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आत्मनिर्भर भारत : मिट्टी का ओवन तैयार कर युवाओं ने शुरू किया पिज्‍जा बेचना, कर रहे अच्‍छी कमाई !

मुसीबतों से जो हार मान जाए उसे कायर कहते हैं और मुसीबत को ही अवसर बना ले उसे सफल इंसान कहते हैं

यह पक्तियां विदेश में फाइव स्टार होटलों में काम कर लौटे युवा पर सटीक बैठती हैं। कोराना वायरस के कारण दुनिया के कई देशों में जिंदगी ठहर सी गई। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा, लेकिन अपने घर और अपनी माटी से किसे लगाव नहीं होता है। यही सोचकर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड से हमीरपुर के सनाही का युवा विपिन घर लौट आया। इसी दौरान विपिन का चचेरा भाई ललित भी घर लौट आया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के कारण विदेश से घर लौटे हमीरपुर जिले के सनाही निवासी विपिन कुमार ने कमाई का साधन खोजना शुरू किया। इसमें अपने चचेरे भाई को भी साथ लिया। फिर दोनों ने घर के पास ही मिट्टी का ओवन बनाकर पिज्जा बेचना शुरू किया है। करीब 20 दिन पहले शुरू किया यह कारोबार बढ़ रहा है। अब प्रतिदिन 125 से 150 के बीच पिज्जा बनाकर बेच रहे हैं।

मिट्टी के ओवन से तैयार करते हैं पिज़्ज़ा । Photo Credits : Jagran

ललित अमृतसर के बाघा बार्डर स्थित होटल में चीफ एग्जीक्यूटिव शेफ के तौर पर कार्य करता था जबकि विपिन विदेश में होटल में बतौर मैनेजर सेवाएं देता था।

विपिन और ललित बताते हैं कि लौटने के बाद कुछ दिनों तक तो कर्फ़्यू के कारण घर से निकलना ही कम हुआ। परिवार में पहुंचने का सुकून था लेकिन ज्यों-ज्यों लॉकडाउन बढ़ता गया तो रोजगार की चिंता भी सताने लगी।

अनलॉक-1 के बाद कुछ काम धंधा करने का मन बनाया, लेकिन एकदम इतना अधिक निवेश करना भी संभव नहीं था। इसलिए कुछ ऐसा करने की ठानी जिसमें लागत भी कम हो, गांव के आसपास वह मिलती भी न हो और सबसे महत्वपूर्ण यह था कि किसी का रोजगार भी प्रभावित न हो।

ओवन के साथ विपिन । Photo Credits : Jagran

इसके बारे में चचेरे भाई ललित से बात की और मिट्टी के ओवन से तैयार पिज्जा (वुड फायर पिज्जा) तैयार करने पर सहमति बन गई। गांव के पास ही एक दुकान देखी। दोनों ने इसे किराये पर ले लिया। वुड फायर पिज्जा तैयार करने के लिए मिट्टी के ओवन की जरूरत थी और इसे खुद ही तैयार किया।

पिज्जा बनाने के लिए अधिकतर सामग्री भी घर पर ही तैयार की जाती है। गांव में ही तैयार पनीर और सब्जियां प्रयोग में लाई जा रही हैं।

विपिन और ललित बताते हैं कि गांव में वुड फायर पिज्जा की डिमांड बढ़ रही है। शुरुआत में प्रतिदिन 10 से 15 पिज्जा बेच रहे थे, लेकिन अब प्रतिदिन 125 से 150 पिज्जा बनाकर बेच रहे हैं।

ओवन के साथ विपिन और ललित । Photo Credits : Jagran

विपिन ने बताया कि गांव के साथ बहने वाली नदी से रेत लाए। बांबी की मिट्टी (भिभोरा) और कुछ चिकनी मिट्टी लाकर उसे अच्छी तरह से महीन पीस लिया। गांव के साथ लगते जंगल से चीड़ की पत्तियों को लाकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया। इन्हें अच्छी तरह मिलाकर मिट्टी का लेप तैयार किया गया। करीब तीन हजार रुपये से एक स्टैंड बनवाया और उस पर मिट्टी से यह ओवन तैयार कर लिया। अब यहां कारोबार बढ़ रहा है। अगले सप्ताह से कांगू बाजार में एक और दुकान खोली जाएगी। इसके लिए दो युवाओं को और साथ जोड़ लिया है।

पिज्जा की अधिकतर सामग्री खुद तैयार करते हैं। सॉस भी खुद बनाते हैं। गाय के दूध से पनीर तैयार किया जाता है। इसके अलावा टमाटर और सब्जियां भी गांव में मिल जाती हैं। इस तरह यह पौष्टिकता के साथ-साथ यह पिज्जा प्राकृतिक रूप से तैयार किया जाता है।

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

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News Deskhttps://www.bepositiveindia.in
युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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