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कोरोना संकट के बीच दिल्ली की बस्तियों में AIESEC और तपस फाउंडेशन ने किया 600+ भोजन किट का वितरण

देश में कोरोना महामारी अपने चरम पर पहुँच रही है. अनलॉक के बावजूद अभी तक सभी व्यापारिक गतिविधियां शुरू नहीं हुई है. इसके चलते दिहाड़ी मजदूरों एवं छोटे व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है. केंद्र एवं राज्य सरकारे अपने स्तर पर लोगो को राशन मुहैया करवा रही है लेकिन संकट की इस घड़ी में कई स्वयंसेवी संस्थानों ने भी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए.

इसी कड़ी में तपस और ए.आई.ई.एस.ई.सी इन डेल्ही आईआईटी ने राजधानी क्षेत्र में लोगो की मदद के लिए ‘प्रोजेक्ट मंज़र‘ शुरू किया. यह पहल क्राउड फंडिंग के ज़रिए चल रही है, साथ ही संस्था के सदस्य भी सहयोग कर रहे है. इसके तहत कोविड-19 राहत अभियान शुरू किया गया जिसमें दिल्ली की नेहरू बस्ती के लोगों को राशन सामग्री वितरित की गयी.

इस अभियान से 550-600 परिवारों को लाभ मिला. पूर्ण सामाजिक डिस्टेंसिंग दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए यह ड्राइव चलायी गयी. संस्था के हर सदस्य ने फेसमास्क, दस्ताने और सैनिटाइज़र का उपयोग किया. कोविड-19 के जोखिम से बचने के लिए टीम के सदस्यों ने राहत प्रदान करने के लिए डोर-टू-डोर ड्रॉप विधि अपनायी. उन्होंने इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी गाइडलाइन जैसे कि सामाजिक डिस्टेंस और स्वच्छता दिशानिर्देशों के बारे में लोगों को जागरूक करने का काम किया.

देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली में संचालित ए.आई.ई.एस.ई.सी ने संकट की घड़ी में लोगों की मदद करने के लिए तपस संस्था से जुड़ने का फैसला लिया. कठिन समय में लोगो को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए दिल्ली में आनंद परबत के पास नेहरू बस्ती को गोद लिया गया. सबसे पहले भोजन किट के रूप में अति आवश्यक राहत सामग्री वितरित की गयी.

प्रोजेक्ट मंज़र ’ में दोनों संस्थाए सक्रिय भूमिकाए निभा रही है. ए.आई.ई.एस.ई.सी और तपस सोशल मीडिया के साथ ही क्राउड फंडिंग के जरिये धन इकठ्ठा कर रही है और भोजन किट की पैकिंग एवं वितरण का कार्य दोनों संस्थाओं के स्वयंसेवियों के द्वारा किया जा रहा है.

उनके द्वारा शुरू किए गए सोशल मीडिया अभियान को सफलता मिल रही है. लोग उनसे जुड़कर जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे है. देखते ही देखते यह अभियान क्राउड फंडिंग के जरिये जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में सफल दिखाई दे रहा है.

ए.आई.ई.एस.ई.सी की मनप्रिया सोढ़ी कहती है कि दिल्ली आईआईटी में ए.आई.ई.एस.ई.सी, युवाओं के नेतृत्व के जरिये प्रोजेक्ट मंज़र चला रही है. इसमें कोरोना संकट के साथ ही राहत अभियान, समग्र सामुदायिक विकास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और सामाजिक संवेदना जैसे ज्वलंत मुद्दे शामिल है. इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने में तपस भागीदार बना है. जिसके जरिये हम जमीनी स्तर पर आमूलचूल परिवर्तन लाने में सफल रहे है.

तपस फाउंडेशन की एलिजा अंजुम कहती है कि संकट की इस घड़ी में अधिक से अधिक लोगों को साथ आने की जरूरत है. हम मानते हैं कि लोगों को एक दूसरे की मदद करने के लिए एक साथ आने से ही कोविड-19 महामारी से सामना किया जा सकता है. हम अच्छा काम करने वाले लोगो या समुदायों से जुड़कर मानवता के मूल्यों को आगे बढ़ाना चाहते है.

आपको बात दे कि ए.आई.ई.एस.ई.सी, दिल्ली के आई.आई.टी से वैश्विक नेटवर्क वाला विश्व का सबसे बड़ा गैर-लाभकारी, युवा-संचालित संगठन है जिसमें 127 देशों के युवा शामिल है. देश और दुनिया में मानवीय मूल्यों एवं शांति की स्थापना के लिए कार्य करता है. इसमें न केवल युवाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक मूल्यों एवं समस्याओं को समझने एवं सुलझाने का अवसर मिलता है.

आपको बता दे कि तपस फाउंडेशन एक सामाजिक संस्था है जो कि सामाजिक मुद्दों पर नुक्कड़ नाटकों एवं अन्य गतिविधियों से जागरूकता फैलाते है. इसकी शुरुआत नुक्कड़ नाटक कलाकार, टेडएक्स स्पीकर और विश्व रिकॉर्ड धारक विपुल सिंह ने की. इसके साथ ही जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए कई अन्य संगठनों के साथ मिलकर काम करते है. सोशल मीडिया के साथ ही लोगो ने तपस के काम को सराहा है और वो निरंतर सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रयासरत है.

बी पॉजिटिव इंडिया’, ‘तपस फ़ाउंडेशन’ और ‘AIESEC’ क़े द्वारा कोरोना संकट में किए गए कार्यों को सलाम करता हैं और उम्मीद करता है कि सकारात्मक कार्यों के ज़रिए समाज में बदलाव का हिस्सा बनते रहेंगे.

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News Deskhttps://www.bepositiveindia.in
युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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