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ब्रेन ट्यूमर की आखिरी स्टेज पर गुजरात की सुरुचि, अगली पीढ़ी को बचाने के लिए लगाए 30 हजार पेड़ !

Suruchi Vadaliya Surat : कैंसर जैसे रोग के कारण हर वर्ष भारत में कई लोग जान गँवा देते है। कैंसर रोगी के अंतिम दिन सामान्यत: कठिन होते है: बिमारी, अवसाद और अन्य परेशानियां लेकिन कुछ लोग होते है जो इन समस्याओं में भी अपने जीवन को पूरी जीवटता से जीते है। ऐसी ही कुछ कहानी है गुजरात के सूरत शहर में रहने वाली सुरुची वडालिया की। ब्रेन ट्यूमर की आखिरी स्टेज में होने के बावजूद सुरुचि आपने वाली पीढ़ियों को बचाने के लिए काम कर रही है।

कैंसर कई तरीकों से हो सकता है और कई कारण हो सकते है लेकिन वायु प्रदूषण भी कैंसर को बढ़ाता है। सुरुचि ने वायु प्रदुषण को कम करने को ही अपना लक्ष्य बना दिया। जीवन के अंतिम पड़ाव में सुरुचि आने वाली पीढ़ियों के लिए को कैंसर से बचाने के लिए पेड़ लगा रही हैं। वह अब तक 30 हजार से ज्यादा पौधरोपण कर चुकी हैं। उनके हौसले और जज्बे को देखकर शहर के अन्य लोग भी उनकी मुहीम से जुड़ रहे है।

स्कूली बच्चों के साथ सुरुचि । तस्वीर साभार : इंटरनेट

सुरुची अपने आसपास के लोगो को वायु प्रदुषण के प्रति जागरूक कर रही है। वह अक्सर सूरत के आसपास के गांवों और स्कूलों में जाकर पौधरोपण के लिए बच्चों एवं गांववासियों को प्रोत्साहित कर रही है।

अपनी मुहीम को अगले स्तर पर ले जाने के लिए सूरत शहर में कार्यरत एनजीओ हार्ट एट वर्क से जुडी। एनजीओ के क्लीन इंडिया, ग्रीन इंडिया अभियान को वो ब्रांड एम्बेसडर बनी। यह संस्था सूरत शहर को ग्रीन सिटी बनाकर शहरवासियों की सेहत को बचाना चाहती है।

Suruchi vadaliya surat : सुरुची की सेहत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें ज्यादा चलने और ट्रेवल करने में सावधानी बरतने को कहा था लेकिन उन्होंने संस्था के लोगों के साथ पौधे लगाने का अभियान रुकने नहीं दिया। ट्रीटमेंट के दौरान अब तक 36 कीमोथेरेपी और उतनी ही रेडिएशन थेरेपी भी हो चुकी हैं। उन्हें रोजाना कई बार दवाइयां लेनी पड़ रही हैं।

पौधे के रूप में गिफ्ट देती सुरुचि । तस्वीर साभार : इंटरनेट

वो आगे कहती है कि मुझे नहीं पता कि मैं कितने दिन तक जिंदा रहने वाली हैं, लेकिन मैं चाहती हूँ कि पौधे लगाकर लोगों की सांसों में हमेशा रह सकू। भले ही कैंसर का इलाज संभव नहीं है लेकिन इस बीमारी के कारण पर तो रोक लगाने की कोशिश की जा सकती है। सिर्फ पौधे लगाकर वायू प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

दो साल के अपने सफर में उन्होंने लगभग 30 हज़ार पौधे लगाए। उनके इस साहस को देख लोगों को ना केवल प्रेरणा मिल रही है बल्कि लोग उनकी इस मुहिम में शामिल भी हो रहे हैं। खाली समय में सुरुची ने अपनी ना सही पर दूसरों की जिंदगी को बचाने के लिए पहल शुरु की।

( डिस्क्लेमर : यह पोस्ट मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं. बी पॉजिटिव इंडिया (Be Positive India) इस कहानी में दिए गए तथ्यों की पुष्टि नहीं करता हैं. अगर आपको कहानी में दी गयी जानकारी से आपत्ति हैं तो हम से media.bepositive@gmail.com पर संपर्क करे ! )

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News Deskhttps://www.bepositiveindia.in
युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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