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प्रधानाध्यापिका की पहल ने बदली स्कूल की तस्वीर, गांव के सहयोग से करवा डाले 10 लाख के विकास कार्य

जहाँ चाह है, वहां राह है . . .

यह पंक्तियाँ एक सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका पर सटीक बैठती है. उन्होंने सरकार के साथ ही ग्रामीणों से सहयोग लेकर सरकारी स्कूल की सूरत बदल डाली. नवाचारों एवं ग्रामीणों की सक्रियता ने न केवल स्कूल में लाखों रुपये के विकास कार्य करवाए बल्कि परीक्षा परिणाम भी शत-प्रतिशत रहा है. स्कूल के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के साथ ही मुलभुत सुविधाए जैसे कक्षा-कक्ष, फर्नीचर भी मिल रही है.

यह सब कुछ कर दिखाया है राजस्थान के भरतपुर जिले के गांव पपरेरा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रश्मि चौधरी ने. सहकर्मियों के सहयोग एवं गांव और एनजीओ की मदद ने गांव के स्कूल को मॉडल स्कूल में बदल दिया. प्रधानाध्यापिका ने ग्रामीणों के मन में अपना गांव-अपना स्कूल की भावना जागृत की तो ग्रामीणों को ऐसी प्रेरणा मिली कि वह बढ़-चढ़कर विद्यालय के विकास में जुट गए.

उन्होंने विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं पर सबसे पहले ध्यान दिया जिनमे क्लासरूम निर्माण, आरओ, वाटर कूलर, फर्नीचर शामिल है. इसके बाद पुरे विद्यालय परिसर का रंग रोगन करा कर विद्यालय की तस्वीर ही बदल डाली. इन सब कार्यों में करीब 9 लाख 66 हजार रुपए का खर्च आया. सुविधाए बढ़ी तो शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की मेहनत रंग लायी और इस बार माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का परीक्षा परिणाम भी शत प्रतिशत तक पहुंच गया.

श्रेष्ठ परीक्षा परिणाम व विद्यालय में भौतिक संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए ही शिक्षा विभाग के द्वारा विद्यालय को फाइव स्टार रेटिंग दी गई है. इसके साथ ही प्रधानाध्यापिका रश्मि चौधरी को उपखण्ड स्तर पर सम्मानित भी किया गया.

आज भले ही यह विद्यालय सफलता की नयी इबारत लिख रहा हो लेकिन तीन वर्ष पहले हालात इतने अच्छे नहीं थे. संस्था प्रधान रश्मि चौधरी ने गत 3 साल में सरकार के ही भरोसे न रहकर भामाशाहों को जोड़ने की ऐसी योजना बनाई कि शिक्षकों के सहयोग व टीम वर्क के माध्यम से विद्यालय की सूरत ही बदल डाली. अब विद्यालय संसाधनों से पूर्ण, अच्छे शैक्षिक परिवेश और शैक्षिक व गुणात्मक वृद्धि के लिए जाना जाता है.

विद्यालय का नामांकन गत 2 सत्रों में 25 फीसदी बढ़ा है. ग्राम पंचायत पपरेरा तथा आसपास के गांव से आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए बोर्ड परीक्षा केंद्र की दूरी को देखते हुए संस्था प्रधान ने इसी वर्ष स्थानीय विद्यालय को बोर्ड का परीक्षा केंद्र बनवाने में सफलता भी हासिल की है.

विगत 2 वर्षों में विद्यालय के शिक्षकों व स्टाफ की ओर से भी विद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने के लिए 100 से भी अधिक पौधे लगाए गए हैं. उनकी देखभाल भी शिक्षक स्वयं करते हैं. शिक्षक बच्चों को भी पाैधरोपण करने के लिए प्रेरित करते हैं.

विद्यालय मेधावी छात्राओं को आर्थिक संबल देता है, जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. प्रतिवर्ष ऐसी 5 से 10 मेधावी छात्राओं को उनके विद्यालय से संबंधित शुल्कों को वहन किया जाता है. नेशनल मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति के अंतर्गत विद्यालय के छात्र यूनुस खान व छात्रा नेहा कुमारी का चयन हुआ. गत 2 वर्षों से लगातार ग्राम पंचायत क्षेत्र का कोई भी बच्चा विद्यालय में नामांकन से वंचित नहीं है इसीलिए ग्राम पंचायत पपरेरा को “उजियारी पंचायत” घोषित किया गया है.

बी पॉजिटिव इंडिया, प्रधानाध्यापिका रश्मि चौधरी एवं समस्त विद्यालय स्टाफ सहित गांव के दानदाताओं के कार्यों की प्रशंसा करता है और उज्जवल भविष्य की कामना करता है.

(मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित)

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News Deskhttps://www.bepositiveindia.in
युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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