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कबाड़ एवं सोशल मीडिया से किताबे इकठ्ठा कर गांव में पुस्तकालय बना डाला सुरेंद्र शर्मा ने !

किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं. किताब का हर एक पन्ना जीवन के अनुभव देकर जाता हैं लेकिन इंटरनेट और वीडियोज के दौर में शायद यह आखिरी सदी होगी जिसमे किताब के पन्ने पलटे जा रहे है. किताबो की दुनिया में असीम जानकारियां छुपी हुई हैं लेकिन देश का बड़ा हिस्सा ऐसा हैं जो अभी तक किताबों से वंचित हैं.

पढाई की किताबों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता हैं तो उपन्यास, काव्य संग्रह और ग्रंथों की उपलब्धता के बारे में बात करना बेमानी हो जाता हैं. देश के ग्रामीण इलाके में सामुदायिक पुस्तकालय के जरिये इस समस्या को हल करने की कोशिश में लगे हुए हैं सुरेंद्र शर्मा (Surendra Sharma).

राजस्थान के नागौर जिले के मुंडवा उपखण्ड के गवालू गांव के रहने वाले सुरेंद्र शर्मा किताबों के जरिये अपने गांव की स्थिति सुधारना चाहते हैं. किताबे इकठ्ठा करके उन्हें ‘ज़िन्दगी सामुदायिक पुस्तकालय’ के जरिये ग्रामीण लोगो तक पहुँचाना चाहते हैं. गांव में सामुदायिक पुस्तकालय के लिए उन्हें लगभग 30,000 से ज्यादा किताबों की जरूरत हैं और सोशल मीडिया के जरिये वो लोगो से पुरानी या नयी किताबे दान में लेते हैं.

Surendra sharma with books
सुरेंद्र शर्मा किताबों के साथ | तस्वीर साभार : फेसबुक

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में सुरेंद्र शर्मा बताते हैं कि सामुदायिक पुस्तकालय के जरिये गांव में लोगो को दुनिया से जोड़ने का काम करना हैं. स्कूल एवं कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के लिए अकादमिक पुस्तकों के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पुस्तके उपलब्ध करवाना लक्ष्य हैं. इसी के साथ साहित्य प्रेमियों के लिए काव्य संग्रह, उपन्यास, जीवनिया एवं वृतांत के साथ ही धर्म ग्रन्थ की भी व्यवस्था कर रहे हैं. अब तक 2000 से ज्यादा किताबे इकट्ठा हो चुकी हैं और हमारा लक्ष्य 30,000 किताबों का हैं.

सुरेंद्र शर्मा आगे बताते हैं कि ग्रामीण अंचल में सामान्य परिवार में जन्म हुआ. शुरुआती पढाई के बाद नागौर शहर में पढाई करने के लिए चला आया लेकिन गांवों से लोगो के पलायन और ग्रामीण जीवन के प्रति नकारात्मकता हमेशा परेशान करती रही. जब भी गांव आने का मौका मिला तो गांव की बेहतरी के लिए काम करने की शुरुआत की. प्रवासी ग्रामीणों को भी साल भर में एक बार अपने गांव आने के लिए मनाया और गांव के विकास के लिए सतत प्रयास किये.

Bhanwar Lal sharma
सुरेंद्र शर्मा के प्रेरणा स्श्रोत उनके पिता भंवर लाल शर्मा | तस्वीर साभार : फेसबुक

सुरेंद्र शर्मा ग्रामीणों के शहरों की ओर पलायन पर कहते हैं कि मौसम की अनिश्चितता और लागत में वृद्धि के कारण ग्रामीणों का कृषि से मोहभंग शुरू हुआ जिसके परिणामस्वरूप लोग बेहतर रोज़गार विकल्पों के चलते शहरों की तरफ रुख करने के लिए मजबूर हुए. गांव में ही रोजगार के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए माहौल बनाने के लिए सामुदायिक पुस्तकालय शुरू करने की योजना बनाई.

सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो से पुरानी किताबे दान करने की अपील की तो लोगो का सकारात्मक जवाब मिला. राजस्थान के कई शहरों से लोगो ने किताबे दान देने के लिए तैयार हुए. पुरानी किताबों के साथ ही नयी किताबे भी मिलती हैं और किताबों के जरिये गांव के हालात बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

आपको बता दे कि 18 वर्षीय सुरेंद्र शर्मा ने इसी वर्ष बारहवीं कक्षा पास की है लेकिन इनके काम करने का जज्बा एवं साहस देखकर उम्र को केवल एक अंक माना जा सकता हैं. पिछले महीनों में उनके पिता भंवर लाल शर्मा का हार्ट अटैक से देहांत हो गया लेकिन इन्होने अपने पुनीत कार्य के लिए विषम परिस्थितियों में भी काम किया और कई बार कई किलोमीटर पैदल भी चले.

Surendra Sharma with Moinuddin Chishti
पॉजिटिव पत्रकार मोईनुद्दीन चिश्ती के साथ सुरेंद्र शर्मा | तस्वीर साभार : फेसबुक

सुरेंद्र कहते हैं कि पिता का मेरे जीवन से चला जाना अपूरणीय क्षति हैं लेकिन वो मेरे हमेशा से प्रेरणास्श्रोत रहे हैं. गांव के हालत बदलने के लिए उन्होंने ने भी अपने स्तर पर कई काम किये. उन्होंने अपने परिवार के साथ ही समाज में बदलाव के लिए प्रयत्न किये और उन्ही के कारण मैंने सामाजिक क्षेत्र में काम करने का फैसला किया.

सुरेंद्र शर्मा को उनके कार्य के लिए सोशल मीडिया पर लोगो का भरपूर समर्थन मिल रहा हैं लेकिन पॉजिटिव पत्रकार मोईनुद्दीन चिश्ती, दिलीप त्रिपाठी, जयप्रकाश मिश्रा, डॉ. महेंद्र मधुप, नवल डागा, मनीष शर्मा, लखन लाल शर्मा और प्रदीप ग्वाला (संस्कार अकादमी) के साथ ही भरत शर्मा का भी समय-समय पर मार्गदर्शन एवं प्रेरणा मिलती हैं.

अगर आप भी सुरेंद्र शर्मा या ‘ज़िन्दगी सामुदायिक पुस्तकालय‘ के लिए मदद करना चाहते हैं तो इस नंबर (+91-73576 67172) पर संपर्क करे या फेसबुक प्रोफाइल पर क्लिक करिये !

बी पॉजिटिव इंडिया, सुरेंद्र शर्मा की अनुपम पहल की प्रशंसा करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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