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30 परीक्षाओं में मिली असफलता, 12वी में 67% लेकिन हिंदी माध्यम से बने IPS अधिकारी !

सपने का तब तक पीछा करो जब तक साकार न हो जाए . .

यह पंक्तियाँ पंजाब कैडर के एक IPS अधिकारी पर सटीक बैठती है. बोर्ड की परीक्षा में 80-90% अंक हासिल करने के बावजूद कई विद्यार्थी निराश हो रहे है. उन्हें लग रहा है बोर्ड में आए कम नंबर उनका भविष्य ख़राब कर देंगे लेकिन हमारे आसपास ऐसे कई उदाहरण भरे पड़े है जिनसे सींखकर हम जीवन में सकारात्मक कर सकते है.

इन सफल लोगो ने साबित किया कि बोर्ड या कम नंबर आने से जीवन में कोई फर्क नहीं पड़ता है. हिंदी माध्यम हो या बारहवीं में फ़ैल होना, ऐसी कोई रूकावट आपको सफल होने से नहीं रोक सकती है.

आज हम एक ऐसे IPS अधिकारी की कहानी आप से शेयर कर रहे है जो एक छोटे से गाँव से आते है. हिंदी माध्यम से अपनी शिक्षा पूरी की. 30 से ज्यादा सरकारी परीक्षा में फ़ैल हुए. UPSC में भी उन्हें तीन प्रयासो में असफलता मिली लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय चौथा प्रयास दिया और आज पंजाब कैडर के IPS अधिकारी है. असफलता को ठेंगा दिखाकर सफलता की इबारत लिखने वाले शख्स का नाम है आईपीएस आदित्य कुमार (IPS Aditya Kumar) .

आईपीएस आदित्य कुमार अभी पंजाब के संगरूर में असिस्टेंट SP के पद पर कार्यरत है. आदित्य राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के अजीतपुरा गांव के रहने वाले है. शुरुआती शिक्षा गांव के ही सरकारी विद्यालय में हिंदी माध्यम से की. उन्हें बोर्ड परीक्षा में 67% अंक मिले लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि उन्हें सिविल सर्विसेज में जाना है.

उन्होंने इंजीनियरिंग के साथ ही कई प्रवेश परीक्षाए दी लेकिन विफल हो गए. इसके बाद उन्होंने आर्ट्स से BA की पढाई की और सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए. अंग्रेजी में अपनी कमजोरी को सफलता के आड़े नहीं आने दिया और हिंदी में यूपीएससी पास कर आईपीएस बने.

आदित्य के लिए यह सफर इतना आसान नहीं रहा और टीचर, इंजीनियर, बैंकर और राजस्थान प्रशासनिक सेवा समेत 30 परीक्षाओं में असफलता हाथ लगी लेकिन उन्होंने अपने आत्मविश्वास को टूटने नहीं दिया और चौथे प्रयास में सफल होकर अपनी मेहनत को मुकाम पर पहुंचा दिया.

आदित्य ने बताया कि तीन बार यूपीएससी में फ़ैल होने के बाद दोस्तों, रिश्तेदारों और परिचितों ने छोटी-मोटी नौकरी करने की सलाह दी. लेकिन टीचर और माता-पिता ने कहा, सपने का तब तक पीछा करो जब तक साकार न हो जाए. निगेटिव लोगों की सलाह दरकिनार कर पेरेंट्स की बात मानी और दोस्तों, रिश्तेदारों को बताए बगैर चौथी कोशिश में आईपीएस बना.

कई बार जीवन में छोटे-छोटे लक्ष्य हासिल नहीं हो पाते है तो हम निराश हो जाते है लेकिन हमें यह मानना चाहिए कि ईश्वर ने हमारे लिए बड़ा सोच रखा होता है. हमें दृढ़ता से प्रयास करते रहना चाहिए क्योंकि जीवन संघर्ष से ही संवरता और निखरता है.

आदित्य ने कहा कि ज्यादातर युवा यही सोचकर जीवन में बड़ा सोचने से डरते हैं कि हम गांव में पले-बढ़े हैं. हमारी अंग्रेजी अच्छी नहीं है. गांव में रहना और हिंदी मीडियम कोई समस्या नहीं, असल दिक्कत माइंडसेट की है. 12वीं में 67% नंबर आने के 4 साल बाद पहली बार अंग्रेजी का अखबार पढ़ना शुरू किया था. अंग्रेजी का पूरा अखबार पढ़ने में 6 घंटे लग जाते थे.

परीक्षा देने 2013 में पहली बार गांव छोड़ दिल्ली गया. हिंदी में परीक्षा देकर 2017 में 630वां रैंक हासिल किया और पंजाब कैडर मिलने पर संगरूर में एएसपी हूं. अंग्रेजी जानना-समझना अच्छा है पर यही सब कुछ नहीं. दूसरों को देख हतोत्साहित होने की बजाय अपनी योग्यता पर भरोसा रखा और कामयाबी हासिल की.

युवाओं को सलाह देते हुए IPS आदित्य कहते है कि गीतों में ड्रग्स और हथियारों का महिमा मंडन करने वालों को रोल मॉडल न बनाएं. अपनी ताकत को पहचानें और उसे सही दिशा में लगाकर समाज की तरक्की के लिए सार्थक प्रयास करें.

बी पॉजिटिव इंडिया‘, ‘IPS अधिकारी आदित्य’ की सफलता पर उन्हें बधाई देता है और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर देश के युवा खासकर हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले युवा प्रेरित होंगे.

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

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News Deskhttps://www.bepositiveindia.in
युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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