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10 वर्ष की उम्र में पिता को खोया, मां ने सिलाई करके पढ़ाया, 6 सरकारी नौकरीयाँ छोड़ बने अफसर !

किसी भी लक्ष्य हासिल करने से डरने की बजाय उसमें जुट जाओ।

यह पंक्तियाँ राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजेन्द्र सिंह शेखावत पर सटीक बैठती है. 10 वर्ष की उम्र में सर से पिता का साया उठ गया. परिवार चलाने के लिए माँ ने सिलाई का काम किया. कोलेज में पढ़ाई के साथ ही ट्यूशन पढ़ाया. वो आरक्षण के दायरे में भी नहीं आते है और प्रतियोगी परीक्षाओं में कड़ा मुकाबला होने के बावजूद नौकरी लगने के लिए सही दिशा में मेहनत करनी शुरू की.

इसी के साथ सरकारी नौकरी लगना शुरू किया और नौकरियों की लाइन लगा दी. अनन्त: अपने संघर्ष में सफल हुए और राजस्थान प्रशासनिक सेवा में अधिकारी बन गए. अब राजेन्द्र सिंह खुद आरएएस बन गए तो भी युवाओं का मार्गदर्शन में लगे हुए हैं.

राजेंद्र सिंह राजस्थान के सीकर जिले के सीकर शिश्यू-रानोली गाँव से आते है. वर्तमान में वो जयपुर जिले के दूदू में उपखंड अधिकारी के पद पर तैनात हैं. राजेंद्र सिंह की कहानी मुफ़लिसी, हिम्मत और संघर्ष के बाद क़ामयाबी की जीती-जागती मिसाल है.

Photo credit : One India Hindi

One India Hindi की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र के सीकर जिले शिश्यू रानोली गाँव के रघुनाथ सिंह शेखावत और मोहन कंवर के घर 30 जनवरी 1982 को राजेन्द्र सिंह का जन्म हुआ. परिवार में सब कुछ सही चल रहा था लेकिन महज 10 साल की उम्र में सिर से पिता का साया उठ गया. परिवार की ख़ुशियों पर वज्रपात गिर गया और परिवार में माँ के साथ दो बहनों सुमन और छोटी बहन ममता की ज़िम्मेदारी आ गयी.

इस मुश्किल घड़ी में परिवार की कमान माँ मोहन कंवर ने सम्भाली. उन्होंने हिम्मत हारने के बजाय सिलाई करके बच्चों को खूब पढ़ाया लिखाया.

परिवार की माली हालत को राजेंद्र सिंह ने बखूबी समझा और अपने बुलंद हौसलों से इन समस्याओं का सामना किया. पढ़ाई के साथ ही निजी स्कूलों मे पढ़ाया और घर-घर जाकर ट्यूशन लेते. एक समय ऐसा था कि पढ़ाई का खर्च निकालने और घर की जरूरतों को पूरा करने में मां की मदद करने के लिए राजेन्द्र सिंह रोजाना शिश्यू रानोली और आस पास के गांवों के पांच-पांच निजी स्कूलों में पढ़ाया करते थे.फिर शाम को घर-घर जाकर ट्यूशन भी लेते.

राजेन्द्र सिंह बताते हैं कि स्कूल और कॉलेज में सिर्फ वे अपना नाम ही लिखवाते थे. नियमित रूप से जा नहीं पाते थे. पढ़ाई तो खुद पर ही करते थे, क्योंकि अगर स्कूल-कॉलेज जाता तो पार्ट टाइम पढ़ाने और ट्यूशन का काम नहीं कर पाता. ये नहीं करता तो घर खर्च नहीं निकलता.

अपने परिवार के साथ राजेंद्र सिंह । photo Credit: One India Hindi

राजेंद्र सिंह के संघर्षों ने सफलता का शोर मचाना शुरू किया. वर्ष 2005 में पहली बार तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में सरकारी नौकरी लगे. खुद के कस्बे शिश्यू के ही सरकारी स्कूल में पोस्टिंग मिली.

वर्ष 2010 में राजस्थान पुलिस में उप निरीक्षक पद पर चयन हुआ. दो साल तक जोधपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण लिया. प्रशिक्षण के अंतिम चरण में नौकरी छोड़ दी.

वर्ष 2012 में एसआई के रूप में प्रशिक्षण लेने के दौरान द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में नंबर आ गया. सीकर के पिपराली के लखीपुरा के सरकारी स्कूल में ज्वाइनिंग मिली.

वर्ष 2012 में ही राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) में 708वीं रैंक पर चयन हुआ. अधीनस्थ सेवाओं में नौकरी लग रही थी, मगर ज्वाइन नहीं किया.

वर्ष 2013 में इतिहास के स्कूल व्याख्याता और एमएच सैकंडरी के रूप में चयन हुआ. बाड़मेर के चौहटन इलाके के गांव बामणोत स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बतौर हैड मास्टर ज्वाइन किया.

वर्ष 2015 में राजस्थान प्रशासन सेवा (आरएएस) में कमाल कर दिखाया. पूरे प्रदेश में पुरुष वर्ग में तीसरी रैंक प्राप्त की और वर्तमान में दूदू एसडीएम के रूप में कार्यरत हैं.

Photo credits : One India Hindi

राजेन्द्र सिंह की शादी वर्ष 2006 में श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ की राजेश कंवर के साथ हुई. इनके दो बेटी प्रतिष्ठा और भानूप्रिया हैं. खास बात यह है कि राजेन्द्र सिंह ने शादी के बाद अपनी पत्नी राजेश कंवर को भी पढ़ाया और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई. नतीजा यह रहा कि पत्नी भी सरकारी नौकरी लग गई. वे वर्तमान में शिश्यू रानोली के पास स्थित पलसाना कस्बे के सरकारी स्कूल में अंग्रेजी की टीचर के रूप में कार्यरत हैं.

राजेन्द्र सिंह बताते हैं कि सरकारी नौकरी लगने के बाद मैं मेरे जैसे कई ‘राजेन्द्र सिंह’ की मदद करना चाहता था. इसलिए शिश्यू रानोली में अपने घर पर दो साल तक युवाओं को फ्री में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई. इस बात की खुशी है कि उनमें से करीब 30 युवा लिपिक, एसआई, आरएएस आदि पदों पर सरकारी नौकरी लग गए.

अब राजेन्द्र सिंह खुद आरएएस बन गए तो भी युवाओं का मार्गदर्शन में लगे हुए हैं. समय कम मिल पाता है इसलिए राजस्थान प्रशासनिक सेवा के साक्षात्कार के समय जयपुर में सात दिन की कोचिंग कक्षा लगाते हैं. जिसमें युवाओं को साक्षात्कार के गुर सिखाए जाते हैं. उन युवाओं के रहने और खाने की व्यवस्था खुद की ओर से ही करते हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया’, RAS राजेंद्र शेखावत के संघर्षो को सलाम करता हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है.

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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