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निंबाराम कड़वासरा : पिता की मौत के बाद मां ने मनरेगा में मजदूरी कर पाला, झोपड़ी से एयरफोर्स तक का सफर

प्रतिभा संसाधनों की मोहताज़ नही होती हैं..

यह पंक्तियाँ राजस्थान के एक गाँव के लड़के पर सटीक बैठती है. उसके पास पढ़ाई छोड़ने के हज़ार कारण थे लेकिन पढ़ने और आगे बढ़ने का केवल एक ही कारण था. लम्बी बीमारी के बाद पिता की मौत. माँ की मनरेगा में मज़दूरी. बेइंतहा ग़रीबी लेकिन पढ़ाई में एक दम होशियार. बहनों की परवरिश का दबाव लेकिन माँ के हौसले और लोगों के आर्थिक सहयोग ने उसके सपनों को जैसे पंख दे दिए.

अब यह युवा एयरफ़ोर्स में चयनित होकर देश सेवा कर रहा है. झुग्गी-झोपड़ी से एयरफ़ोर्स का सफ़र उनके लिए बेहद कठिन था लेकिन पाठकों के लिए बहुत ही प्रेरणादायी. हालतों को दरकिनार कर सफलता की इबारत लिखने वाले युवा का नाम है निंबाराम कड़वासरा.

अपनी माँ के साथ निंबाराम कड़वासरा

निंबाराम कड़वासरा राजस्थान के जोधपुर जिले के हरलाया गाँव के रहने वाले है. वर्तमान में कर्नाटका के बेलगावी के सांबरा स्थित एयरमैन ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है. बेलगावी में दिसम्बर 2020 तक बेसिक ट्रेनिंग होगी. फिर चेन्नई में ट्रेड ट्रेनिंग होगी. प्रशिक्षण के बाद उन्हें पोस्टिंग मिलेगी.

निम्बाराम का जन्म रूपाराम व कोजीदेवी के घर में वर्ष 2001 में हुआ. वो बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे. उनके पिता रूपाराम का वर्ष 2015 में फेफड़ों की बीमारी की वजह से निधन हो गया. तब निम्बाराम नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था. पिता की मौत हो जाने पर नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने की नौबत आई तो मां ने हिम्मत जुटाई. बेटे का हौसला बढ़ाया और मनरेगा और खेतों में मज़दूरी कर परिवार चलाने की ज़िम्मेदारी उठाई.

निम्बाराम के घर पर दो छोटे से कमरे और झोपड़ी है. निम्बाराम का बचपन झोपड़ी में ही बीता. पांच बहनों के इकलौते भाई निम्बाराम का बचपन गरीबी में बीता. आठवीं तक पढ़ाई गाँव के ही सरकारी स्कूल में हुईं.

एयरफ़ोर्स मे हुआ हैं निंबाराम कड़वासरा का चयन

निम्बाराम ने नौवीं कक्षा के लिए जोधपुर के ओसियां के टैगोर शिक्षण संस्थान में दाखिला लिया. यहां 12वीं तक की पढ़ाई की. खास बात है कि निम्बाराम की गरीबी को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने उसकी फीस माफ की.

निम्बाराम ने दसवीं बोर्ड में 86 प्रतिशत और 12वीं बोर्ड में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके बाद आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने के लिए सीकर के एक कोचिंग में दाखिला लिया. कोचिंग की फ़ीस के लिए सामाजिक संगठन मदद के लिए आगे आए.

इसी दौरान डिफेंस सर्विसेज की तैयारी करने लगा. इंडियन एयरफोर्स का फार्म भरा और कड़ी मेहतन की. 2019 में एयरफोर्स में चयन हो गया. भारतीय वायुसेना सेना के सितम्बर 2019 के बैच में 2620 में से 902वीं रैंक पर एयरफोर्स ग्रुप एक्स (तकनीकी) पद पर चयन हुआ है.

बेटे का एयरफोर्स में चयन होने पर मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. साथ ही इकलौता बेटा घर से काफी दूर जाने पर मां थोड़ी मायूस भी हो गईं.

‘बी पॉजिटिव इंडिया’, निंबाराम कड़वासरा के संघर्षों को सलाम करता हैं और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाए देता है.

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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