ सलिल भट्ट

म्यूजिक थैरेपी का चलन है जोरों पर

एक सवाल के जवाब में सलिल बताते हैं कि संगीत में रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता इतनी जबरदस्त है कि वे कभी बीमार बीमार नहीं हुए। अच्छा संगीत दिलो-दिमाग को नीट एंड क्लीन रखता है। संगीत ऐसी दुनिया का नाम संगीत है जहां तनाव, ईर्ष्या, द्वेष नहीं है।

स्तरीय संगीत सुनिए, सोच का स्तर भी स्तरीय होगा। योग और संगीत में काफी हद तकसमानता है। योग से इंद्रियों पर जीत हासिल की जाती है, संगीत से अपनी ऐषणाओं पर नियंत्रण पाया जाता है।

राग गूजरी तोड़ी, राग ललित ऐसी रागें हैं, जिनमें करूण रस की प्रधानता है और इनमें कोमल स्वरों का प्रयोग किया जाता है, जिससे एंग्जायटी दूर करने में मदद मिलती है। कोमल ऋषभ, कोमल धैवत के प्रयोग वाली रागें मसलन पूरिया धनाश्री, पूर्वी इत्यादि उच्च रक्तचाप और दिमागी बैचेनी को दूर करती हैं।

अपने परिवार के साथ सलिल भट्ट

दिमागी शिथिलता को दूर करने में केदार राग का भी महत्व कम नहीं? आलाप भी एक प्रकार की दवा है। राग बागेश्वरी, अहीर भैरव, राग किरवानी धुन भी स्ट्रेस कम करने के लिए बेहतरीन रागें हैं।

शास्त्रीय संगीत है सर्वोतम

सलिल खुद को बहुत भाग्यशाली मानते हैं, क्योंकि वे शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं। वे बताते हैं,“मैं ऐसी सभ्यता, ऐसे संगीत से हूं जिसे सुनकर आपका सीना फक्र से चौड़ा हो जाता है। मैं ऐसा संगीत बजाता हूं और ऐसे ही संगीत का प्रचार-प्रसार पूरी दुनिया में करता हूं।

मैं ऐसे संगीत को बढ़ावा दे रहा हूं, जिसे सुनने पर अपराधियों की मानसिकता में बदलाव लाया जा सकता है। ऐसा संगीत जिसे अगर पौधे भी सुनें तो, उनकी ग्रोथ रेट में भी इजाफा हो जाता है।

एक सम्मान समारोह के दौरान सलिल भट्ट

ऐसा संगीत जिससे मन-मस्तिष्क की व्याधियां दूर होती हैं। ऐसा संगीत जिसको सुनने से दिमाग में शुकून आ जाता है। मानों आप 20 घण्टे काम कर रहे थे और आधा घण्टे यह संगीत सुना तो दिमाग में तरावट आ गई। ऐसा संगीत जो दैवीय और दिव्य है।

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती (देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)

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MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

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