Home ग्रामीण विकास रेवंत चौधरी: इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने ग्रामीणों के साथ मिलकर 3000 से...

रेवंत चौधरी: इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने ग्रामीणों के साथ मिलकर 3000 से अधिक पेड़ लगाए

गांवों से नौकरियों के लिए पलायन करने वाले आज के युवा यदि अपनी जड़ों यानी गांव से शहरों में रहते हुए भी जुड़ाव रखते हैं तो इस जरिये भी वे बड़े बदलाव के सूत्रधार बन सकते हैं।

राजस्थान के नागौर जिला मुख्यालय से 31 किलोमीटर दूर थलांजु गांव के रेवंत चौधरी जो कि पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, अपनी जड़ों के लिए अपना योगदान देते हुए कुछ कर गुजरने का जज़्बा रखते हैं।

जयपुर में जॉब करने वाले रेवंत बताते हैं,“जयपुर में रहते हुए मन में गांव के लिए कुछ कर गुजरने का विचार आया तो गांव के अन्य साथियों (जो खुद भी शहर में रहते हैं) आशाराम, सुगन हुड्डा, नारायण, लिखमाराम आदि बात करते हुए नवंबर 2013 में ‛थलांजु विकास समिति’ की नींव रखी।

प्राईमरी स्कूल का कायाकल्प किया है थलांजू समिति ने

शुरुआत में सरकारी प्राइमरी विद्यालय जहां पर 10 फीट की ऊंचाई पर मिट्टी के बड़े-बड़े टीले थे, उनको समतल किया। वहां पर 350 पेड़ लगाए और सभी पेड़ों में बूंद-बूंद सिंचाई की व्यवस्था की। बच्चों के लिए झूले लगाए, कक्षाओं के लिए फर्नीचर की व्यवस्था की।”

इस विद्यालय में शिक्षकों की कभी कमी नहीं रही। शिक्षकों ने मिलकर 1.5 लाख रुपए एकत्रित करते हुए जल मंदिर का निर्माण करवाया। आज यह विद्यालय शिक्षा मंदिर के साथ-साथ ऑक्सीजन मंदिर के रूप में भी पहचान बना रहा है।

अक्सर हम लोगों ने ज्यादातर पार्कों को शहरों में देखा है लेकिन इस समिति से जुड़े ओमप्रकाश, जो कि वाटिका के जानकार हैं। विभिन्न भामाशाहों के सहयोग से गांव के लोक देवता गोसाई जी महाराज के मंदिर के पास गोसाई वाटिका की नींव भी रखी गई, जिसमें पहले साल छायादार पेड़ लगाए गए।

बाद में छोटे-छोटे पेड़ लगाने का काम किया गया। बूंद-बूंद सिंचाई व्यवस्था के साथ ही वाटिका में बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था के साथ निर्माण कार्य भी किया जा रहा है। अब इसे देखने के लिए अनेक पर्यावरण प्रेमी जुटने लगे हैं।

5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के बाद ‛ग्राम वन महोत्सव’ की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। ग्राम वन महोत्सव गांव का बड़ा त्यौहार बन गया है, जिसमें अनेकों पर्यावरण प्रेमी, एनसीसी कैडेट्स, वन विभाग, पद्मश्री हिम्मताराम भांभू आदि जुटते हैं। गांव से बाहर रहने वाले ग्रामीण भी इस दिन गांव पहुंचते हैं। ग्रामवासी अपने खेत की मेड़ों के आसपास, घर के पास, खेत की सड़क के पास पेड़ लगाते हैं और उन पेड़ों की जिम्मेदारी शपथ पत्र के माध्यम से लिखकर देते हैं।

अभी तक थलांजु विकास समिति ने 3500+ पेड़ लगा दिए हैं, जो सुरक्षित हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए मटका थिम्बक पद्धति से एक मटका-एक पेड़ की पहल समिति के सदस्यों ने की है।

एनसीसी कैडेट्स पौधारोपण करते हुए

ग्रामीणों ने बताया की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण दिवस पर संसद परिसर में मटका थिम्बक पद्धति से पौधारोपण कर अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया था। आज यह ग्रामीण भी उसका अनुसरण करते हुए 70 मटकियां लगा चुके हैं। इस विधि से पौधों की जड़ों में पानी दिया जाता है और पौधे सूखकर खराब नहीं होते।

ग्राम वन महोत्सव मनाए जाने से प्रभावित होकर आस पास के गांवों के लोग पर्यावरण के लिए जागरूकता दिखा रहे हैं, 10 से अधिक गांवों में अलग-अलग समितियां बनाकर पर्यावरण सरंक्षण के लिए साझा प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में अनुकूल माहौल बनकर तैयार हो रहा है, जो वास्तव में मन को आनंदित कर रहा है।

रेवंत बताते हैं कि परसाराम बांगुडा ने हमारे गांव से 8 किमी दूर खारी कर्मसोता गांव में 10 नीम के पेड़ लगाए थे। यह बात आज से 40 वर्ष पहले की है, जब वे वह पैदल चलकर नीम के पेड़ों में घड़ों से पानी डालने पहुंच जाया करते थे। इस पर हमने भी विचार किया कि अब तो हमारी भी कुछ जिम्मेदारी बनती है।

थलांजू समिति के सदस्य

गांव में पुण्यतिथि पर परिवार के सदस्यों द्वारा वृक्षारोपण किया जाता है। व्यक्ति को देवलोक हुए जितने साल गुजरते हैं, हर साल पौधों की संख्या उतनी बढ़ती जाती है।

सभी कार्य गांववासियों व पर्यावरण प्रेमियों के सहयोग से ही सम्भव हुए हैं। समिति को अभी तक 12 लाख रुपयों की आर्थिक सहायता भी मिली है। आय व्यय की सभी जानकारियां वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं। यही कारण है कि एक विश्वास के साथ भी आज यह सभी कार्य जारी हैं।

बी पॉजिटिव इंडिया, थलांजु विकास समिति और रेवंत चौधरी द्वारा किए कार्यों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।

गाँव को देखने के लिए बाहर से भी लोग आते है

आप रेवंत चौधरी से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें या इन नम्बर 9828499945 पर बात भी की जा सकती है।

सम्पादन: मोईनुद्दीन चिश्ती

( ये स्टोरी Be Positive India के साथी सुरेंद्र शर्मा ने की )

Avatar
News Deskhttps://www.bepositiveindia.in
युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

1 COMMENT

  1. आभार Be Positive India, सुरेन्द्र जी , मोईनुद्दीन चिश्ती जी का ||
    शानदार पहल आपकी, अलग अलग पॉजिटिव स्टोरीज पढ़ कर दिल खुश हो जाता है ..
    दिमाग में नई ताजगी और उत्साह उत्पन्न हो जाता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Must Read

किसान के बेटे अमित ने किया राजस्थान बोर्ड में टॉप, एम्स में बनना चाहता है न्यूरोलॉजिस्ट !

मेहनत करने वालों की हार नही होती है यह पंक्तियां राजस्थान बोर्ड के बारहवीं विज्ञान वर्ग में टॉप करने...

10 रुपए में पर्ची, 20 में भर्ती, 3 दिन नि:शुल्क भोजन देने वाला जन सेवा अस्पताल बना नज़ीर

लॉक डाउन के दौरान सेवा कार्यों को अनूठे अंदाज़ में अंजाम देकर जीता सबका दिल बीते दिनों...

पढाई छोड़कर बने गांव के प्रधान, सामूहिक भागीदारी से बदल रहे है गांव की तस्वीर !

माना कि अंधेरा घना है, मगर दिया जलाना कहां मना है । यह पंक्तियाँ उत्तरप्रदेश के एक प्रधान पर...

बच्चों को भीख मांगता देख शुरू की ‘पहल’, शिक्षा के जरिये स्लम्स के बच्चों का जीवन बदल रहे है युवा

शिकायत का हिस्सा तो हम हर बार बनते है, चलिए एक बार निवारण का हिस्सा बनते है. यह पंक्तियां...

आयुर्वेदनामा : शेर के खुले मुंह जैसे सफेद फूलों वाला अड़ूसा : एक कारगर औषधि

आयुर्वेदनामा की इस कड़ी में हम बात करेंगे अड़ूसा के बारे में जो कि एक महत्वपूर्ण औषधि है। सम्पूर्ण भारत में इसके...