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भोपाल की झुग्गी-झोपड़ी के सैंकड़ों लोगों के जीवन में बदलाव ला रही हैं ‘न्याशिस’

दुसरो के दुःख को कम करना ही इंसान को इंसान बनाता हैं

यह पंक्तियाँ मध्यप्रदेश के भोपाल शहर के एक युवा पर सटीक बैठती हैं. अपनी संस्था के जरिये गरीबों एवं असहायों के दुःख कम करने के पुनीत कार्य में पिछले सात वर्षों से जुड़ा हुआ हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य , रोज़गार और महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य करने वाली संस्था अब तक सैकड़ों लोगो के जीवन में बदलाव ला चुकी हैं. सामाजिक बदलावों से समाज के में बदलाव लाने वाले युवा का नाम हैं नवीन बोड़खॆ (Naveen Bodkhe).

नवीन मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में न्याशिस सामाजिक समिति नाम से संस्था का संचालन करते हैं जिसका मुख्य उद्देश्य सेवा बस्ती के बच्चों के बीच शिक्षा का स्तर सुधारना, शाला त्यागी बच्चो का स्कूल में दाखिला करवाना, अशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर हेतु ट्रेनिंग देना शामिल हैं.

इसके साथ ही वह महिलाओं और बच्चियों के लिए विशेष कार्यक्रम, पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य, स्वास्थ सम्बन्धित विषय जागरण, वर्ष में सेवा बस्ती के बच्चों को भोपाल भ्रमण, साइंस सेंटर, मानव संग्रहालय ले जाना और अप्रत्यक्ष रुप से शिक्षित करना, भोपाल शहर के अन्य सेवा बस्ती में जाकर असहाय लोगों की समस्याओं को जानना और उन पर कार्य करना, ठंड में गर्म कपड़े वितरण और सामाजिक समरसता के जरिये बड़े और उच नीच का भेद खत्म हो उसको लेकर युवाओं द्वारा कार्यक्रम आयोजन करते हैं.

MSW की पढाई करने वाले और सेवा कार्यों और पर्यावरण में विशेष रुचि लेने वाले नवीन, बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में बताते हैं कि संस्था कह लो या विचार इसकी शुरुआत 2013-14 से हो गई थी. किसी भी संस्था की स्थापना उसमें निहित विचारों से होती है.

हम युवाओं के बीच भी कॉलेज में अध्ययन करते समय आया कि क्यू न दिवाली का त्योहार ऐसे जगह मनाई जाए जहां लोगों के बीच खुशियां कम और समस्या ज्यादा हो इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर हम कुछ युवा मिठाई और पटाखे अपने साथ सेवा बस्ती में ले गए.

मिठाई और पटाखे वितरण के बाद सभी से चर्चा के बाद ध्यान में आया कि बच्चों के बीच शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं है. इन मिठाइयों और पटाखों से कुछ समय की खुशियां तो दी जा सकती है लेकिन इन खुशियों से कई ज्यादा अच्छा होगा, यदि हम उन्हें बेहतर शिक्षा दे.

बस फिर क्या था युवाओं ने योजना बनाई और पढ़ाना शुरू कर दिया जो आज भी निरंतर जारी है. इसके साथ न्याशिस सामाजिक समिति, संस्था की स्थापना भी हुई.

प्रारम्भ में जब युवाओं ने सेवा बस्ती में जाकर शिक्षा का कार्य करना शुरू किया तो स्थान और मौसम को लेकर बहुत परेशानी रही. बस्ती में पढ़ाना जहां न लाइट न अन्य ज़रूरी सुविधा ठंड, बारिस में समस्या लेकिन युवाओं के दृढ़ संकल्प के बीच यह सभी समस्या छोटी थी.

बिना किसी स्वार्थ के सेवा कार्य करना कठिन है जहां अपनी दमड़ी अपनी चमड़ी से ही काम चलाना पड़ता था. युवाओं द्वारा अपने जेब खर्च से सुविधा एकत्रित करना तो आसान था लेकिन घर वालो की नाराज़गी सहन करना उतना ही कठिन था. बच्चों की ज़रूरी जरूरतों को जुटाना और उसके लिए आर्थिक समस्या आज भी चलती रहती है.

संस्था के सभी सदस्य अपने अपने अनुसार प्राइवेट जॉब, शिक्षण और व्यवसाय कर के संस्था को समय और हर तरह का सहयोग देने का भरपूर प्रयास करते है. सेवा बस्ती के बच्चों के बीच शिक्षा और स्वास्थ के प्रति जागरूकता बढ़ी है, उन्हें आगे क्या करना है ? बच्चो को तो बताने का प्रयास तो करते ही लेकिन परिवार भी अब अपने बच्चो को पढ़ाना चाहते है.

सभी को लगता है हमारा एक एनजीओ है तो हमारा कर्तव्य बनता है. इसके साथ शासन-प्रशासन का भी लेकिन ऐसा सोचना हमारी दृष्टि में ठीक नहीं है.यह देश हमारा है. इसमें पनपने वाला सम्पूर्ण समाज भी हमारा परिवार है. हम जो भी कार्य करते है.

वह संस्था बन कर नहीं अपितु परिवार के सदस्यों रूप में सोचते और कार्य करते हैं. इसलिए समाज का प्रतेयक नागरिक हमारे परिवार का सदस्य है. यही सोच कर हम सभी ने कार्य करना चाहिए तभी हमारे अनुसार समाज और देश में परिवर्तन होगा.

इस कार्य में नवीन के साथ ही चिमन भाई पटेल,आकाश रजक, दीपेश साहू, सतीष बैरागी, दिव्यांश मालवीय का ख़ास योगदान हैं.

नवीन आगे बताते हैं कि जो बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं, उन्हें भी स्किल डेवलपमेंट और हुनर के साथ जोड़ कर स्वरोजगार और रोजगार दिलवा दी. पहले 5 वीं कक्षा तक जाते जाते बच्चे स्कूल छोड़ दिया करते थे.

अब 10 वीं 12 वीं ITI और आगे भी पढ़ रहे हैं. पहले नशापान भी ज्यादा था स्कूल छोड़ देने के कारण ,पर अब ये बच्चे पढ़ाई के साथ जुड़ कर कम हो गया,जबकि अन्य बस्तियों में अभी भी जारी है.

बी पॉजिटिव इंडिया, नवीन और ‘न्याशिस सामाजिक समिति‘ के कार्यों की सराहना करता हैं और उम्मीद करता हैं कि आपके कार्यों से समाज में जरूर बदलाव आएगा.

Ajay Kumar Patel
Ajay Kumar Patel
बी पॉजिटिव इंडिया के झारखण्ड प्रभारी हैं. इसके साथ ही झारखण्ड के आदिवासी बच्चों की पढाई के लिए 'टीच फॉर विलेज (Teach For Village) ' नाम से संस्था चलाते हैं. इसके साथ ही सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं.

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