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Shooter Dadi : छप्पर के शूटिंग रेंज से 50 मैडल जीतने तक की कहानी, बन रही हैं बॉलीवुड फिल्म !

उत्तर प्रदेश के बागपत की शूटर दादी (Shooter Dadi) चंद्रो तोमर (Chandro Tomar) की कामयाबी की कहानी अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा हैं. अपने गांव जौहड़ी के छप्पर की शूटिंग रेंज में साधा गया पहला निशाना दस पर क्या लगा, दादी का जीवन बदल गया. इसके बाद जो भी हुआ हैं उसका इतिहास गवाह हैं.

पिछले 21 साल में वह देश की बालिकाओं और बुजुर्गों के लिए एक आइडल बन चुकी हैं. उन्होंने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति बटोरी बल्कि विभिन्न प्रतियोगिताओ में 50 से अधिक पदक जीतने में भी कामयाब हुई. अब उनके जीवन पर मशहूर फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ‘सांड की आँख ( Saand Ki Ankh)‘ नाम से फिल्म बना रहे हैं.

Saand ki Ankh Movie Poster
शूटर दादी के जीवन पर आ रही हैं बॉलीवुड फिल्म | तस्वीर साभार : ट्वीटर

‘दादी’ यह शब्द सुनकर आपके जेहन में जो तस्वीर कौंधती है. वह कैसी है? यकीनन उसमें लोरिया सुनाती हुई कोई बुजुर्ग महिला होगी या फिर पालने में नन्हें बच्चे को खिलाती हुई ममता की कोई मूरत. 80 साल से भी ज्यादा की उम्र वाली चंद्रो तोमर ‘शूटर दादी (Shooter Dadi)’ और ‘रिवाल्वर दादी(Revolver Dadi)‘ के नाम से मशहूर हैं.

वह उम्र के आखिरी पड़ाव पर हैं, फिर भी उनका हौंसला एकदम जवान है. अपने गांव की बेटियों के लिए उन्होंने अपने गांव को ही शूटिंग हब बना दिया है.

गांव में हुआ जन्म, 60 की उम्र तक निशानेबाजी से कोई वास्ता नहीं

शामली के गांव मखमूलपुर में शूटर दादी का जन्म एक जनवरी 1932 को हुआ. सोलह साल की उम्र में जौहड़ी के किसान भंवर सिंह से उनकी शादी हो गई. अन्य गृहणियों की तरह उन्होंने भी खुद को पूरी तरह घर के कामों में झोंक दिया था. रोटी बनाने से लेकर जानवरों की देख-रेख जैसी हर जरुरी जिम्मेदारी का निर्वहन उन्होंने पूरी ईमानदारी से किया. शुरुआती जिंदगी में निशानेबाजी तो दूर उनके पास खुद के लिए तनिक भी समय नहीं था. वक्त का पहिया घूमता गया और वह बहू से मां बन गईं.

Shooter Dadi Chandro and Prakashi Tomar
शूटर दादी चंद्रो तोमर के साथ प्रकाशी तोमर | तस्वीर साभार : ट्वीटर

मां बनते ही उनपर बच्चों की देखभाल की नई जिम्मेदारियां का बोझ आ गया. इस सब में उनकी उम्र ढलती गई और वह बूढ़ी होती चली गईं. एक-एक करके उन्होंने अपने 6 बच्चों की शादी करके उन्हें गृहस्थ जीवन का तोहफा दिया. समय के इसी चक्र में उन्हें जल्द ही दादी बनने का मौका दिया. हर दादी की तरह उन्हें भी अपने पोते-पोतियों से बहुत प्यार था. चूंकि घर के कामकाज अब बच्चों की पत्नियां संभाल लेती थीं, इसलिए दादी होने का फर्ज निभाने के लिए उनके पास पर्याप्त समय होता था. वह लगभग 60 वर्ष की हो चुकी थीं.

पोती के साथ गयी शूटिंग रेंज, संयोग से निशाना लगाया और बदल गया जीवन

भरे-पूरे परिवार में निशानेबाजी सीखने की दिलचस्प कहानी है. साल 1998 में जौहड़ी में शूटिंग रेंज की शुरुआत डॉ. राजपाल सिंह ने की. दादी चंद्रो की पोती शैफाली को निशानेबाजी में दिलचस्पी थी, पर वह अकेले जाने से डरती थी. यह बात उसकी दादी चंद्रो को पता चली तो वह पोती की मदद के लिए आगे आ गईं. उन्होंने शैफाली को हौंसला दिया. साथ ही उससे कहा कि तुम घबराओ मत, मैं तुम्हारे साथ चलूंगी. अगले दिन चंद्रो तोमर अपनी पोती शेफाली को खुद जोहरी राइफल क्लब में लेकर गईं. शैफाली अभी भी बहुत डरी हुई थी. उसके हाथ बंदूक को पकड़ने में कांप रहे थे.

shooter Dadi at home
अपने घर पर शूटर दादी चंद्रो तोमर | तस्वीर साभार : ट्वीटर

यह देखकर दादी ने उसका मनोबल बढ़ाने के लिए खुद बंदूक उठा ली. सब यह देखकर हैरान थे. तभी दादी ने शूटिंग शुरू कर दी. वह इस तरह से निशाना लगा रही थीं, जैसे वह कोई प्रोफेशनल शूटर हों. शैफाली के कोच फारुख पठान दादी की निशानेबाजी से दंग रह गये थे. वह तुरंत दादी के पास पहुंचे और उनसे अनुरोध किया कि वह शूटिंग सीखें. उन्होंने दादी को बताया कि आपकी नज़र और निशाना दोनों लाजवाब हैं. थोड़ी बहुत हां-ना के बाद दादी इसके लिए तैयार हो गईं, लेकिन यह इतना आसान नहीं था.

समाज और परिवार के मिले ताने लेकिन अपने लक्ष्य पर रही अडिग

खैर, वह अपनी पोती के साथ शूटिंग के लिए आने लगीं. उनका यह फैसला परिवार और घर के लोगों को रास नहीं आया. उन्होंने दादी पर ताने कसने शुरु कर दिए. कईयों ने तो यहां तक कहा कि बुढ़िया सठिया गई है. तो कईयों ने फौज में भर्ती होने की हिदायत दे डाली. बावजूद इसके दादी रात में सबके सोने के बाद छुप-छुप कर निशाना लगाने की कोशिश करती थीं. असल में उन्हें मजा आने लगा था. नियमित अभ्यास ने जल्द ही दादी को निशानेबाजी का महारथी बना दिया.

awards to shooter dadi
एक अवार्ड समारोह के दौरान शूटर दादी चंद्रो तोमर | तस्वीर साभार : ट्वीटर

वह आसपास के इलाके में मशहूर होने लगी. उन्होंने न सिर्फ प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरु कर दिया था, बल्कि जीतना भी शुरु कर दिया था. नतीजा यह रहा कि उनका गांव उनके नाम से जाने जाना लगा. किसी को जोहरी गांव के बारे में कुछ कहना होता था, तो वह कहते थे, वही जोहरी जहां शूटर दादी रहती हैं. गांव और परिवार के लोग अब अपनी चंद्रों पर गर्व करने लगे थे. उन्होंने खुद को कोसना भी शुरु कर दिया था, क्योंकि उन्होंने कभी चंद्रों पर खूब ताने मारे थे.

एक प्रतियोगिता में हरा चुकी हैं डीआईजी को !

अपने नियमित अभ्यास के लगभग दो साल बाद उन्हें दिल्ली में आयोजित एक शूटिंग प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिला. इस प्रतियोगिता में इत्तेफाक से उनका मुकाबला उस समय के दिल्ली के डीआईजी से पड़ा. आप यकीन नहीं करेंगे कि इस मुकाबले में दादी ने डीआईजी साहब को चारों खाने चित्त करके अपनी जीत का डंका बजा दिया था. उनकी यह जीत उनके बढ़ते कदम की दस्तक थे, जो कह रहे थे कि यह तो अभी शुरुआत है. हमें बहुत दूर तलक जाना है. इतनी दूर कि हर कोई सिर्फ यही कहे कि अगले जन्म मुझे बिटिया ही कीजो.

shooter dadi with fellow shooter
साथी निशानेबाजों के साथ शूटर दादी चंद्रो तोमर | तस्वीर साभार : ट्वीटर

इस जीत के बाद दादी के पैर नहीं रुके. वह लगातार कई सारे प्रतियोगिताओं का हिस्सा बनीं और जीत का परचम लहराती रहीं. उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगभग 50 मेडल जीतकर रिकॉर्ड कायम किया. वह कोयंबटूर और चेन्नई में सिल्वर मेडल जीत चुकीं हैं. बढ़ती हुई उम्र आज तक उनके रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकी.

मिल चुके हैं कई सम्मान, बेटियों को देती हैं ट्रेनिंग !

2009 के आसपास हरियाणा के सोनीपत में हुए चौधरी चरण सिंह मेमोरियल प्रतिभा सम्मान समारोह में उन्हें सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने सम्मानित किया था. इसके अलावा हाल ही में उन्हें मेरठ की स्त्री शक्ति सम्मान से नवाजा गया. अपनी प्रतिभा के दम पर ही वह ‘शूटर दादी(Shooter Dadi)’ और ‘रिवाल्वर दादी’ की संज्ञाओं से बुलाई जाती हैं.

Shooter Dadi Family
शूटर दादी चंद्रो तोमर अपनी बेटी सीमा तोमर (अंतराष्ट्रीय निशानेबाज) एवं पोती रूबी तोमर (अंतराष्ट्रीय निशानेबाज) के साथ | तस्वीर साभार : ट्वीटर

आज चंद्रो अपने आसपास के इलाकों के अलावा दूर के क्षेत्रों के बच्चों को भी ट्रेनिंग देती हैं. उनके तैयार किए गए बच्चों में से कई आज नेशनल लेवल पर खेल रहे हैं. चंद्रो की बेटी सीमा ( Seema Tomar ) एक अंतरराष्ट्रीय शूटर है. 2010 में राइफल और पिस्तोल विश्व कप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला थीं. उनकी पोती नीतू सोलंकी, रूबी तोमर एक अंतरराष्ट्रीय शूटर है, जो हंगरी और जर्मनी की शूटिंग प्रतियोगिताओं का हिस्सा रह चुकी हैं.

अनुराग कश्यप बना रहे हैं शूटर दादी के जीवन पर फिल्म !

शूटर दादी(Shooter Dadi)’ चंद्रो में एक बात गौर करने वाली है. उन्होंने निशानेबाजी के जौहर से भले ही ढेर सारी बुलंदियों को छुआ हो, लेकिन आज भी वह उतनी ही सहज और सरल हैं, जितनी पहले थीं. अपने गांव की संस्कृति और पहनावे को उन्होंने खुद से कभी दूर नहीं होने दिया. वह आज भी गांव में रहती हैं. अपने पोते-पोतियों की देखभाल करती हैं. साथ ही जरुरत पड़ने पर घर के कामों में हाथ भी बंटाती हैं. वह युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा हैं, खासतौर पर महिलाओं के लिए, जिन्हें आज भी घर की चारदीवारी से बाहर जाने लायक नहीं समझा जाता है.

तापसी पन्नू (Taapsee Pannoo) और भूमि पेडनेकर (Bhumi Pednekar) इस फिल्म में नजर आएगी.तापसी ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का टाइटल शेयर करते हुए लिखा- यो रेहा टाइटल, क्यूँकि माने ना दिखती चिड़िया कि आँख, माने तो साँड की आँख दिखे है! फिल्म में तापसी और भूमि के अलावा विनीत सिंह, शाद रंधावा भी नजर आएंगे.

( डिस्क्लेमर : यह पोस्ट इंटरनेट रिसर्च पर आधारित हैं. बी पॉजिटिव इंडिया (Be Positive India) इस कहानी में दिए गए तथ्यों की पुष्टि नहीं करता हैं. अगर आपको कहानी में दी गयी जानकारी से आपत्ति हैं तो हमें media.bepositive@gmail.com पर संपर्क करे ! )

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