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ताइवान से ऑनलाइन बीज मंगा कर शुरू की पीले तरबूज की खेती, लाखों में कमा रहा किसान

अगर व्यक्ति ठान ले तो कुछ भी असम्भव नहीं हैं. नवाचार हो या तकनीकी अन्वेषण हों, सभी के पीछे मज़बूत इच्छाशक्ति ही होतीं हैं. ऐसे ही एक किसान ने गर्मी के मौसम में तरबूज की बढ़ती मांग को पुरा करने के लिए उनकी खेती करना शुरू करता हैं लेकिन परम्परागत बीज या तकनीक के बजाय नवाचार का सहारा लेता हैं.

कई दिनों की मेहनत और अथक प्रयास के बाद विदेशी उन्नत क़िस्म का बीज फल देना शुरू करता हैं तो लोगों का ध्यान आकर्षित होता हैं. क्योंकि यह तरबूज़ रंग में लाल के बजाय पीले होते हैं. ये हमारे सेहत के लिए भी शानदार होता है और पोषण से भरपूर.

पिले तरबूज़ के साथ राजेंद्र बेदिया

झारखंड के एक छोटें से गाँव से आने वाले किसान राजेंद्र बेदिया ने पीले तरबूज की पैदावर ली. स्थानीय मौसम और ज़मीन के साथ ताइवानी तरबूज की खेती करके उन्होंने एक मिसाल कायम की. क्षेत्र के लोग जो कभी पागल समझते थे, वो ही अब आगे आकर उनसे इस खेती के बारे में पूछ रहे हैं. आपको बता दे कि किसान राजेंद्र ने इन तरबूजों से लागत की तीन गुनी कमाई कर ली है.

राजेंद्र झारखंड के रामगढ़ के गोला प्रखंड के चोकड़बेड़ा गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने पहली बार तरबूज की खेती की योजना बनायी थी. आसपास जंकरी इकट्ठी करने के बाद उन्होंने देशी की बजाय ताइवानी बीज अपने खेत में लगाने का निर्णय किया. इण्टरनेट का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने ऑनलाइन ताइवानी तरबूज के बीज मंगाए और खेतीबाड़ी शूरू की. कुछ दिनों के उपरांत उनकी मेहनत ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है.

राजेंद्र के खेत में लगे हुए पीले तरबूज़

राजेंद्र ने अपने खेत से तरबूज की उपज लेंना शुरू किया. आपको बता दे कि पीले तरबूज का रंग और आकार लाल तरबूज की तरह ही है. लेकिन, काटने पर ये पीला नजर आता है.

इस तरबूज को अनमोल हाइब्रिड किस्म का तरबूज कहते हैं. इसका रंग बाहर से सामान्य हरा और अंदर से पीला होता है. यह स्वाद में ज्यादा मीठा और रसीलापन लिए रहता है.

राजेंद्र बेदिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा, बिग हाट के माध्यम से उन्होंने ऑनलाइन इस बीच को ताइवान से मंगाया. 10 ग्राम अनमोल किस्म के ये बीच 800 रुपये के मिले. इसके बाद प्रयोग के तौर पर एक छोटे से खेत में प्लास्टिक मंचिंग और टपक सिंचाई तरीके से खेती की.

अपनी फसल के साथ राजेंद्र बेदिया

अब 15 क्विंटल से अधिक पीले तरबूज की खेती हुई है. उनका अनुमान है कि उन्हें 22 हजार की आमदनी हो सकती है. यह लागत मूल्य से तीन गुना ज्यादा है.

राजेंद्र बेदिया के नवाचार को देखते हुए क्षेत्र के अनय किसानों ने भी पीले तरबूज की खेती करने का निर्णय लिया. इस इलाके के किसान आधुनिक तरीके से खेती करने के लिए जाने जाते हैं. यहां के किसानों को खेती के तरीके सीखने के लिए इजराइल भी भेजा गया था.

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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