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नंदकिशोर प्रजापति: इस युवा ने 33 दिनों में 180 गांवों में 13000+ गिलोय क़लम लगवाई, बनाया ‛गिलोय कॉरिडोर’

आयुर्वेद में अमृता के नाम से मशहूर गिलोय को भला कौन नहीं जानता। अमृत जैसे गुणों की वजह से इसे अमृता भी कहा जाता है। हम बारिश में भीगें, लेकिन हमें जुकाम न हो। सर्दी में टोपी पहने बिना बाहर जाएं तो बुखार न हो। गर्मियों में बाहर निकलना पड़ जाए तो लू न लगे। यह सब सम्भव है यदि हम गिलोय का सेवन करते हैं तो।

आयुर्वेद में मनुष्य की इम्यूनिटी बढ़ाने की कई जड़ी-बूटियां बताई गई हैं, इनमें सबसे असरदार गिलोय को माना जाता है।
मध्यप्रदेश में रहने वाले युवा नंदकिशोर प्रजापति लंबे अरसे से फेसबुक पर सुर्खियों में हैं।

वे आयुर्वेद से जुड़े पौधों और उनके महत्व को लेकर हर रोज़ प्रेरक पोस्ट करते रहते हैं। आज उन्हें इसी वजह से 25,538 लोग फ़ॉलो करते हैं।

बड़ों के साथ ही बच्चों को भी अपनी मुहिम में जोड़ रहे है नंदकिशोर

मानसून का फायदा उठाते हुए इस बार प्रजापति ने अपने क्षेत्र में एक ‛गिलोय कॉरिडोर’ स्थापित करने में सफलता हासिल की।

वे अपनी संस्था ‛कण्व-वन सेवा संस्थान कानवन’ के जरिए भी वृक्षारोपण जैसे कार्यों को प्रोत्साहन देते रहते हैं। अभी तक उनकी संस्था के सदस्यों द्वारा आसपास के 31 गांवों को गोद लेकर उनमें40,100 पौधे लगवाए जा चुके हैं। संस्था से जुड़े साथी प्रति रविवार श्रमदान करते हुए किये गए पौधरोपण व पौधों को सींचने का कार्य करते हैं।

बातचीत के दौरान वे बताते हैं,“इस बार बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए हमने 5 जून, 2020 से 20 जुलाई, 2020 तक 200 से अधिक गांवो में 11,000 गिलोय कटिंग रोपित करने का लक्ष्य लिया, ताकि समाज गिलोय और उसके रहस्यमयी स्वास्थ्य लाभों से परिचित हो और इससे लाभ प्राप्त करे।

इस मुहिम में स्वयंससेवियों का सहयोग भी सराहनीय रहा

33 दिनों तक चले उनके इस अभियान में उनकी संस्था के सदस्यों ने धार, रतलाम, उज्जैन, झाबुआ जिले के 180 गांवो में पहुंचकर 13,100 गिलोय कलम का वितरण कर उन्हें रोपित करवाने में अहम भूमिका निभाई। साथ ही गिलोय के महत्व को भी घर-घर पहुंचाया।

संस्था के सदस्यों ने गिलोय के संग्रह के लिए गांव के आसपास सहित माही (50 किमी) और नर्मदा नदी (100 किमी) के किनारों से भी गिलोय की बेल की कलम का संग्रह किया।

उनके इस अभियान से प्रभावित होकर उज्जैन के प्रवीण पण्ड्या, इंदौर के कमलसिंह डाबी, मेघनगर के नीरज श्रीवास्तव और रतलाम के रत्नेश विजयवर्गीय ने 2500 से अधिक गिलोय कटिंग का रोपण करवाने में मदद करने के साथ ही उसके लाभ को भी घर घर पहुंचाने में सहायता की।

जंगलों के साथ ही गाँवों में भी लोगों को जागरुक कर गिलोय लगाई गयी

5 जून, 2020 से शुरू हुए इस गिलोय रोपण अभियान का समापन ‛गिलोय कॉरिडोर’ के निर्माण के साथ हुआ।

गिलोय कॉरिडोर’ अभियान में संस्था के सदस्यों को गिलोय की कलम के संग्रह के लिए काफी भटकना पड़ा।आगामी सालों में किसी भी एक मार्ग पर भरपूर गिलोय प्राप्त हो, इस बात को ध्यान में रखते हुए कानवन से कोटेश्वर तक हर पेड़, झाड़ी, बागड़ व घरों पर गिलोय का रोपण किया गया।

इस अनोखी यात्रा को सफल बनाने में मार्ग के गांव अमोदिया गजनोद व कोद के युवा साथियों ने संस्था सदस्यों को भरपूर सहयोग दिया।

गिलोय कॉरिडोर बनाने वाली टीम के साथ नंदकिशोर

बी पॉजिटिव इंडिया’, नंदकिशोर प्रजापति और उनकी संस्था के सदस्यों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की सराहना करते हुए इन पर्यावरण योद्धाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।

फेसबुक पर नंदकिशोर प्रजापति से जुड़ने के अलावा उनसे बात (09340426370) भी कर सकते हैं।

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती (देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)

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MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

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