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मुस्कान की रसोई : ज़रूरतमंद लोगों को 5 रुपए में भरपेट भोजन, घरेलू महिलाएँ रोज़ 300 लोगों को करवाती है भोजन

शहरों मे की भागदौड़ एवं प्रतिस्पर्धा भरी ज़िंदगी में लोगों के पास अपने और अपने परिवार के लिए समय नही है लेकिन कुछ लोग होते हैं जो अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के निर्वहन के साथ ही सामाजिक सरोकार में भी सक्रिय भूमिका निभाते है। उनका कार्यक्षेत्र भले ही कम हो लेकिन बदलाव की नीयत और समाज में योगदान देने की इच्छा बहुत मज़बूत होती हैं।

ऐसी ही कुछ कहानी है राजस्थान के कोटा शहर की चंद घरेलू महिलाओं की। शहर के ज़रूरतमंद लोगों को केवल पाँच रुपए में भरपेट एवं स्वादिष्ट भोजन देने की शुरुआत की जो पिछलें 2 वर्षों से अनवरत जारी है। अब तक सैकड़ों लोगों के मुँह पर मुस्कान लाने वाली सकारात्मक पहल का नाम है ‘मुस्कान की रसोई’।

‘मुस्कान की रसोई’ पर स्वादिष्ट खाने का आनंद उठाते शहरवासी

राजस्थान के कोटा शहर के ‘मुस्कान क्लब’ की महिलाएं 2 साल से लगातार रोज़ाना 200 से अधिक जरूरतमंदों को 5 रुपए में भरपेट भोजन करा रही हैं। एक सेण्टर या स्थान से शुरू हुई यह पहल शहर के दूसरे हिस्से में भी शुरू हो गयी। इस सकारात्मक पहल की खास बात यह है कि दो साल पहले जब इसकी शुरुआत की गई तो केवल 9 महिलाएं थीं। अब 82 से अधिक महिलाएं इस अभियान से जुड़ गई हैं और अपने स्तर पर सहयोग कर रही हैं। इनमें अधिकतर महिलाएं गृहिणियां हैं, जो अपने घर को सम्भालने के साथ ही इस पुनीत कार्य में सहयोग करती हैं।

क्लब की चेयरपर्सन स्वाति शृंगी ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस अभियान की शुरुआत 14 जुलाई 2018 को श्रीनाथपुरम् में स्वयं के फ्लैट के नीचे से की थी। इससे 3 साल पहले मुस्कान क्लब बनाया था। इससे पहले यह जरूरतमंद बेटियों की शादियों में कुछ सहयोग किया करती थीं। शृंगी ने जब नोएडा के अनूप को ‘दादी की रसोई’ चलाते देखा तो उनको भी आइडिया मिल गया।

मुस्कान की रसोई’ पर स्वादिष्ट खाने का आनंद उठाते शहरवासी

उन्होंने अनूप से इस बारे में पूरी जानकारी ली और बाद में 8 साथियों के साथ इसकी शुरुआत की। महिलाएं 100-100 रुपए महीने इसके लिए देती थीं। धीरे-धीरे इनका काम देखकर महिलाएं इनसे जुड़ने लगी। अब 82 से अधिक महिलाएं सहयाेग कर रही हैं। इसके अलावा इनके रिश्तेदार, दोस्त,जन्मदिन, शादी की सालगिरह या अन्य कोई खुशी के दिन पर संस्था को एक दिन के खाने के लिए 1200 रुपए देते हैं।

अभियान की मुखिया स्वाति शृंगी परिवार संभालने के साथ-साथ पूरा खाना खुद बनाती है। इससे लोगों को घर जैसा हैल्दी फूड मिलता है। वे रोजाना सुबह 4 बजे उठती हैं। उसके बाद एक हेल्पर की मदद के साथ खाना बनाती है। इसके लिए एक रात पहले से तैयारी करनी पड़ती है।

मुस्कान की रसोई’ पर स्वादिष्ट खाने का आनंद उठाते शहरवासी

स्वाति का कहना है कि अब यह सब आदत में आ गया है। इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं होती है। इसके अलावा वे सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने लेने जाने का काम भी करती हैं। घर का खाना बनाती हैं और अन्य काम भी करती हैं।

पहला काउंटर श्रीनाथपुरम में निजी अस्पतालों के पास सुबह 10 से 11 चल रहा है। यहां प्रत्येक दिन 200 लोगों के लिए खाना बनता है। दूसरा काउंटर शीला चौधरी रोड तलवंडी पर सुबह 11 से 12 बजे तक चलता है। इसमें अभी 80 से 100 लोग खाना खा रहे हैं। दोनों जगह कभी छोला-चावल तो कभी राजमा-चावल, कभी सब्जी चावल बनाते हैं। साथ ही आचार व पापड़ भी होता है। अगर कोई अपने हिसाब का मैन्यू करवाना चाहता है।

न्यूज इनपुट्स : भास्कर

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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