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यशस्वी जायसवाल : टेंट हाउस में रहा, भूखा सोया, पानीपुरी बेची लेकिन क्रिकेट जगत में बना ली अपनी पहचान !

आपको संघर्ष की परिभाषा जाननी हैं तो इस युवा के बारे में पढ़िए जो अपनी प्रतिभा की बदौलत U-19 क्रिकेट विश्व कप में जलवा बिखेर रहा हैं। अपने शानदार खेल की बदौलत भारतीय टीम को फ़ाइनल में पहुँचा दिया, वो भी पाकिस्तान को 10 विकेट से रौंदकर। अपनी शतकीय पारी की बदौलत यह खिलाड़ी रातों-रात स्टार बना और सोशल मीडिया पर छा गया लेकिन इस खिलाड़ी का अब तक का सफ़र किसी फ़िल्म की कहानी सा प्रतीत होता हैं। हम बात कर रहे हैं भारतीय U-19 क्रिकेट टीम के सदस्य यशस्वी जायसवाल की।

उत्तर प्रदेश के भदोही से मुम्बई का सफ़र, क्रिकेट क्लब के ग्राउंड्स मैन के साथ टेण्ट में रहना, रामलीला के दौरान पानी पुरी बेचना सब कुछ उसकी निजी ज़िंदगी का हिस्सा लेकिन जब वो बैट लेकर मैदान पर उतरता हैं तो उसका लक्ष्य केवल टीम को जिताना रहता हैं। सब संघर्षों को भूल वो अपनी टीम को जिताने में योगदान देना चाहता हैं।

एक मैच के दौरान यशस्वी । तस्वीर साभार : इंटरनेट

जब यशस्वी पहली बार मुम्बई पहचा तो उसकी उम्र महज़ 11 साल थी। भदोही से निकलकर वह मुंबई के आज़ाद मैदान ग्राउंड के मुस्लिम यूनाइटेड क्लब में टेंट रहता था। इतने पैसे नही थे कि कमरा किराया ले सके लेकिन क्रिकेट सीखने की ललक मे वो लगभग तीन साल टेंट में रहा। कुछ समस्याओं के कारण वो क्रिकेट मैदान के नज़दीक ही एक डेयरी शॉप पर रहने लगे. खाने और रहने के साथ ही निजी ज़िंदगी में तकलीफ़ों के बीच सोते-जागते उनके दिल-दिमाग में सिर्फ़ एक चीज़ रहती, ‘भारत के लिए क्रिकेट खेलना है.’

इन घटनाओं के बावजूद वो क्लब लेवल पर शानदार प्रदर्शन करते रहे। क्लब लेवल से उनका चयन मुम्बई की टीम में हुआ और अब यशस्वी 18 साल के हो गए हैं. मिडिल ऑर्डर बैट्समैन हैं, जिनकी बल्लेबाज़ी एक छाप सी छोड़ती है. अब वह दक्षिणी अफ़्रीका में होने वाले अंडर-19 टीम में भाग ले रहे और बेहतर प्रदर्शन के ज़रिए दर्शकों के साथ ही क्रिकेट एक्सपर्ट्स का भी दिल जीत रहे हैं।

यशस्वी अपनी किट के साथ में घर पर । तस्वीर साभार : इंटरनेट

यशस्वी अपने संघर्ष के बारे में कहते हैं, “आप क्रिकेट के मेंटल प्रेशर पर बात करते हैं, जबकि मैं अपनी लाइफ़ में उससे बड़ा प्रेशर देख चुका हूं. ये सब चीज़ें मुझे मज़बूत बनाती हैं. रन बनाना उतना महत्वपूर्ण नहीं है. मैं जानता हूं कि मैं रन बना सकता हूं और विकेट ले सकता हूं. मेरे लिए ये ज़्यादा ज़रूरी है कि शाम और सुबह का खाना मुझे मिलेगा कि नहीं. मुझे उसकी व्यवस्था कैसे करनी है.”

यूपी के भदोही के रहने वाले यशस्वी के पिता एक छोटी सी दुकान चलाते हैं. वह अपने दो भाइयों में बड़ा है. भदोही से मुंबई तक का सफ़र उसने सिर्फ़ क्रिकेट खेलने के लिए तय किया है। यशस्वी के पिता मुश्किल से घर चलाते हैं. ऐसे में उन्होंने यशस्वी को उसके अंकल संतोष के साथ मुंबई भेज दिया, जो वर्ली में एक किराए के मकान में रहते हैं. लेकिन, वह घर इतना बड़ा नहीं था कि एक शख़्स और वहां रह पाए।

संतोष मुस्लिम यूनाइटेड क्लब में मैनेजर हैं, तो उन्होंने मालिक से बात की कि संतोष को टेंट में रख लें। उसके बाद अगले तीन साल तक टेंट ही उसका घर बन गया। आज़ाद मैदान में होने वाली राम लीला में वह पानीपुरी बेचता है और फलों बेचने में मदद करता है. लेकिन, ऐसी कई रात आई, जब जिस ग्राउंड्समैन के साथ वह रहता था, उससे उसकी लड़ाई हो गई और उसे भूखा ही सोना पड़ा.

भारतीय U-19 टीम के साथ यशस्वी । तस्वीर साभार : इंटरनेट

आज भले ही यशस्वी भारतीय टीम का हिस्सा हैं। राजस्थान रायल्स ने उन्हें आईपीएल के लिए 2 करोड़ 40 लाख में ख़रीदा हैं लेकिन उनके लिए भारत की नेशनल क्रिकेट टीम में जगह बनाना अपने आप में एक बड़ा संघर्ष है।

ये संघर्ष यशस्वी जायसवाल जैसे बच्चों के लिए और बड़ा हो जाता है, जो सामाजिक, आर्थिक संकट से उबरते हुए कोशिश करते हैं. यशस्वी का इस मकाम तक पहुंचना किसी प्रेरणा से कम नहीं.

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News Deskhttps://www.bepositiveindia.in
युवाओं का समूह जो समाज में सकारात्मक खबरों को मंच प्रदान कर रहे हैं. भारत के गांव, क़स्बे एवं छोटे शहरों से लेकर मेट्रो सिटीज से बदलाव की कहानियां लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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