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हॉकी स्टिक ख़रीदने के नही थे पैसे, मज़दूर माँ-बाप की बेटी लेगी अमेरिका में ट्रेनिंग !

झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र खूँटी में रहती हैं यह लड़की। पिता मज़दूरी करते थे लेकिन दुर्घटना में हाथ खो दिया तो माँ ने मज़दूरी करके घर चलाना शुरू किया। आर्थिक तंगी की वजह से भाई की पढ़ाई छूटी, बहन 10वी कक्षा में फैल हुई तो आत्महत्या कर ली लेकिन परिवार की समस्याओं के सामने उसने हार मानने के बजाय हॉकी खेलना शुरू किया।

पिछलें तीन वर्ष से रोज़ 8 किलोमीटर साइकिल से सफ़र कर बिरसा मुण्डा हॉकी स्टेडीयम में अभ्यास के लिए जा रही हैं। हॉकी स्टिक ख़रीदने के लिए पैसे नही थे तो खाद्य पदार्थ मडुआ बेच पैसे जुगाड़े, छात्रवृति से पैसे बचाए तब जाकर हॉकी स्टिक ख़रीद पायी। सब विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसने ऐसा खेल दिखाया कि अमेरिका में ट्रेनिंग के लिए उसका चयन हुआ और उसका सपना सिर्फ़ ट्रेनिंग नही बल्कि भारतीय हॉकी टीम में खेलकर नाम कमाना हैं। यह कोई फ़िल्म की कहानी नही है बल्कि झारखंड के खटी ज़िले के एक छोटें से गाँव हेसल की लड़की पुण्डी सारू का सफ़रनामा हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अमेरिका के मिडलबरी कॉलेज, वरमोंट में पुंडी को हॉकी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए वह 12 अप्रैल को रांची से रवाना होगी. रांची में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में उसका अमेरिका जाने के लिए सलेक्शन हुआ।

पुण्डी सारू का हॉकी के साथ सफ़र तीन वर्ष पहले शुरू हुआ। उसकी आंखों में बड़े सपने थे, लेकिन हॉकी स्टिक नहीं थी। खरीदने के लिए घर में पैसे भी नहीं थे। खाने का मड़ुआ बेचकर और छात्रवृत्ति में मिले रुपये को मिलाकर हॉकी स्टिक खरीदी।

वह हर रोज साइकिल से गांव से 8 किमी दूर खूंटी के बिरसा मैदान हॉकी खेलने जाती है। वह कई पदक जीत चुकी है। पापा खेलने के लिए रोकते थे, पर मां ने हमेशा साथ दिया. पिता एतवा उरांव अब घर में रहते हैं। पहले मजदूरी करते थे. लेकिन 2012 में खूंटी से घर लौटने के दौरान वह वाहन की चपेट में आ गये। जिससे उनका हाथ टूट गया। जिसके बाद वह मजदूरी करने लायक भी नहीं बचे. तब से परिवार का पूरा खर्च मां चलाती हैं।

पुण्डी पेलोल उत्क्रमित उच्च विद्यालय में नौवीं की छात्रा हैं और वह कहती है कि अमेरिका जाना ही सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि निक्की प्रधान की तरह देश के लिए हॉकी खेलना है। पुण्डी के माता-पिता के साथ ही पूरा हसल गाँव अपनी बेटी की इस सफलता पर गर्व कर रहा हैं।

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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