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मिसाल : सिलिकॉन वैली में आलीशान घर और लाखों की नौकरी छोड़ी, देश लौटकर शुरू की जैविक खेती !

अमेरिका में शानदार नौकरी एवं लाइफस्टाइल थी लेकिन पति और पत्नी ने आरामदायक जीवन छोड़कर खेतीबाड़ी करने का निश्चय किया. एक महीने से ज्यादा समय तक जैविक खेती की ट्रेनिंग ली और आज उनका 10 एकड़ का खेत जैविक खेती का हब बन गया हैं. जल संचयन के साथ ही जैविक तरीकों से खेतीबाड़ी कर रहे इस दम्पति ने अब साथी किसानों की मदद के लिए सेमिनार एवं वर्कशॉप्स का आयोजन करना भी शुरू कर दिया. कैलिफोर्निया के सिलिकॉन वैली में आलीशान घर और लाखों की नौकरी से नड़ियाद के खेत तक सफर तय करने वाले दम्पति का नाम हैं वृंदा (Vrinda)और विवेक शाह (Vivek Shah).

गुजरात के नड़ियाद शहर में हाइवे के नजदीक विवेक शाह और वृंदा की करीब 10 एकड़ की जमीन है, जहां वे ऑर्गेनिक खेती करते हैं. खेतीबाड़ी से पहले वो दोनों सिलिकॉन वैली में एक टैक कंपनी में काम करते थे. इसी दौरान उनका प्रदुषण और रसायनयुक्त खाद्य पदार्थों से मुक्ति के लिए ऑर्गेनिक खेती करने का मन बनाया. इसके बाद वो भारत लौट आए और खेती शुरू कर दी.

दोनों को खेतीबाड़ी का कोई अनुभव नहीं था तो ऑर्गेनिक खेती शुरू करने से पहले देश में ही ‘खेती-किसानी’ से संबंधित करीब डेढ़ महीने का एक कोर्स किया. उसके बाद खेत में काम करना शुरू किया और अपने काम के जरिये अनुभव हासिल किया.

vivek and vrinda with crop
विवेक और वृंदा के खेत पर अपनी उपज के साथ | तस्वीर साभार : फेसबुक

विवेक बताते हैं कि वो खेत में बाजरा, गेहूं, आलू, केला, पपीता, जामुन, धनिया, और बैंगन जैसी कई फसलें उगाते हैं. जल संचयन के लिए खेत में तालाब बनाया. इसके साथ ही पानी को साफ करने वाले खास पौधे भी उगाए. हमारे पास 20 हजार लीटर का वर्षा जल संचयन संयंत्र (वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम) भी है, जो पूरा भरने के बाद खेत की सिंचाई की जरूरत को लंबे समय तक पूरा कर सकता है.

वृंदा बताती हैं, ‘कीट-पतंगों का हमला खेती की एक सबसे बड़ी चुनौती है. इससे निपटने के लिए हम मल्टी-क्रॉपिंग और इंटर-क्रॉपिंग का उपयोग करते हैं. इसके अलावा हम तुलसी और लेमनग्रास भी उगाते हैं’ और जैविक पदार्थों से निर्मित कीटनाशक का छिड़काव भी किया जाता हैं.

Banana chip making at farm
विवेक और वृंदा के खेत पर ही बनाना चिप्स बनाते हैं | तस्वीर साभार : फेसबुक

इसके साथ ही आमदनी बढ़ाने के लिए खाद्य प्रसंस्करण भी किया जाता हैं. केलो को उत्पादन ज्यादा होता हैं तो केले की चिप्स बनायीं जाती हैं जबकि अन्य फलों से जैम और सॉस बनाया जाता हैं. खेतो से पैदा होने वाले वेस्ट से वो खाद बनाते हैं जिसका उपयोग एक बार फिर उन्ही खेतों में होता हैं.

ट्रेनिंग एवं खुद के अनुभव के बाद विवेक साथी किसानों की मदद के लिए वर्कशॉप एवं सेमीनार का आयोजन करते हैं और उन्हें खेतीबाड़ी की नवीनतम जैविक तकनीकों से अवगत कराते हैं. विवेक अपने खेत में ही घर बनाना चाहते हैं जो खेत की मिट्टी, गोबर एवं पत्थर जैसे प्राकृतिक तत्वों से बनेगा.

farmers working at farm
विवेक और वृंदा के खेत पर काम करते हुए किसान | तस्वीर साभार : फेसबुक

विवेक और वृंदा अपने खेत पर बर्थडे पार्टी एवं अन्य आयोजन करने की व्यवस्था भी करते हैं. इसके साथ ही लोगो को अपने खेत पर आमंत्रित किया जाता हैं. स्थानीय किसानों को रोज़गार उपलब्ध करवाने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया, वृंदा और विवेक शाह के प्रयासों की सराहना करता हैं और उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर साथी किसान जैविक खेती करने के लिए प्रेरित होंगे.

(मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित)

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युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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