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बाल विवाह, मनरेगा में मज़दूरी, पति की असामयिक मृत्यु लेकिन संघर्ष करके बनी असिस्टंट प्रोफ़ेसर !

नारी के संघर्षों एवं इच्छाशक्ति पर जितना लिखा एवं बोला जाए, उतना ही कम पड़ता हैं. एक लड़की जिसका बाल विवाह हुआ, कम उम्र में शादी के बाद ससुराल गयी तो घर की ज़िम्मेदारियाँ उठानी पड़ी. पढ़ना-लिखना तो दूर मनरेगा में मज़दूरी की. पढ़ने की ज़िद थी तो स्वयंपाठी के रूप पढ़ना शुरू किया.

सिलाई-बुनाई, खेती-बाड़ी एवं मज़दूरी भी चलती रही. इसी बीच पति की मौत हो गयी. वृद्ध सास-ससूर और दो बच्चों की ज़िम्मेदारी उस पर आ गयी लेकिन उसने हिम्मत नही हारी. इन विषम परिस्थितियों में भी हार नही मानी और प्रतियोगी परीक्षा पास कर असिस्टंट प्रोफ़ेसर बनी. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी हैं सुनीता प्रजापति की.

राजस्थान के नागोर जिले में साधारण परिवार में जन्मी सुनीता प्रजापति का जीवन परिचय किसी दीपक की रोशनी का मोहताज नहीं है. सुनीता प्रजापति ने कठोर परिश्रम के बल पर अपने जीवन को रोशन किया है. बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखने वाली सुनीता का बाल विवाह कर दिया गया.

बाल विवाह जैसी कुप्रथा का शिकार हुई सुनीता के लिए रूढ़िवादी और अशिक्षित ग्रामीण परिवेश में पढ़ाई जारी रखना टेढ़ी खीर साबित हुआ. लेकिन सुनीता ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले विषम परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी और 10 वीं, 12 वी परीक्षा स्वयंपाठी विद्यार्थी के रूप में पास की. उसके बाद ग्रेजुऐशन तथा बीएड की पढ़ाई पूरी की .

पढ़ाई के साथ ही सुनीता ने घर की आर्थिक स्थिति मजबूत ना होने की वजह से प्राइवेट विद्यालय में अध्यापन का कार्य , सिलाई, पति के साथ कृषि कार्यों में तथा मनरेगा में भी कार्य किया. इसी दौरान पति की आसामयिक मृत्यु ने सुनीता के हौसले को तोड़ दिया, बूढ़े सास ससुर और दो बच्चो की जिम्मेदारी के बोझ तले सुनीता ने हिम्मत नहीं हारी और संघर्ष जारी रखा.

2012 में सुनीता की मेहनत रंग लाई और उसका तृतीय श्रेणी शिक्षिका के रूप में चयन हुआ. उसके बाद सुनीता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ दिन-रात मेहनत करते हुए एम ए ( संस्कृत ) की पढ़ाई पूरी की. कालेज व्याख्याता भर्ती के लिए अनिवार्य राज्य पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की, 2014 में द्वितीय श्रेणी शिक्षिका , 2015 में प्रथम श्रेणी शिक्षिका के रूप में तीसरी नौकरी प्राप्त की.

लेकिन सुनीता के मन में कुछ और ही चल रहा था वर्ष 2015 मै ही आरपीएससी के द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में सुनीता ने भाग लिया. नागौर जिले की प्रथम महिला अस्सिटेंट प्रोफेसर संस्कृत के पद पर चयन प्राप्त किया. वर्तमान में सुनीता प्रजापति राजकीय महाविद्यालय जायल नागौर में पदस्थापित है. सुनीता प्रजापति का सपना राजस्थान प्रशासनिक सेवा में जाने का है.

वर्तमान में सुनीता प्रजापति गरीब बच्चों की पढ़ाई के साथ आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा महिला सशक्तीकरण और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में भी कार्य कर रही है.

बी पॉज़िटिव इण्डिया, सुनीता प्रजापति के संघर्षों को सलाम करता है और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर देश की लड़कियाँ भी सफलता के शिखर तक पहुँचेगी.

( यह स्टोरी बी पॉज़िटिव इंडिया के साथी SN प्रजापति ने की )

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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