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स्वीटी कुमारी : बिहार के गांव में रग्बी खेल रही लड़की बनी “यंग इंटरनेशनल प्लेयर ऑफ़ द ईयर”

साल 2014 में स्टेट एथलेटिक्स मीट के दौरान उनकी तेज़ी देखकर सेक्रेटरी ने उन्हें रग्बी खेलने की सलाह दी थी. अपने गांव से निकल कर पहली बार शहर में दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंची 14 साल की स्वीटी कुमारी को तब रग्बी के बारे में इससे अधिक कुछ नहीं मालूम था. लेकिन सेक्रेटरी की सलाह को उन्होंने गंभीरता से लिया. कॉलेज के ग्राउंड में रग्बी की प्रैक्टिस पर जाने लगीं.

पांच साल बाद आज स्वीटी कुमारी इंटरनेशनल यंग प्लेयर ऑफ़ ईयर हैं. यह ख़िताब उन्हें वर्ल्ड रग्बी फेडरेशन ने दिया है. इससे पहले उन्हें एशिया रग्बी अंडर 18 गर्ल्स चैंपियनशिप भुवनेश्वर, विमेन सेवेंस ट्रॉफी ब्रुनेई और एशिया रग्बी सेवेंस ट्रॉफी जकार्ता, 2019 में बेस्ट स्कोरर और बेस्ट प्लेयर का अवार्ड मिल चुका है. एसी ही कुछ फ़िल्मी कहानी हैं बिहार से आने वाली स्वीटी कुमारी की.

बिहार की राजधानी पटना से लगभग 70 किमी दूर बाढ़ प्रखंड के नवादा गांव की रहने वाली स्वीटी आज भी अपने गांव से सटे उसी कॉलेज ग्राउंड पर प्रैक्टिस करने जाती हैं.

2014 में रग्बी खेलना शुरू करने वाली स्वीटी पहली बार स्टेट मीट खेलने के लिए भुवनेश्वर गई थीं. 2015 में ही भारत की अंडर 15 टीम के लिए चुन ली गईं.

कहती हैं, “फर्स्ट टाइम इंडिया कैंप में गए तो बहुत सिखाया गया. मैं भागना तो जानती थी मगर खेल की बारीकियां नहीं समझती थी. वहां मुझे अलग से जिम्नास्टिक भी सिखाया गया.”

2016 में अंडर-16 के लिए फ़ाइनल कैंप में स्वीटी की सेलेक्शन नहीं हो पाया. लेकिन फिर से अंडर-17 के लिए खेलने दुबई गईं. 

स्वीटी के पिता दिलीप चौधरी एक इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट हैं. मां आंगनबाड़ी में सेविका हैं. कुल छह भाईबहन हैं. जिनमें स्वीटी तीसरे नंबर पर हैं. बड़ा भाई जो पहले रग्बी की प्रैक्टिस किया करता था अब पटना में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है.

पिता दिलीप चौधरी कहते हैं, “ये सबकुछ इस लड़की की मेहनत से हुआ है. हमारा इसमें सिर्फ यही योगदान है कि हमनें इसको पैदा किया है.”

आर्थिक एवं सामाजिक विषमताओं के बावजूद स्वीटी कुमारी ने अपनी मेहनत और लगन से अलग मुक़ाम पाया हैं. अभी तो यह सिर्फ़ शुरुआत है क्योंकि स्वीटी कुमारी को लम्बा सफ़र तय करना है और कई रिकार्ड और सम्मान अपने नाम करने हैं.

न्यूज़ इनपुट्स : बीबीसी इण्डिया

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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