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साबिर सुल्तान खान: बॉलीवुड की 300 फिल्मों में सारंगी की धुन बिखेर चुका है यह युवा

अपने मरहूम अब्बा उस्ताद सुल्तान खान की सांगीतिक विरासत को अपने प्रयोगों के साथ आगे बढ़ा रहे हैं

शास्त्रीय संगीत की दुनिया में ‛सारंगी के सुल्तान’ कहे जाने वाले उस्ताद सुल्तान खान को भला कौन नहीं जानता!

हम दिल दे चुके सनम फ़िल्म के ‛अलबेला सजन घर आयो रे’ और ‛पिया बसंती’ एलबम के ‛पिया बसंती रे काहे सताए आजा’ जैसे गीतों के जरिये करोड़ों दिलों में राज करने वाले पद्मभूषण उस्ताद सुल्तान खान ने अपनी सारंगी के बल पर फ़िल्म इंडस्ट्री में दशकों तक अपनी बादशाहत का लोहा मनवाया। 

आज उनके पुत्र उस्ताद साबिर खान अपने पिता की सांगीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। संगीत जगत के सीकर घराने से ताल्लुक रखते वाले साबिर इस घराने की 9वीं पीढ़ी के सारंगी वादक हैं।

साबिर का जन्म राजस्थान के जोधपुर में हुआ। उनके अब्बा सुल्तान खान के अलावा दादा उस्ताद गुलाब खान, नाना उस्ताद महबूब खान और उस्ताद मुनीर खान भी अपने दौर के बड़े सारंगी नवाज़ रहे हैं।

जब साबिर अपनी मां के पेट में थे, तबसे उनकी संगीत से जुड़ी तालीम शुरू हो गई थी। सारंगी की धुनों को सुनते हुए ही वे बड़े हुए। बच्चों का बचपन अक्सर खिलौनों के बीच गुज़रता है, लेकिन उनका साज़ और आवाज़ के बीच गुज़रा। उन्होंने सारंगी, सितार, बांसुरी, ढोलक और हारमोनियम की आवाज़ें सुनते हुए बचपन गुजारा। 

बातचीत के दौरान उस्ताद साबिर बताते हैं, “मेरे जन्म पर कान में अज़ान देने की रस्म के बाद मेरे दादा ने संगीत की कुछ रागें सुनाईं। मेरी संगीत की तालीम तो उसी दिन से शुरू हो गई थी। अब तो संगीत को जी रहा हूं।

वे उस्ताद अमीर खान, बड़े गुलाम अली खान, ओमकार नाथ ठाकुर और पंडित भीमसेन जोशी जैसे संगीत दिग्गजों को सुनकर बड़े हुए हैं। 

उन्होंने अपने अब्बा सुल्तान खान को जोधपुर के टाउन हॉल में ही प्रस्तुति देते पहली बार मंच पर देखा था, तब वे 6 साल के थे। उस दिन उनके अब्बा ने तबले के जादूगर उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के साथ संगत की थी।

खुद सुल्तान खान की भी ख्वाहिश थी कि उनके बेटे साबिर बड़े होकर सारंगी बजाएं। अपने अब्बा की उस प्रस्तुति के उन्होंने भी मन बना लिया कि वे सारंगी ही बजाएंगे। उस्ताद सुल्तान खान ने साबिर को उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के साथ 13 साल की उम्र में पहली बार लांच किया।

बातचीत के दौरान साबिर बताते हैं, “कॉन्सर्ट के बाद उनके अब्बा ने कहा, बेटा तुमको लंबी रेस का घोड़ा बनना है, पानी का बुलबुला नहीं! लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए 2 घण्टे का आर्टिस्ट और 22 घण्टे का अच्छा इंसान बनना! इस जन्म में प्यार करो, गाना बजाना अगले जन्म में करना!

सारंगी सिखाते वक़्त सुल्तान खान उनके गुरु होते थे। गुरु होते वक़्त वे अब्बा नहीं होते थे और अब्बा होते वक़्त गुरु नहीं रहते।

जोधपुर में जाए जन्में साबिर ने 3-4 साल रियाज़ करने के बाद मुंबई को अपनी कर्मभूमि के लिए चुना। यह निर्णय लेते वक़्त उनके मन में सारंगी को उस जगह ले जाने का सपना था, जिस जगह पर उनके अब्बा काम कर रहे थे। आज वे इस सपने को सच करने में सफल भी हुए हैं।

उनके अब्बा उनसे सदैव कहते कि स्टूडेंट बनकर रहो, गुरु मत बनो। इसी बात को याद रखते हुए वे आज भी खुद को एक शागिर्द मानते हैं, ताकि सबसे कुछ न कुछ सीखते रहें। 

वे रब का शुक्रिया अदा करते हैं कि उसने उनके पहले लाइव कॉन्सर्ट में उनके लिए एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी ऑडियंस भेजी जिनकी मौजूदगी की वजह से वे आज कामयाबी की बुलंदियों पर हैं।

अपने अब्बा और उस्ताद ज़ाकिर हुसैन के साथ मंच पर धूम मचा देने वाले साबिर की पहली लाइव परफॉर्मेंस में लता मंगेशकर, दिलीप कुमार, प्यारेलाल, अन्नू मलिक, साजिद-वाजिद, इस्माइल दरबार, श्रेया घोषाल, राजपाल यादव जैसे दिग्गज फिल्मी सितारे मौजूद थे।

उसी एक दिन की बदौलत आज भी उन्हें ख़ूब प्यार मिल रहा है। आज वे इस बात को लेकर भी काफी खुश हैं कि सारंगी का नाम आने पर उनका भी नाम आता जाता है।

13 साल की उम्र से संगीत की दुनिया में बतौर कलाकार क़दम रखने वाले साबिर आज बॉलीवुड की 300 फिल्मों में संगीत दे चुके हैं। पहली फ़िल्म करीना कपूर अभिनीत ‛चमेली’ थी जिसमें उन्होंने सारंगी बजाई। तब से अब तक वे बदलापुर, जोधा अकबर, डोर, बचना ए हसीनों, दंगल जैसी कई बड़ी फिल्मों के लिए संगीत का जादू बिखेर चुके हैं। 

साबिर ने लता मंगेशकर, आशा भोंसले और आबिदा परवीन जैसे वर्ल्ड क्लास म्यूजिक लेजेंड्स के साथ भी गैर फिल्मी एलबम किए हैं।

अब वे बॉलीवुड में बतौर म्यूजिक कंपोजर भी एंट्री कर चुके हैं। बतौर म्यूजिक कंपोजर उनके ‛द डार्क साइड ऑफ लाइफ: मुंबई सिटी’ फ़िल्म के साथ ही ‛गुस्ताखियां’ एलबम आ चुका है।

अपने अब्बा के अलावा वे उस्ताद ज़ाकिर हुसैन, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, गुलाम अली, सलीम सुलेमान, विशाल भारद्वाज, तलत अज़ीज़ और विश्व संगीत के के चोटी के कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं।

साबिर सुल्तान खान के एलबम्स

बी पॉजिटिव इंडिया’ उस्ताद साबिर सुल्तान खान द्वारा संगीत जगत में दी गई उनकी सेवाओं की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है। आप उनसे फेसबुक पर भी जुड़ सकते हैं।

प्रस्तुति: मोईनुद्दीन चिश्ती (देश के वरिष्ठ लेखक- पत्रकार हैं और अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए ख़ासे लोकप्रिय हैं)   

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MOINUDDIN RBS CHISHTY
लेखक स्वतंत्र कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार हैं। वे अपनी सकारात्मक लेखनी के लिए देशभर में लोकप्रिय हैं।

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